दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाने में क्यों है हिचक

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दिल्ली में अफसरशाही और जनता के प्रतिनिधि उन्मत्त हैं। यह उन्माद और एकजुटता तब न जाने क्यों नहीं दिखाई दी जब राजेंद्र कुमार गिरफ्तार किए गए और दूसरे अफसर खामोश रहे। यह एकजुटता थोड़ा और पहले हुई उस घटना पर भी नहीं दिखी जब दिल्ली में ही एक आईएएस और उसके परिवार को खुदकुशी करनी पड़ी। सभी जानते हैं आईएएस लॉबी का शगल सरकार बनाने और सरकार गिराने में खुद को चाणक्य की भूमिका में रखने का रहा है। खुद प्रधानमंत्री भी अक्सर इस लॉबी की तारीफ करते नहीं अघाते हैं क्योंकि वे दुनियादारी जानते समझते हैं।

दिल्ली के अफसरशाहों में मुख्य सचिव के साथ दिख रही एकजुटता कितनी टिकाऊ होगी वह तो समय बताएगा। लेकिन केंद्र सरकार के वरिष्ठ गृह राज्य मंत्री से ज़रूर उनकी तत्काल बातचीत हुई। भारतीय जनता पार्टी इस विवाद को संवैधानिक, कानून और व्यवस्था का संकट बता रही है। लेकिन चाहते हुए भी वह दिल्ली राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने से हिचक रही है। पंजाब नेशनल बैंक, रोटोमैक पेन और इंडियन ओवरसीज बैंक में घोटाले की खबरों को थोड़ा दबाने के लिए दिल्ली में आप सरकार और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर एक दबाव राज्य की अफसरशाही के जरिए ज़रूर छेडा़ गया लेकिन अपने खेल में ही भाजपा फंस गई सी लगती है।

दिल्ली में रहने वाले किसी भी साधारण आदमी की तरह दिल्ली पुलिस (जो काम तो दिल्ली में करती है लेकिन होती हैकेंद्र सरकार के अधीन) ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर की तलाशी ली। वहां लगे कैमरों को खंगाला। आरोप भी लगाया कि कैमरों के समय को पीछे कर दिया गया। मिले सबूतों को फारेंसिंक टीम ने अपने कब्जे में ले लिया। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा,’ एक निजी कंपनी की तरह अरविंद केजरीवाल शासन चला रहे हैं। वे आधी रात को मुख्य सचिव को बैठक में बुलाते हैं। वह भी अपने प्रचार के लिए और फिर जो कुछ हुआ वह शर्मनाक रहा।Ó उन्होंने (केजरीवाल, ने अपने अपरिपक्व नेतृत्व का प्रदर्शन) कियाÓ बताते हैं केंद्रीय भाजपा के प्रभारी श्याम जाजू।