जीएसटी की मार: त्योहार में कमज़ोर रहा व्यापार | Tehelka Hindi

ख़ास खबर A- A+

जीएसटी की मार: त्योहार में कमज़ोर रहा व्यापार

2017-10-15 , Issue 19 Volume 9

चिकित्सा, खेल और शिक्षा भी प्रभावित

वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) की चपेट में आज व्यापारी ही नहीं है, बल्कि उन लोगों पर खासी मार पड़ी है जो अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा,चिकित्सा और खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाना चाहते हैं। पिछले साल नवम्बर में जब सरकार ने एक हजार और पांच सौ के नोट चलन से बाहर किए थे तब भी व्यापक असर पड़ा था। पर इस साल जुलाई में जीएसटी कानून को बिना तैयारी और परीक्षण के लागू कर सबको हैरानी और परेशानी में डाल दिया गया। जीएसटी

के लागू होने से सबसे ज्यादा अगर फायदा हो रहा है तो वह सीए और वकीलों को ,लेकिन आज भी ज़्यादात्तर ऐसे वकील और सीए है जिन्हें इस कानून की पूरी जानकारी नहीं है।

इन्हीं तमाम मुद्दों पर तहलका की विशेष पड़ताल-

राजीव दुबे

GSTसबसे पहले बात करते है जीएसटी की चपेट में आने से उन व्यापारियों की जिनका धंधा ही चौपट नहीं हुआ बल्कि उनको उन तमाम उलझनों में डाल दिया है जिनके वे आदि नहीं थे। ऐसे में कम पढ़े – लिखे व्यापारी सरकार को कोस रहे हैं कि सरकार देश में विकास के नाम पर व्यापार को बंद करने में लगी है। क्योंकि अभी तक सीधा-साधा व्यापार करने वाले छोटे दुकानदार टैक्स अदा करने के नाम पर गर्व महसूस करते थे, कि वे भी उन लोगो में शमिल हो गये हैं जो टैक्स दे रहे हैं उनको वकील या सीए के पास साल में एक ही बार जाना पड़ता था रिटर्न दाखिल के लिए। पर अब ऐसा नहीं है अब उनको एक महीने और तीन महीने में वकील और सीए के पास रिटर्न जमा के नाम पर जाना पड़ रहा है और महंगी फीस देनी पड़ रही है।

ऐसे में छोटे व्यापारियों का कहना है कि वह व्यापार करें कि टैक्स अदा करने लिए चक्कर लगायें।व्यापारियों ने बताया कि इन्हीं कारणों से व्यापार 30 से 70 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है। त्यौहारी सीजन नवरात्रि से लेकर दीपावली तक बाजारों में रौनक रहती थी और दुकानदारी अच्छी होती थी। इस साल बाजारों में सूनापन और सन्नाटा पसरा है। इसकी मुख्य वजह 28प्रतिशत टैक्स का इजाफा का होना।

सरोजनी नगर मार्किट एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक रंधावा का कहना है कि सरोजनी नगर मार्किट दिल्ली का सबसे सस्ता बाजार है यहां पर स्कूली बच्चों से लेकर छात्रों और शादी विवाह तक के कपड़े खरीदने के लिए दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों से लोग आते हैं पर अब ऐसा नहीं है। जो छोटा व्यापारी है वह उपभोक्ताओं को जीएसटी का बिल देता है पर टैक्स में इजाफा होने की वजह से ग्राहक खरीददारी करने से बचने लगे हैं। ऐसी स्थिति में व्यापारी अपनी ही कमाई को कम करके ग्राहक को सामान बेचने को मजबूर है। उन्होंने बताया कि जब ग्राहक को किसी भी सामान का रेट बताया जाता है तो वह वही रेट देता नहीं है बल्कि मोलभाव करके कम करवाता है ऐसे में जीएसटी वाले बिल को कैसे वह स्वीकार कर सकता है। इन्ही कारणों से इस बाजार में 40 से 50 प्रतिशत की कमी ग्राहकों की आयी है। ऐसा ही हाल दिल्ली के चांदनी चौक के थोक व रिटेल व्यापार का है।

Pages: 1 2 Single Page

(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 9 Issue 19, Dated 15 October 2017)

Comments are closed