देख लो साकेत नगरी है यही स्वर्ग से मिलने गगन में जा रही | Tehelka Hindi

उत्तर प्रदेश, राज्यवार A- A+

देख लो साकेत नगरी है यही स्वर्ग से मिलने गगन में जा रही

तहलका ब्यूरो 2017-11-15 , Issue 21 Volume 9

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मिथक को अयोध्या में साकार किया मुख्यमंत्री ने। कहते हैं अयोध्या के साधु-संतों की नाराजगी के बाद भी उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री ने सरयू नदी के तट पर राम, जानकी, लक्ष्मण के साथ भव्य छोटी दीपावली मनाई। राम का अयोध्या में आगमन दीपावली पर ही माना जाता है और कहते हैं राम ने इसी दिन राजकाज संभाला था।

त्रेतायुग में कितनी भव्यता से दीपों की रोशनी होती थी इसका कोई उल्लेख तो नहीं मिलता लेकिन कलयुग में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने त्रेतायुग के अनुरूप भव्य दीपोत्सव किया। घाट किनारे एक लाख 71 हज़ार दीपों से पूरा किनारा जगमगा उठा। सरयू के जल के किनारे के मंदिरों, घरों पर लगी रंग-बिरंगी रोशनी की झालरों की रोशनी की छाया जगमगा उठी।

कुछ लोगों का कहना है कि रामायण में उल्लेख है कि अयोध्या की सरयू नदी में ही पुरषोत्तम राम ने जलसमाधि ली थी। उस घटना का शोक सदियों से परंपरा में बदल गया। अयोध्यावासियों ने दीपावली पर सरयू नदी के तट पर दिया जलाना श्री राम के वियोग में बंद कर दिया था। सदी दर सदी अयोध्या में आक्रमणकारी आते रहे। वे मनमानी करते रहे लेकिन सदियों से सरयू नदी को दीपदान न करने की पंरपरा कायम रही।

सनातनी परंपराओं के विरोध में बने गोरख नाथ धाम के प्रमुख योगी आदित्यनाथ ने इस दीपावली को राम की अयोध्या वापसी और राम राज्य की स्थापना का अवसर मानते हुए घाट किनारे व्यापक रंगबिरंगी रोशनियों की झालरें और लख-लख दीपों की रोशनी से सरयू का किनारा जगमग कर दिया।

श्री राम, जानकी और लक्ष्मण के रूप मेें कलाकारों को मिथकीय पुष्पक विमान के जरिए अयोध्या के रामकथा पार्क में उतारा गया। वहां से वे मंच तक पहुंचे जहां योगी आदित्यनाथ ने उन्हेेंं उनका मस्तकाभिषेक किया। इस मौके पर एक दूसरे हैलिकॉप्टर से फूलों की वर्षा भी की जाती रही। दीपावली के मौके पर सरयू नदी के घाट भव्य दीप मालाओं से प्रकाशित थे। नदी के जल में और दूर पुल के खंभों तक रोशनी छिटक रही थी। पूरे प्रदेश के सक्रिय अफसरशाह और मंत्री मौके पर दर्शनार्थी बने। जो खुद की मौजूदगी के लिए साथ खड़ भी रहे थे। अयोध्या के पूर्व नरेश और उनका परिवार भी इस मौके पर नदी तट पर हो रहे भव्य समारोह में सजा बैठा था। इन सब का पूरे आयोजन की भव्यता बनाए रखने में योगदान था। एक तरह से रामराज्य के कर्ता-धर्ता सरयू नदी किनारे विराजमान थे।

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(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 9 Issue 21, Dated 15 November 2017)

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