जीतने के लिए जीत की आदत जरूरी, भारत शूट आउट में हारा

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नाजुक अवसरां पर गलतियां करने, अंतिम क्षणों में गोल खाने और फाइनल मैच का दवाब न झेल पाने की कमज़ोरी एक बार फिर सामने आई। सुल्तान अजनाल शाह हाकी प्रतियोगिता के फाइनल में भारत की युवा टीम दक्षिण कोरिया के साथ खेली और शूट आउट में हार गई। भारत के लिए यह स्थिति नई नहीं है। चाहे 2000 के सिडनी ओलंपिक खेल हों या इस बार के एशियाई खेल भारत हमेशा चूक करता रहा है। टीम के कई कोच बदले गए। नई तकनीकों पर काम हुआ। टीम में मज़बूती भी आई पर फाइनल में हारना या नाजुक अवसरों पर चूक जाना जैसी कमज़ोरियां अभी तक बनी हुई हैं। हालांकि इस बार भारत ने पोलैंड के खिलाफ एक लबें समय के बाद जीत दर्ज की है और साथ ही कनाडा को भी अच्छे अंतर से हराया है पर भारतीय टीम के प्रदर्शन में एक निरंतरता की कमी दशकों से देखी जा रही है। हाकी टीम को इस बात का भी फर्क नहीं पड़ता कि वह विदेश की धरती पर खेल रही हैं या अपने दर्शकों के सामने। भारतीय प्रदर्शन कभी बहुत अच्छा तो कभी बहुत ही खराब होता रहा है।

अभी भारत को 2020 के टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना है। 2008 में पहली बार भारतीय टीम ओलंपिक में नहीं खेल पाई थी। इस हिसाब से टीम को मानसिक तौर पर शक्तिशाली बनाने की ज़रूरत है। टीम में प्रतिभा की कोई कमी नहीं लेकिन जीत की आदत से टीम महरुम लगती है।

सुल्तान अजनाल शाह टूर्नामेंट इपोह (मलेशिया) में खेला गया। इसमें मेजबान मेलशिया सहित भारत, जापान, कोरिया, कनाडा और पौलेंड की टीम ने हिस्सा लिया। टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला दक्षिण कोरिया और भारत के बीच हुआ। दोनों टीमें फुल टाइम तक 1-1 की बराबर पर थी। फाइनल मुकाबले में कोरिया ने भारत को शूटआउट में 4-2 से हरा कर नौ साल बाद खिताब अपने नाम किया। कोरिया 2010 में भारत के साथ सयुक्त विजेता बना था। दूसरी तरफ इस हार के साथ भारत का छठी बार खिताब जीतने का सपना टूट गया। भारतीय टीम पांच बार 1985, 1991, 1995, 2009 और 2010 में चैम्पियन बनी थी। कोरिया ने 23 साल बाद शूटआउट में भारत को हराया है। अंतिम बार 1996 में अटलांटा ओलिंपिक में कोरिया ने 3-3 की बराबरी के बाद शूटआउट में मुकाबला 5-3 से जीता था।

भारत अपराजित रहते हुए टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचा था। फाइनल मुकाबले में भारत ने अच्छी शुरूआत की। मुकाबले का पहला गोल भारत के सिमरनजीत सिंह ने 9वें मिनट में किया और भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई। 47वें मिनट में पेनल्टी स्ट्रोक पर कोरिया के जोंगहाून जांग ने गोल कर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। मैच के आखिरी 13 मिनट में कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। इसके बाद मैच का निर्णय शूटआउट से हुआ। शूटआउट में भारत के सुमित वाल्मिकी और सुमित कुमार गोल नहीं कर सके। बीरेंदर लाकड़ा और वरूण कुमार ने गोल किए। वहीं कोरिया की ओर से चिओनजी, जुंगजुन ली, मांजेई जुंग ओर नायंग ली ने एक -एक गोल किया। सिर्फ किहून किम गेंद को गोलपोस्ट में नहीं डाल सके। इस टूर्नामेंट में भारत की यह पहली हार है। लीग के पांच मुकाबले में टीम ने 4 मुकाबले जीते और एक मैच ड्रा रहा। मेजबान मलेशिया ने कनाडा को 4-2 से हराकर ब्रॉन्ज पदक जीता।

इस टूर्नामेंट में भारत का पहला मैच एशियन गेम्स के विजेता जापान के साथ हुआ। इस लीग मैच में भारत ने जापान को 2-0 से शिकस्त दी। इसके बाद दूसरे लीग के दूसरे मैच में भारत का मुकाबला कोरिया के साथ हुआ। भारत ने अंतिम मिनट में गोल गंवाया और उसे 1-1 के ड्रा पर ही संतोष करना पड़ा।

अपने तीसरे मुकाबले में भारत ने मेजबान मलेशिया को 4-2 से हरा दिया। भारत के लिए सुमित ने 17वें मिनट में सुमित ने 17 वें मिनट में, सुमित कुमार ने 27वें, वरूण ने 36 वें, और मंदीप ने 58 वें मिनट में एक-एक गोल किया। जबकि मलेशिया के लिा राजी ने 21वें और फिरहान ने 57 वें मिनट में एक-एक गोल किया। भारत ने इस टूर्नामेंट में मलेशिया को आठवीं बार हराया है।

 भारत का चैथा मैच कनाडा के साथ हुआ। भारतीय टीम ने 7-3 से कनाडा को पराजित किया। भारतीय टीम के लिए वरूण कुमार ने 12वें, मनदीप सिंह ने 20वें, 27वें और 29वें, अमित रोहिदास ने 39 वें, विवेक प्रसाद ने 55 वें मिनट में और नीलकांता शर्मा ने 58 वें मिनट में गोल किए। भारतीय खिलाडिय़ों के दमदार खेल के सामने कनाडा की टीम पस्त नजऱ आई। भारतीय टीम ने टूर्नामेंट के अंतिम लीग मैच में पौलेंड को 10-0 से हराया। टीम इंडिया ने 83 साल के बाद किसी यूरोपियन देश के खिलाफ 10 गोल किए। भारतीय टीम ने पोलैंड के खिलाफ आक्रामक शुरूआत की। पहले ही मिनट में विवेक प्रसाद ने गोल कर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। सुमित कुमार ने 7वें मिनट में दूसरा गोल किया। पहले क्वार्टर तक स्कोर 2-0 था। वरूण ने पेनल्टी पर 18वें और 25वें मिनट मेंए सुरेंद्र ने 19वें और सिमरनजीत सिंह ने 29 वें मिनट में गोल किया। नीलकांता शर्मा ने 36वें मिनट और मनदीप सिंह ने 50वें और 51 वें मिनट में लगातार दो गोल करके टीम को 9-0 की बढ़त दिलाई। 55वें मिनट में अमित रोहिदास ने गोल कर स्कोर 10-0 कर दिया। पोलैंड की टीम पूरे मैच में कोई खास प्रदर्शन नहीं कर सकी।

अगर पूरे टूर्नामेंट में भारत के प्रदर्शन को देखा जाए तो भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार था। अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों को ध्यान में रखते हुए टीम को शूटआउट पर और मेहनत करनी होगी।