निजता में ताक-झाँक, मोहाली में छात्राओं के आपत्तिजनक रिश्तों व निजता की शर्मनाक वीडियोग्राफी

पंजाब के मोहाली में स्थित निजी चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के हॉस्टल की छात्राओं के आपत्तिजनक रिश्तों और निजता के वीडियो कथित रूप से इंटरनेट पर वायरल होने से पैदा हुए विवाद ने महिलाओं की निजता की सुरक्षा को लेकर तो सवाल उठा ही दिये हैं, डिजिटल ताक-झाँक के बढ़ते ख़तरे के प्रति नयी चिन्ता पैदा कर दी है। पूरे मामले पर बता रही हैं डॉ. संगीता लाहा :-

तंबर में पंजाब के मोहाली में स्थित चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों का बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन निश्चित ही चौंकाने वाला था। इस घटना की ख़बर ने कई टीवी चैनलों पर सुर्ख़िंयाँ बटोरीं, जिसमें विरोध-प्रदर्शन को कवर किया गया, जो यूनिवर्सिटी परिसर में गल्र्स हॉस्टल की छात्राओं के आपत्तिजनक वीडियो के ऑनलाइन लीक होने की अफ़वाहों के बाद शुरू हो गया था। निश्चित रूप से इसने हममें से कई लोगों को स्तब्ध कर दिया। इस घटना ने एमएमएस विवादों को फिर उभार दिया और आगे की पढ़ाई के लिए बड़े शहरों में छात्रावास में रहने वाली लड़कियों / महिलाओं की निजता और सुरक्षा पर गम्भीर क़िस्म का सवालिया निशान लगा दिया। इससे पहले दिल्ली पब्लिक स्कूल एमएमएस कांड ने यौन आनंद की संस्कृति की बदनामी से भरी एक पूरी नया ख़ुलासा कर दिया था।

ऐसी घटनाएँ अकसर ही होती हैं। मुडक़र देखें, तो 01 अप्रैल को मीडिया में एक ख़बर आयी कि मुम्बई पुलिस ने बॉलीवुड के जाने-माने कोरियोग्राफर के ख़िलाफ़ सन् 2020 में यौन उत्पीडऩ के मामले में चार्जशीट दायर की है। यह कोरियोग्राफर ब्लॉकबस्टर फ़िल्मों में अपने काम के लिए जाना जाता है। उस पर यौन उत्पीडऩ, पीछा करने और दृश्यरतिकता (छिपकर देखने) का आरोप लगाया गया था।

सन् 2015 में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के द्वारा गोवा के पॉप्युलर ब्रैंड फैब इंडिया स्टोर में एक हिडन (सीसीटीवी) कैमरा पकडऩे के मामले ने चोरी से डिजिटल रिकॉर्डिंग की तरफ़ ध्यान खींचा था। केंद्रीय मंत्री होने के नाते उनके मामले ने मीडिया का बहुत ध्यान आकर्षित किया। यह घटना उस मामले के कुछ दिन बाद हुई, जब एक महिला को दिल्ली के लाजपत नगर के लोकप्रिय शॉपिंग हब सेंट्रल मार्केट में वैन ह्यूसेन स्टोर के चेंजिंग रूम के दरवाज़े पर एक मोबाइल फोन बँधा हुआ मिला।

इसी तरह सन् 2003 में पुणे में चोरी से डिजिटल रिकॉर्डिंग के पहले मामलों में से एक सामने आया था, जब सहकार नगर में स्थित प्रतिष्ठान में एक चपरासी ने चेंजिंग रूम में एक वेब कैमरा स्थापित किया हुआ था। सन् 2005 में एक ज़मींदार को महिला किरायेदारों की चोरी से वीडियो बनाने के लिए गिरफ़्तार किया गया था। सन् 2007 में, कोलकाता के एक प्रसिद्ध डिपार्टमेंटल स्टोर के चेंजिंग रूम के दो एमएमएस क्लिप फैला दिये गये थे। एक में एक लडक़ी को कपड़े बदलते हुए दिखाया गया, जबकि दूसरे में एक जोड़े को सम्भोग (सेक्स) करते हुए दिखाया गया। इस घटना के एक साल बाद एक दुकान सहायक को कोलकाता में परिधान की एक दुकान में ट्रायल रूम के दरवाज़े के नीचे से महिलाओं का वीडियो बनाते हुए पाया गया। इस तरह के काम करने वाले लोग किसी व्यक्ति को शारीरिक रूप से नुक़सान नहीं पहुँचाते हैं; लेकिन अपने धत्कर्म से पीडि़त को दबाव और मानसिक आघात में पहुँचा देते हैं। इस तरह की चीज़ एक महिला को प्रताडि़त करती है और उसके निजता के अधिकार पर हमला करती है। ऐसी कई घटनाएँ हैं।

अल्फ्रेड हिचकॉक ने अपनी फ़िल्म ‘रियर विंडो’ में दृश्यरतिकता (वोयूरिज्म) विषय की ओर संकेत किया है और मनुष्यों की अपने मनोरंजन के लिए दूसरों को देखने की प्रवृत्ति को सामने लाया है। जेफ पेशे से एक सक्रिय दृश्यरतिक (वोयूर), एक फोटोग्राफर है, जो उसे स्वाभाविक रूप से लोगों को देखने के प्रति इच्छुक बनाता है। दृश्यरतिकता का मामला दो परिस्थितियों में उत्पन्न हो सकता है- एक, किसी व्यक्ति वास्तव में किसी को जासूसी करते हुए देखता है। दूसरा, उन्हें सन्देह है कि उनकी जासूसी की जा रही है।

आँकड़ों के अनुसार, बिना किसी पूर्व आपराधिक पृष्ठभूमि वाले क़रीब 42 फ़ीसदी कॉलेज छात्र उच्च तकनीक वाले गैजेट और मोबाइल डिवाइस के उपलब्धता के चलते दृश्यरतिक कृत्यों में लिप्त पाये गये। इसने भारत में दृश्यरतिकता को बढ़ावा दिया है। आज बाज़ार में उपलब्ध हर नया फोन कम-से-कम पाँच मेगापिक्सेल कैमरा और सुपरफास्ट इंटरनेट पहुँच वाला होता। क़रीब 80 फ़ीसदी युवाओं के पास इन बुनियादी सुविधाओं वाले स्मार्ट फोन हैं। इसके अलावा कई प्रकार के स्पाई-कैमरे जैसे पेन कैमरा और बटन कैमरा सस्ती कीमतों पर उपलब्ध हैं।

दृश्यरतिकता क्या है?

दृश्यरतिकता के मायने हैं, उन लोगों की जासूसी करना जो निजी गतिविधियों में लगे हुए हैं; जैसे कपड़े बदलना, स्नान करना, या कोई अन्य कार्य, जो एक निजी प्रकृति का है। एक व्यक्ति ख़ुद देखने से लेकर कैमरे या दूरबीन का उपयोग करके दृश्यरतिकता के कार्य में संलग्न हो सकता है। दूसरे शब्दों में जब पीडि़त इस बात से अनजान हो कि उसके निजी कृत्य को देखा जा रहा है या किसी ने उसे रिकॉर्ड कर लिया गया है।

क्या कहता है क़ानून?
आपराधिक क़ानून संशोधन अधिनियम-2013 में भारतीय दण्ड संहिता में धारा-354(सी) को शामिल किया गया है, जो दृश्यरतिकता को अपराध की श्रेणी में रखता है। सोशल मीडिया के माध्यम से किसी महिला को अश्लील सामग्री (फोटो, चित्र, फ़िल्म, सन्देश) भेजना आईपीसी के तहत यौन उत्पीडऩ माना गया है। किसी महिला को उसकी सहमति के बिना अश्लील या स्पष्ट यौन सामग्री दिखाना या भेजना आईपीसी की धारा-354(ए) के तहत यौन उत्पीडऩ का एक रूप है। इस अपराध के लिए सज़ा तीन साल से लेकर ज़ुर्माना या दोनों हो सकते हैं। लेकिन लगभग सभी मामलों में दृश्यरतिक अपनी रुचि के विषय के साथ सीधे नहीं मिलता है, जो अक्सर इस तरह से कुछ होने के प्रति अनजान होता है। इससे घटना की शिकायत किये जाने की सम्भावना कम हो जाती है। इसलिए दृश्यरतिकता बेफ़िक्र रहता है। स्थिति का फ़ायदा उठाकर वह पीडि़त को अपनी माँग पूरी करने के लिए मजबूर करता है।

दृश्यरतिकता की अवधारणा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2000 के साथ शुरू हुई। धारा-66(ई), धारा-67, धारा-67(ए) और धारा-79 जैसे प्रावधानों को शामिल करने के साथ अधिनियम में अश्लीलता और एक स्पष्ट यौन कार्य के प्रसारण, रिकॉर्डिंग जैसी सभी गतिविधियों का निषेध शामिल है। सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम-2008 द्वारा आईटी अधिनियम-2000 में अलग धारा को संयुक्त राज्य अमेरिका के एक संघीय क़ानून-2004 के वीडियो दृश्यरतिकता निवारण अधिनियम की धारा-180(1) के प्रभाव से पेश किया गया है। इसने भारत में दृश्यरतिकता के ख़िलाफ़ क़ानूनों को मज़बूत किया है।
आईटी अधिनियम-2008 की धारा-66(ई) मानव शरीर को वीडियो तकनीक द्वारा या किसी भी अनुचित और अश्लील घुसपैठ से बचाने के अधिकार को मान्यता देती है। साथ ही वीडियो दृश्यता के अपराध से व्यक्तिगत गोपनीयता की पर्याप्त रूप से रक्षा करती है, जो गुप्त रूप से वीडियो टेपिंग या अनजान व्यक्तियों की तस्वीरें खींचकर व्यक्तिगत गोपनीयता और गरिमा को नष्ट करती है। आईटी अधिनियम की धारा-67(ए) में कहा गया है कि यदि ऑनलाइन प्रकाशित होने वाली सामग्री यौन रूप से स्पष्ट है, तो दोषी को पाँच साल की क़ैद हो सकती है और 10 लाख रुपये तक का ज़ुर्माना भरना पड़ सकता है। पुलिस का कहना है कि पीडि़त के पास सुबूत हों या न हों, सिर्फ़ शिकायत दर्ज की जानी ही काफ़ी है।

आसान नहीं दृश्यरतिकता को रोकना
इस अपराध का मुक़ाबला करना कोई आसान काम नहीं है, और यह केवल दण्डात्मक उपायों के साथ क़ानून पारित करने से रातोंरात नहीं हो सकता है। सरकार की तरफ़ से रेस्तरां, होटल, कपड़ों की दुकानों, मॉल और अन्य स्थानों, जो जनता के लिए खुले हैं; की समय-समय पर जाँच करने के लिए एजेंसी की स्थापना की जानी चाहिए। निजता के उल्लंघन के लिए ऐसे स्थानों की नियमित रूप से जाँच की जानी चाहिए। यदि ऐसी सुरक्षा सुनिश्चित करने में ये दोषपूर्ण पाये जाते हैं, तो उन पर बड़ा ज़ुर्माना और अन्य दण्ड लगाया जाना चाहिए। यह स्टोर कीपर या प्रबंधकों को अपने स्टोर में गोपनीयता सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी उपाय करने के लिए मजबूर करेगा।

एमएमएस काण्ड से सांसत में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी

छात्राओं के निजी वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने की रिपोर्ट सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी परिसर में भारी विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया। पुलिस अब तक वीडियो शूट करने वाली लडक़ी के अलावा हिमाचल प्रदेश से दो लडक़ों को गिरफ़्तार कर चुकी है। बता रहे हैं राजेंद्र खत्री :-

हाल ही में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (सीयू), मोहाली में एमएमएस कांड सामने आया। यूनिवर्सिटी की लड़कियों के छात्रावास के बाथरूम में नहाते हुए कथित वीडियो को एक छात्रा ने गुप्त रूप से शूट किया, जिसे बाद में उसके प्रेमी ने सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। इस घटना से जबरदस्त आक्रोश फैल गया।
विभिन्न अफ़वाहों ने आग में घी डालने का काम किया। इस अशोभनीय घटना से पूरे देश स्तब्ध रह गया और हर जगह आक्रोश फैल गया। मोहाली स्थित चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में छात्रों द्वारा आधी रात को बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन किया गया, जब यूनिवर्सिटी में 60 छात्रावास लड़कियों के अश्लील वीडियो लीक होने की अफ़वाह के बाद अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत विफल हो गयी थी।

यूनिवर्सिटी में अचानक हुए विरोध के बीच मामले की सूचना पुलिस को दी गयी। बाद में तीन लोगों- चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की एक छात्रा और हिमाचल प्रदेश के चार लोगों को इस घटना के सिलसिले में आईपीसी की धारा-354(सी) और आईटी अधिनियम के तहत गिरफ़्तार किया गया। गिरफ़्तार किये गये लोगों में लडक़ी, सनी मेहता, लडक़ी का प्रेमी संजीव सिंह, जिसने वीडियो बनाया था। दूसरे का नाम रंकज वर्मा था। मोहाली पुलिस ने इन्हें न्यायालय से सात दिन की रिमांड पर लिया है।