नासा जाएगी घर सँभालने वाली छात्रा

काजू बेचकर घर चलाने वाली जयलक्ष्मी सरकारी स्कूल में पढ़ाई करती है। जयलक्ष्मी ने एक महीने में अंग्रेजी सीखकर, कड़ी मेहनत करके नासा जाने का मौका जीता है। 11वीं में पढऩे वाली यह छात्रा वैज्ञानिक बनना चाहती है।

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काजू बेचकर घर चलाने वाली 11वीं की छात्रा के जयलक्ष्मी ने ऑनलाइन परीक्षा पास करके अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी यानी नासा जाने का अपना सपना पूरा कर लिया है। नासा का दौरा करने और अंतरिक्ष यात्रियों मिलने और वार्ता करने का मौका मिलेगा। विजेताओं को डिज्नी वल्र्ड जैसी जगहों पर भी ले जाया जाएगा। हालाँकि तंगहाली की ज़िन्दगी गुज़ार रहीं जयलक्ष्मी के लिए पैसे जुटाना कठिन काम था; पर उनके हौसले बुलंद थे। इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया और फिर क्या था, ऐसे ज़रूरतमंदों के लिए देश-दुनिया में मददगारों की न कमी है और न रहेगी। जयलक्ष्मी को मई, 2020 में नासा जाना है और उनको 27 दिसंबर तक 1.69 लाख रुपये जुटाने थे। जो बच्ची खुद काम करके घर का खर्च चला लेती हो, उसे इतनी बड़ी रकम जुटाना मुश्किल  काम तो था ही, पर उसने हि मत नहीं हारी और वह इसमें भी 100 फीसदी कामयाब रही।

इतना ही नहीं, अब विज्ञान की छात्रा जयलक्ष्मी को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में भी जाने का मौका मिलेगा। यह खुशखबरी उसे तब मिली, जब इसरो के पूर्व वैज्ञानिक व पद्मश्री से सम्मानित एम. अन्नादुरई ने इसरो का दौरा कराने का वादा किया। तमिलनाडु के पुदुकोट्टई के अदानाकोट्टई में सरकारी स्कूल की कक्षा 11 में विज्ञान की छात्रा जयलक्ष्मी को नासा जाने की ऑनलाइन परीक्षा की जानकारी मिलने की भी एक कहानी है। दरअसल, जयलक्ष्मी एक कैरम मैच का अभ्यास कर रही थीं, तभी बोर्ड पर समाचार पत्र की लगायी गयी कङ्क्षटग की खबर में धान्य थासनेम की स्टोरी पढ़ी। थासनेम ने गत वर्ष नासा जाने का मौका जीता था। इसी से प्रेरित होकर जयलक्ष्मी ने तत्काल इस ऑनलाइन परीक्षा का पंजीकरण कराया। उसने दिन-रात एक करके महज़एक महीने में अंग्रेजी सीखी और फिर परीक्षा में सबसे बढिय़ा परफॉर्मेंस देकर नासा जाने का मौका जीता।

कौन हैं जयलक्ष्मी?

जयलक्ष्मी के पिता परिवार से अलग रहते हैं और कभी-कभार ही पैसा भेजते हैं। ऐसे में जयलक्ष्मी ही अपनी मानसिक रूप से विकलांग माँ और छोटे भाई की देखभाल करती है।

इसी के चलते जयलक्ष्मी स्वयं काजू बेचने के अलावा 8वीं व 9वीं के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर घर चलाती है।

जयलक्ष्मी एक होनहार छात्रा है, जिसने नेशनल मीन्स कम-मेरिट स्कॉलरशिप जैसी कई छात्रवृत्तियाँ अपने नाम की हैं। शिक्षकों और साथी छात्रों ने पासपोर्ट के लिए रकम जमा की। पासपोर्ट अधिकारी ने भी 500 रुपये की मदद की।

डीएम के आग्रह पर ओएनजीसी के कर्मचारियों ने 65 हज़ार रुपये का चंदा जमा किया। सोशल मीडिया से की गयी अपील पर भी लोगों की मदद से ज़रूरी पैसा जुटाने में भी सफल रहीं।

जयलक्ष्मी का घर पिछले साल तमिलनाडु में आये गाजा चक्रवात का शिकार हो गया था और तबसे उसके घर में बिजली नहीं है।

इतना ही नहीं वह अपने परिवार की इकलौती कमाने वाली सदस्य है। वह काजू बेचने के अलावा कक्षा आठ और नौ के बच्चों को पढ़ाकर अपनी पढ़ाई और घर का खर्च पूरा करती हैं। साथ ही अपनी माँ और मानसिक रूप से दिव्यांग छोटे भाई का इलाज भी कराती हैं।