जासूसी, किसान मुद्दे पर संसद में हंगामे के बीच मिनटों में विधेयक पास करा रही सरकार

पेगासस जासूसी और किसानों के मुद्दे के लेकर जारी हंगामे से संसद के मानसून सत्र का तीसरा हफ्ते भी धुलता नजर आ रहा है। इससे पहले दो हफ्ते तकरीबन बिना कामकाज के ही हंगामे की भेंट चढ़ चुके हैं। पेगासस मुद्दे को लेकर विपक्ष अपने कड़े तेवर बनाए हुए है जबकि सरर भी अपने रुख पर अड़ी है। खास बात यह है कि इसी बीच विपक्ष के विरोध की परवाह किए बिना सरकार मिनटों में फटाफट कई अहम विधेयक पारित करा ले रही है, जिससे जानकार हैरानी जता रहे हैं। लोगों का करोड़ों रुपया संसद की कार्यवाही में बर्बाद हो रहा है और सरकार महज इसे खानापूर्ति की तरह भरपाई करती नजर आ रही है।

संसद सत्र के सुचारू संचालन न होने से विधायी कार्यों का सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। दूसरे दलों की राय को अहमियत दिए बिना और बिना चर्चा व बहस के कई अहम विधेयक मिनटों में मोदी सरकार पास करा रही है। ऐसा लग रहा है मानो विधेयक पास कराने की महज औपचारिकता पूरी की जा रही है। जबकि संसद को एक मिनट चलाने में करीब ढाई लाख रुपये खर्च होते हैं और इस हिसाब से जनता के करोड़ों रुपये स्वाहा हो रहे हैं।

कानून बनाने की जगह संसद में किसी विधेयक पर कम चर्चा होने का मतलब है संसद में लोकतंत्र का नहीं होना। बहस में विपक्ष की राय न लिए जाने से महज औपचारिकता का एहसास होता है। विधेयक एक बार पारित हो गया और कानून की शक्ल में बदल गया तो इसमें बदलाव लाने में फिर लंबा वक्त लग जाता है।

मिनटों में पास हुए एक या दोनों सदनों से अहम विधेयक

फैक्टरिंग रेगुलेशन (अमेंडमेंट) विधेयक 2021-
26 जुलाई को लोकसभा से 13 मिनट में पारित, इसमें बिल पेश करने वाला समय भी शामिल
राज्यसभा में यह बिल 14 मिनट में पारित, केवल पांच सांसदों ने बहस में हिस्सा लिया
द नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी इंटर्नप्नोयरशिप एंड मैनेजमेंट बिल
26 जुलाई को लोकसभा से छह मिनट में पारित
द मरीन एड्स टू नेविगेशन बिल 2021
27 जुलाई को राज्यसभा से 40 मिनट में पारित
जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटक्शन ऑफ चिल्ड्रन) संशोधन बिल, 2021
28 जुलाई को विपक्ष के शोर-शराबे के बीच राज्यसभा से 18 मिनट में पारित