छात्रों के लिए हरियाणा का अनूठा अभियान आएगी समृद्धि विदेशी भाषा से

प्राथमिक स्कूलों के छात्रों को धाराप्रवाह अंगे्रज़ी भाषा पढऩे, लिखने और बोलने में मदद करने के लिए हरियाणा शिक्षा विभाग ने एक अनूठा अभियान शुरू किया है - ''मुझे अंग्रेज़ी से डर नहीं लगता’’ साराह की एक रिर्पोट

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हरियाणा सरकार ने छात्रों को कक्षा पहली से अंग्रेज़ी में पढऩे, लिखने और बोलने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से एक नई और अनूठी पहल की है। ”मुझे अंगे्रज़ी से डर नहीं लगता’’ कार्यक्रम के तहत छात्रों को हर दिन एक वाक्य सिखाने के लिए एक जूनियर बेसिक ट्रेनिंग अध्यापक और ब्लाक में एक ‘ब्लाक रिसोर्स पर्सन’ को प्रशिक्षित और नियुक्त किया गया है। पूरे अभ्यास का उद्देश्य प्रत्येक वर्ग में 10 महीने के लिए हर महीने न्यूनतम 20 वाक्यों को सिखाना है।

इस तरह की पहल करने वाला हरियाणा पहला राज्य बन गया है। अंग्रेज़ी भाषा अकादमिक और पेशेवर करियर में महत्वपूर्ण बन गई है, लेकिन अंग्रेज़ी में अच्छे संचार कौशल को विकसित करना चुनौतीपूर्ण है। सबसे बड़ी चुनौती अंग्रेज़ी सीखने को आनन्ददायक बनाना है। जो खुशी के लिए पढ़ते हैं वे स्वायत्त भाषा सीखने वाले हैं, जो स्वंय को पढऩे में तल्लीन कर लेते हैं और उसे दिल से सीखते हैं उनके लिए भाषा सीखना एक सुखद अनुभव बन जाता है। इस प्रकार की पढ़ाई बहुत शक्तिशाली होती है क्योंकि आनन्द घटक किसी भी चिंता, दुख और समझने के डर के बिना भाषा सीखने का कारण बन जाता है।

प्राथमिक शिक्षा निदेशक राजनारायण कौशिक ने बताया कि सरकारी प्राथमिक स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे ”मुझे अंगे्रज़ी से डर नहीं लगता’’ कार्यक्रम का लाभ उठा सकेंगे। जिसका पहला उद्देश्य कक्षा पहली से अंग्रेज़ी भाषा को शुरू करना है। यह बच्चों को अंग्रेज़ी पढऩे, लिखने और बोलने में मदद करने के लिए अध्यापकों को सक्षम बनाता है।

पारंभिक शिक्षा निदेशक राजनारायण कौशिक के अनुसार यह कार्यक्रम 180 प्राथमिक स्कूलों में शुरू किया गया है और मौजूदा अकादमिक सत्र में इसे 238 और स्कूलों में शुरू किया जाएगा।

1000 वाक्यों वाली एनसीईआरटी की एक किताब तैयार की गई है। इसमें ग्रेड एक से ग्रेड पांच तक प्रत्येक ग्रेड के लिए 200 वाक्य हैं। एक प्राथमिक अध्यापक और ब्लाक रिसोर्स पर्सन को छात्रों को एक वाक्य हर दिन सीखने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इस तरह छात्र अगले स्तर तक कम से कम 1000 वाक्यों को पढऩे और लिखने में सक्षम बन जाएंगे।

इसके अलावा राज्य भर में चयनित मॉडल संस्कृति स्कूलों में डिजिटल भाषा सीखने और छात्रों को सुनने, बोलने के कौशल में सुधार करने के लिए छह भाषा प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। ऐसी कई प्रयोगशालाएं बाद में अन्य स्कूलों में भी स्थापित की जाएंगी। एनजीओ ‘हुमाना पीपल टू पीपल इंडिया’ के साथ साझेदारी में 180 प्राथमिक स्कूलों में इसे शुरू किया गया है जिसने कक्षा पहली और दूसरी के बच्चों को बैग फ्री बना दिया है उन्हें लार्कस प्रदान किए गए हैं। धीरे-धीरे राज्य के अन्य स्कूलों में भी भाषा प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। राज्य के चयनित 180 सरकारी प्राथमिक स्कूलों में प्रथम और दूसरी श्रेणी के लिए बैग मुक्त अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल शुरू किए गए हैं। इसके अलावा सकेण्डरी शिक्षा विभाग ने 310 चयनित स्कूलों में कक्षा नौवी से विज्ञान और गणित की पुस्तकें अंग्रेज़ी में शुरू की हैं।

पिछले साल उत्तराखंड सरकार ने भी इस तरह की मुहिम शुरू की थी। राज्य के 18000 स्कूलों में विभिन्न चरणों में आदेश देने के माध्यम को हिंदी से अंग्रेजी में बदला गया था।

”मुझे अंगे्रज़ी से डर नहीं लगता’’ हरियाणा सरकार का यह नारा और उद्देश्य एक बार समस्या की पहचान के साथ -साथ इसे सुलझाने का एक संभावित तरीका भी बताता है। शिक्षा की वार्षिक रिपोर्ट जो कि ग्रामीण इलाकों में बच्चों के सीखने का अनुमान लगाती है, उससे पता चला है कि ग्रामीण इलाकों में अंग्रेज़ी में सरल वाक्यों को पढऩे की छात्रों की क्षमता अच्छे स्तर की नहीं है। 2016 में कक्षा तीन के केवल 32 फीसद छात्र भाषा के सरल वाक्य पढ़ सकते थे। आमतौर पर सह सभी प्राथमिक कक्षाओं के मानदंड हैं। इस तरह की रुकावटों को दूर करने की तत्काल आवश्यकता है।

इस पहल का उद्देश्य बच्चों को दुनिया और नौकरी बाजार का सामना करने के अनुकुल बनाना है। डिजिटल सीखने की सुविधा और छात्रों के सुनने और बोलने के कौशल में सुधार के लिए राज्य में छह प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।