दो सौ टन सोना पहुंचा क्या स्विट्जरलैंड?

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कांग्रेस पार्टी ने अभी हाल एक रिपोर्ट ट्वीट की थी। इसमें बताया गया था कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से 2014 में दो सौ टन सोना गोपनीय तरीके से स्विट्जरलैंड पहुंचा। सवाल उठा कि ‘मोदी सरकार ने इतना सोना क्यों भेजा? इस खबर से जो विवाद शुरू हुए वे आज भी जारी हैं।

दक्षिण दिल्ली संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से एक उम्मीदवार ने ट्वीट किया था कि सत्ता में आने के बाद ही मोदी सरकार ने बड़े ही गोपनीय तरीके से दो सौ टन सोना स्विट्जरलैंड क्यों भेजा। इस पूरे मामले की छानबीन की खोजखबर पत्रकार और राजनीतिक नवनीत चतुर्वेदी ने। उन्होंने आरटीआई  से मिली जानकारी के आधार पर और पिछले साल आरबीआई के स्वर्ण संरक्षण और सेंट्रल बैंक की सालाना रिपोर्ट के आधार पर स्टोरी बनाई। उनकी स्टोरी पर खासा हंगामा हुआ।

मोदी सरकार ने दो सौ टन सोना भारत से बाहर भेजा। कहा जाता है कि भारत में यह खबर कुछ खास अखबारों में छपी। उसके बाद सोशल मीडिया और मेसेजिंग प्लेटफार्म पर चर्चा है।

कांग्रेस के पार्टी मुखपत्र सरीखे नेशनल हेराल्ड में दो मई को एक खबर ऑनलाइन जारी हुई थी कि क्या मोदी सरकार ने दो सौ टन सोना रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गोदामों से निकलवा कर 2014 में स्विटजरलैंड भेजा था। फिर यह खबर ‘दैनिक दोपहर’ में छपी। इसमें बताया गया कि मोदी सरकार जो ईमानदारी और पारदर्शिता में भरोसा रखती है। उसने गोपनीय तरीके से  268 टन सोना देश के बाहर भेज दिया। इस खबर का स्त्रोत सूचना अधिकार से मिला। यह भी बताया गया कि इससे मोदी सरकार की मुश्किलों में इजाफा हो सकता है।

इस रपट में यह जानकारी है। यह आरटीआई एक खोजी पत्रकार नवनीत चतुर्वेदी ने दायर की थी। उससे यह जानकारी मिली कि जुलाई 2014 में सरकार ने 268 टन सोना भेजा । दावा किया गया कि यह सोना आरबीआई में जून 2011 से था। लेकिन 2015 में यह जानकारी मिली कि आरबीआई की वैलेंस शीट से 268 टन सोना गायब है। मोदी सरकार ने यह भेद गोपनीय रखा। फेसबुक प्रोफाइल से जानकारी मिलती है कि चतुर्वेदी इंडिपेंडेट इन्वेस्टिगेटिव नर्जलिस्ट हैं। उनके प्रोफाइल में यह जानकारी भी है कि वे दक्षिण दिल्ली से लोकसभा का चुनाव भी लडऩे को हंै।

खैर, सोने की यह खबर फिर इंदौर समाचार में छपी । इसका शाीर्षक था,”दो सौ टन आरबीआई का सोना चोरी छिपे विदेश भेजा गया।’ फिर सोशल मीडिया में पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी के पेज पर एक खबर छपी,’एक देशभक्त वे थे जिन्होंने (हैदराबादके निजाम मीर उस्मान अली खान)  पांच हजार किलो सोना देश को बचाने के लिए दान किया, वहीं एक देशभक्त ये हैं (पीएम नरेंद्र मोदी) जिन्होंने देश का 280 टन सोना गिरवी रखा।

अब सवाल यह है कि दावे में सच्चाई क्या है? सालाना एएलटी न्यूज ने सेंट्रल बैंक के 2011-12, 2012-13 और 2013-14 की सालाना रपट छानी फिर आरबीआई के 2014-15 से 2017-18 की सालाना रपट देखी। इन रपट से पता चला कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का सोने का स्टाक एक सा है बल्कि 2017-18 में तो कुछ बढ़ोतरी भी हुई है।

आप अब 2013-14, यूपीए-दो शासनकाल के अंतिम साल को देखें। आरबीआई की सालाना रपट 2013-14 में कहा गया है कि कुल सोना जो सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में है वह 557.75 टन है। इसमें से 292.26 मीट्रिक टन एक एसेट बतौर ईशू डिपार्टमेंट का है और बाकी 265.49 मीट्रिक टन बैंकिग मकहमे के दूसरे एसेट का हिस्सा है।

यहां यह ध्यान रखना चाहिए कि ईशू डिपार्टमेंट में जो  सोना है वह सोना वह है जो आरबीआई देश के ही अंदर रखती है। जिसके आधार पर करंसी नोट जारी होते हैं। जबकि बैंकिग डिपार्टमेंट में जो सोना है वह बाहर रहता है।

साल 2017-18 की सालाना  रपट में बताया गया है कि रिजर्व बैंक के पास 566.23 मीट्रिक टन  सोना है। इसमें 292.30 मीट्रिक टन बतौर बैंकिंग उस नोट के आधार बतौर है जो 30 जून 2018 में जारी हुए। जो नोट जारी किए गए उन पर सोने की कीमत में 7.70 फीसद की बढ़ोतरी 690.30 बिलियन की 30 जून 2018 को 743.49 बिलियन हुई क्योंकि अमेरिकी डालर की तुलना में रुपए की कीमत घट गई।

 दो सौ टन सोना तो बाहर गया ही नहीं

अब 2013-14 और 2017-18 की दो रपटों की तुलना की जाए जो साफ बताती है कि जो सोना था उसमें कतई कोई कमी नहीं आई है बल्कि 8.48 टन की बढ़ोतरी ही हुई है। यानी 557.75 टन जो 2013-14 से बढ़कर यह 566.23 टन 2017-18 में हो गई। बैंकिग डिपार्टमेंट में जो सोना था वह जस का तस रहा। यह 265.49 टन 2013-14 में था जो बढ़ कर 273.93 2017-18 में हो गया। दूसरे शब्दों में 200 टन सोने की गुपचुप यात्रा भी नहीं हुई।

यहां देखना यह भी ज़रूरी होगा कि बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट (बीआईएस) को जो सोना भेजा जाना था वह 2014 के पहले ही भेजा जा चुका था। ‘हिंदू’ में 28 फरवरी 2012 को एक रपट है जिसमें बताया गया है कि आरबीआई में 557.75 टन सोना 30 सितंबर 2011 तक था। इसमें से 265.49 टन बाहरी डिपाजिट/सेफ कस्टडी में है जो बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फार इंटरनेशनल सेटलमेंट में है। यह मुद्दा 2012 में उठाया गया था। बांबे हाई कोर्ट पीआईएल के जरिए जब आरबीआई ने 2675.49 टन सोना देश के बाहर भेजना तय किया था।

आरबीआई ने इन खबरों को गलत बताते हुए कहा कि 2014 में या बाद में सोना देश के बाहर भेजा नहीं गया। फिर दुनिया भर में सेंट्रल बैंक अपने सोने को दूसरे देशों के सेंट्रल बैंकों में जमा करते हैं जिससे वे सुरक्षित रहे।

यह दावा कि मोदी सरकार ने गुपचुप तौर पर दो सौ टन सोना आरबीआई के सोना कोष से बाहर भेजा वह गलत है और शायद सेंट्रल बैंक की बैलेंस शीट की गलत रीडिंग की गई।