जम्मू कश्मीर पर सरकार का फैसला संविधान का उल्लंघन है : राहुल

0
1104

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जम्मू-कश्मीर से धारा ३७० को हटाने पर केंद्र सरकार के फैसले पर चुप्पी तोड़ते हुए मंगलवार को कहा कि सरकार का यह फैसला संविधान का उल्लंघन है। राहुल ने कहा इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
उन्होंने एक ट्वीट में कहा की इस फैसले के कई खतरे हैं जिन्हें जल्दबाजी में सरकार ने नजरअंदाज कर दिया है।
कांग्रेस नेता ने ट्वीट में लिखा – ”राष्ट्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए जम्मू-कश्मीर के एकतरफा टुकड़े नहीं किए जा सकते। इसके लिए संविधान को ताक पर रख कर चुने हुए प्रतिनिधियों को जेल में नहीं डाला जा सकता। देश लोगों से बनता है न कि जमीन और जमीन से। कार्यकारी शक्तियों का दुरुपयोग हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।” याद रहे राज्यसभा और लोक सभा में कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल के विरोध में वोट किया है।
उधर लोक सभा में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि लोकतांत्रिक पार्टी के नेताओं को बंद कर आपने गैर लोकतांत्रिक लोगों के लिए रास्ते खोल दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की सुरक्षा को आज खतरा है। थरूर ने कहा कि यह फैसला अतिवाद को बढ़ावा देगा और कश्मीर में युवाओं को आतंकवाद की ओर ढकेलना का काम करेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस मुद्दे को लेकर यूएन में जा रहा है, क्या यह हमारे लिए शर्म की बात नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार हमें एंटी नेशनल कहती रहती है लेकिन हमें इनसे राष्ट्रवाद का पाठ सीखने की जरूरत नहीं है, हम ही एक ऐसी पार्टी हैं जो देश की आजादी के लिए लड़े थे, देश के मूल्यों की रक्षा के लिए लड़े थे। शशि थरूर ने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि गृह मंत्री एक सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल के कश्मीर में लेकर जाएं और वहां की जमीनी हकीकत देखें। थरूर ने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है इस पर किसी को कोई मतभेद नहीं है। लेकिन इस बिल से लोकतांत्रिक व्यवस्था, वैश्विक परिवेश और हमारी विश्वसनीयता को आघात पहुंचा है।
उनसे पहले कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कि बगैर संविधान सभा की इजाजत के धारा ३७० को खारिज नहीं किया जा सकता जो आज मौजूद नहीं है। तिवारी ने कहा कि जम्मू कश्मीर विधानसभा-विधान परिषद का मतलब यह संसद नहीं है। जम्मू कश्मीर का अलग संविधान है जो १९५७ को लागू हुआ था क्या अब प्रदेश के बंटवारे के बाद उस संविधान को खारिज करने का बिल भी सरकार लेकर आएगी।
उन्होंने कहा कि संघीय ढांचे के ऊपर इससे बड़ा आघात नहीं हो सकता, साथ ही आज अगर जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है तो उसके पीछे पंडित नेहरू ही वजह थे। गृह मंत्री ने हश्तक्षेप में पूछा ने कहा कि कांग्रेस बताए कि वह धारा ३७० के पक्ष में हैं या इसके खिलाफ हैं। तिवारी ने कहा कि बगैर जम्मू कश्मीर संविधान सभा की मंजूरी के धारा ३७० को खारिज नहीं किया जा सकता।
तिवारी ने कहा कि पंडित नेहरू ने कदम उठाकर उसे भारत का अभिन्न अंग बनाया।  उस विलय के साथ कुछ वादे में किए गए थे, जिसमें दिल्ली का करार भी शामिल है।  साल १९५२ में भारत के संविधान में धारा ३७० को शामिल किया गया। उसी बीच जम्मू कश्मीर में संविधान सभा का गठन हुआ और वहां के लिए अलग संविधान की संरचना की। इसके बाद तय हुआ कि वहां का हर फैसला संविधान सभा, विधानसभा की राय लेने के बाद ही किया जाएगा। तिवारी ने कहा कि आज इस सदन में संवैधानिक त्रासदी हो रही है। अनुच्छेद ३ की स्प्रिट संसद को खुद राय लेने का अधिकार नहीं देती न ही अनुच्छेद ३ किसी सूबे को तोड़ने की बात कहती है।
उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के गठन के वक्त राय ली गई थी और यूपीए ने कोई असंवैधानिक काम नहीं किया साथ ही अनुच्छेद ३ के मुताबिक ही काम किया था। लेकिन आज जम्मू कश्मीर के संदर्भ में संविधान का पालन नहीं हुआ। बगैर विधानसभा के विचार के कोई भी राज्य का गठन आजतक नहीं किया गया था।

राहुल गांधी का ट्वीट –
National integration isn’t furthered by unilaterally tearing apart J&K, imprisoning elected representatives and violating our Constitution. This nation is made by its people, not plots of land. This abuse of executive power has grave implications for our national security.

— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 6, 2019