दिल्ली विश्वविद्यालय के चार वर्षीय पाठ्यक्रम विवाद

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नए पाठ्यक्रम को लेकर मुख्य आपत्तियां क्या हैं? 
डीयू के इस फैसले से शिक्षकों के समूह और विद्यार्थियों के एक बड़े तबके में नराजगी है. विरोधियों की प्रमुख आपत्ति फाउंडेशन कोर्सों को लेकर है. नए प्रावधान के तहत गणितीय क्षमता, विज्ञान तथा मानविकी समेत दर्जन भर ऐसे पाठ्यक्रम हैं जिन्हें विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले हर विद्यार्थी को अनिवार्य रूप से पढ़ना होगा. दृष्टिहीन छात्रों को इससे सबसे अधिक आपत्ति थी. इन छात्रों को आठवीं या दसवीं के बाद से ही गणित और विज्ञान जैसे विषयों को पढ़ने से छूट दी जाती है. इसकी वजह से दृष्टिहीन छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी. इसके अलावा अधिकांश अभिभावक अपने ऊपर बढ़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर भी नाखुश हैं. लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्री पल्लम राजू इस व्यवस्था के पक्ष में हैं.

दृष्टिहीन छात्रों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है?
दृष्टिहीन छात्रों की ओर से दायर की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने लिखित सुझाव मांगा है. इसके अलावा शीर्ष कोर्ट ने उन्हें विश्वविद्यालय की समिति के समक्ष अपनी शिकायतें दर्ज करवाने की छूट भी दे दी है. इस सबके बीच केंद्र सरकार ने यह कहकर इस विवाद से पल्ला झाड़ लिया कि वह बीच में नहीं आएगी क्योंकि डीयू एक स्वायत्त संस्थान है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश से दृष्टिहीन छात्रों को राहत जरूर मिली है.
-प्रदीप सती

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