जामिया हिंसा पर कल ही कार्रवाई करेंगे : कुलपति अख्तर ने कहा

छात्रों ने उनसे कहा एफआईआर दर्ज करें

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दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर नजमा अख्तर ने कहा कि उनकी तरफ से जामिया हिंसा मामले में एफआईआर दर्ज की गयी थी, लेकिन वह अभी तक रिसीव नहीं हुई है। उन्होंने यह बात तब कही जब बड़ी संख्या में छात्रों ने सोमवार को अख्तर के कार्यालय का घेराव किया और दिसंबर में इसके परिसर के भीतर हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। अख्तर ने कहा कि कल से ही इस पर कार्रवाई होगी।
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता शशि थरूर भी रविवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का विरोध कर रहे छात्रों, महिलाओं और अन्य लोगों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया ही नहीं शहीनबाग स्थित प्रदर्शन स्थल पर भी गए थे। यह आंदोलन आज भी जारी रहा।
उधर सोमवार को जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने करीब दो घंटे प्रदर्शन किया जिसके बाद वीसी नजमा अख्तर बाहर आईं और उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के सारे सवालों के जवाब दिए। उन्होंने १५ दिसंबर को जामिया हिंसा पर कहा कि दिल्ली पुलिस बिना इजाजत कैंपस के अंदर घुसी। ”कल से दिल्ली पुलिस के खिलाफ एफआईआर की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी”।
प्रदर्शनकारी छात्रों को कुलपति ने बताया कि विवि प्रशासन की तरफ से जामिया हिंसा मामले में एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन वह अभी तक रिसीव नहीं हुई है। ”हम इससे आगे कुछ नहीं कर सकते क्योंकि हम सरकारी कर्मचारी हैं। इस मामले में हमने सरकार के सामने भी आपत्ति दर्ज कराई है। अगर जरूरत पड़ी तो हम कोर्ट भी जाएंगे”।
उधर रविवार देर शाम कांग्रेस नेता शशि थरूर नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का विरोध कर रहे छात्रों, महिलाओं और अन्य लोगों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया और शाहीन बाग स्थित प्रदर्शन स्थल पर गए। उनके साथ दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा और सीलमपुर के पूर्व विधायक मतीन अहमद भी थे।
थरूर ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम और नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ इस लड़ाई में पार्टी छात्रों के साथ खड़ी है। बाद में थरूर ने एक ट्वीट में कहा – ”जामिया मिलिया के प्यारे दोस्तो, मजबूती के साथ खड़े रहो। हम तुम्हारे साथ हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस।” एक और ट्वीट में थरूर ने कहा – ”’शाहीन बाग की महिलाओं के साहस, जुनून और दृढ़ संकल्प को देखना शानदार रहा। इसमें बहुत बुजुर्ग दादियां भी शामिल हैं। वे शुरुआत से ही भूख हड़ताल पर हैं। उन सभी को उनकी पूरी प्रशंसा के साथ संबोधित किया।”