पहली बार भाजपा प्रत्याशियों की गिनती कांग्रेस से अधिक

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यह पहली बार हुआ है कि किसी लोकसभा चुनाव  में भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के मुकाबले अधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है। भाजपा ने 2009 में 433, 2014 में 428 और 2019 में इन चुनावों में 437 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए हैं।  जबकि इस बार कांग्रेस के 423 प्रत्याशी मैदान में हैं। 2014 की मोदी हवा के दौरान भाजपा ने 428 प्रत्याशी खड़े किए थे जबकि कांग्रेस के 464 प्रत्याशी थे। तब बहुजन समाज पार्टी ने 503 उम्मीदवार खड़े किए थे। 2009 में भी बहुजन समाज पार्टी के 500 उम्मीदवार थे, पर इस बार उसके केवल 139 प्रत्याशी ही मैदान में हैं।

भाजपा के सबसे अधिक प्रत्याशी होने का अर्थ यह है कि देश में इसकी कितनी प्रासंगिकता और इसका यह दावा भी कि यह विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है। यह लेख लिखते समय लोकसभा की आधी सीटों पर वोट पड़ चुके हैं। इन चुनावों और उनके नतीजों को समझने के दो तरीके है। बहुत से चुनाव सर्वेक्षण यह बताते है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे लोकप्रिय नेता हैं। वह प्रधानमंत्री बनने के प्रमुख दावेदार है। उनके समर्थन का कारण है कि वे फैसले लेने में मजबूत दिखते हैं और उनके खिलाफ कोई विकल्प नहीं है। पर इसके साथ ही कांग्रेस का उभार और क्षेत्रीय दलों की बढ़ती ताकत भी देखी जा सकती है।

कांग्रेस के फिर से उभरने और कुछ क्षेत्रीय दलों के साथ आने से भाजपा के लिए एक चुनौती है, खासतौर पर उस समय जब केंद्र में इनकी सरकार के खिलाफ वादे पूरे न कर पाने के पुख्ता आरोप हैं। कुछ स्थानों पर टिकट न मिल सकने के कारण भाजपा के लोगों के बागी तेवर भी दिख रहे हैं। कई स्थानों पर विपक्ष के प्रत्याशी ज़्यादा मजबूत हैं।

जहां तक मुद्दों की बात है तो ये राष्ट्रवाद बनाम रोज़ी रोटी पर टिके हैं। बेरोजग़ारी और किसानों की भुखमरी भी बड़े मुद्दे हैं।  भाजपा की ताकत मोदी की लोकप्रियता है। पर क्या यह आर्थिक समस्याओं पर भारी पड़ेगी।

437 प्रत्याशियों को खड़ा करना देश में भाजपा के विकास को दर्शाता है। 2014 का चुनाव देश के राजनैतिक जीवन का एक मोड़ साबित हुआ। कांग्रेस के बराबर भाजपा खड़ी हो गई। इन चुनावों ने कांग्रेस को 44 पर समेट दिया। कांग्रेस का यह सबसे बुरा प्रदर्शन था। 437 सीटों पर चुनाव लडऩा यह भी दिखाता है कि भाजपा बाकी दलों के साथ तालमेल करने में असफल रही है। तेलंगाना और आंध्रपदेश में पार्टी ने सभी 42सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। 2009 में भाजपा ने 433 सीटों पर चुनाव लड़ा जबकि कांग्रेस 440 पर अपना दावा कर रही थी। उस समय भाजपा को 116 और कांग्रेस को 206 सीटें मिली। 2014 में भाजपा ने 428 सीटें लड़ी और 282 में जीत दर्ज की।

अब एक नजऱ भाजपा और कांग्रेस के चुनाव घोषणापत्रों पर। भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र के मुख्य पृष्ठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की और अंतिम पृष्ठ पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय, और अटल  बिहारी वाजपेयी की तस्वीरें है। इसके साथ ‘सर्जीकल स्टाईक’’, ‘आतंकवाद के खिलाफ ज़ीरों टालरेंस’ जैसे शब्द भी दिखाई देते हैं। भाजपा का मुख्य निशाना राष्ट्रवाद और बालाकोट जैसे भावनात्मक मुद्दों पर है। पार्टी का चुनाव घोषणा पत्र ‘संकल्प पत्र’ के नाम से आया है। इसमें  देश की सुरक्षा को भी रखा गया है। पार्टी ने हिंदुत्व का कार्ड खेलते हुए एक बार फिर राममंदिर की बात की है। इसमें धारा-370 को हटाने का कोई जिक्र नहीं पर धारा 35(ए) को हटाने की बात ज़रूर कही गई है। साथ ही कृषि क्षेत्र में 25 लाख करोड़ के निवेश की बात भी है। महिलाओं को भी 33 फीसद आरक्षण देने का वादा भी घोषणापत्र में हैं

दूसरी और कांग्रेस ने ‘गऱीबी हटाओ’ जैसा नारा देते हुए देश को गऱीबी से मुक्त करने की बात कही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ‘न्यूनतम आय योजना’, गऱीबों के लिए एक न्यूनतम आय देने की बात करती है। इस योजना के तहत हर घर में कम से कम 12000 रुपए महीना की आय सुनिश्चित की जाएगी। सरकार उस कमी को पूरा करेगी जो 12,000 रुपए से कम होगी। मिसाल के तौर पर यदि किसी परिवार की आय 6000 रुपए बनती है तो सरकार उसे 6000 रुपए प्रतिमाह अपने पास से देगी। इसी प्रकार यदि कोई परिवार 10,000 रुपए प्रतिमाह कमाता है जो उसे सरकार 2,000 रुपए महीने के देगी। हालांकि आज़ादी के बाद देश ने तरक्की की है पर वह उम्मीदों से कम है। बेरोजग़ारी  बढ़ रही है और गऱीबी पर किसी का ध्यान नहीं है। कांग्रेस पार्टी भी वादे करके उन्हें पूरा न करने के लिए जानी जाती है। कई अर्थशास्त्री अभी समझ नहीं पाए हैं कि सरकार किस प्रकार देश के सबसे गऱीब 20 फीसद लोगों को 72,000 रुपए प्रति वर्ष दे पाएगी।