चुनावों में जीत के इरादे से कांग्रेस में मंथन

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कांग्रेस में बड़ा मंथन चल रहा है। सत्ता संभाल रही भाजपा दावे पर दावे, नित नए घोटाले और पुराने घोटालों को और बढऩे से नहीं रोक पा रही है। उसे अभी आस है देश में संकीर्ण मुद्दों की आंच में रोटियां सेंकने की। उधर पुरानी कांग्रेस की 25 लोगों की कांग्रेस कार्यसमिति को युवा पार्टी के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भंग कर दिया है। पुराने पदाधिकारियों में हताशा और नयों में उत्साह के सुर जगने लगे हैं।

हाल-फि लहाल कांग्रेस कार्य समिति जो पार्टी संबंधी फैसले लेने की सबसे बड़ी कमेटी रही है वह अब स्टीयरिंग कमेटी में बदल गई है। 17-18 फ रवरी को हुई प्लेनरी बैठक में राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष चुने गए। ऐसी इस दौरान स्टीयरिंग कमेटी (तैयारी बैठक) तमाम प्रस्तावों की तैयारी कर लेगी जिन पर चर्चा होनी है और सत्रों के दौरान उन पर सहमति बनाई जानी है।

इसी बैठक के दौरान 25 सदस्यों की कार्यसमिति में आने के लिए नेताओं में होड़ सी है। हालांकि पार्टी के नियमों के तहत कमेटी इन में से 10 को चुनाव के जरिए लेती है। कांग्रेस अध्यक्ष का यह अधिकार है कि वे चाहें तो पूरी टीम ही चुन लें। पार्टी ऑफि स में और कांस्टीयूशन क्लब तक में चर्चा यही है कि कार्यसमिति में कौन आएगा और कौन नहीं। राहुल गांधी जब पार्टी अध्यक्ष नहीं बने थे तो उनकी मां सोनिया गांधी के प्रति रहे वफ ादार लोगों को ‘पुराने चौकीदारÓ कहा जाता था। अब पार्टी के नए स्वरूप में उन्हें डर सता रहा है कि कहीं वे हाशिए पर न पहुंच जाएं। हालांकि नए अध्यक्ष ने यह वादा किया था कि उनकी टीम में न केवल युवा बल्कि अनुभवी लोग भी होंगे। यह भी माना जा रहा हे कि बाहुबल, धनबल के महाबली भी इस कार्यसमिति में आने के लिए लालयित हैं।

यह सब जान-देख कर ही राहुल गांधी को यह लग गया कि ऐसी गंभीर दशा में उन्हें कैसे उस पार्टी को संभालना है जिसके हाथ से सत्ता की कुर्सी सरक गई। कहने वाले यह भी कहते हैं कि वे उन लोगों से घिरे हैं। जिन्हें ज़मीनी हालात का अंदाजा नहीं है।

उधर कांग्रेस के दिग्गज अनुभवी नेताओं का मानना है कि वे ऐसी टीम बनाने में कामयाब हो जाएंगे जो जनता में भरोसा इस कदर पैदा कर पाएंगे कि मतदाता मशीनों के जरिए होने वाली धांधली भी कामयाब न हो। हिंसा के जरिए लोगों को यंत्रणा देकर मतदान न करने देने का खेल न खेला जा सके। जनता को पहले से पता हो कि वह वोट जिसे दे रही है वह दलबदलू, बाहुबली और धनबली तो नहीं है। नई टीम को पता होगा कि उसकी क्या रणनीति होगी बूथ मैनेजमेंट, घर-घर प्रचार और मतदाताओं की सुरक्षा के संबंध में। जिन लोगों को उनके स्वास्थ्य के चलते बाहर जाने की राह दिखने लगी है उनमें अंबिका सोनी, जनार्दन द्विवेदी, मोहन प्रकाश और सीपी जोशी हैं। पुरानी टीम में अहमद पटेल, गुलाम नबी आज़ाद, मल्लिकार्जुन खडग़े, एके एंटनी आदि हैं। कांग्रेस पार्टी में पिछले साल चुनाव की जिम्मेदारी संभालने वाले मुल्ला पल्ली रामचंद्रन के नई कमेटी में आने की संभावना है।

कांग्रेस पार्टी पर ध्यान देने वाले विशेषज्ञों के अनुसार सचिन पायलट, सुष्मिता देब, मिलिंद देवड़ा, देवेंद्र हुडा और ज्योतिरादित्य सिंधिया इस नई कमेटी में हो सकते हैं। तमाम विवादों के बावजूद शशि थरूर पार्टी के नए प्रोफेशनल ग्रुप के प्रभारी हैं और अभी उनकी नई किताब ‘मैं हिंदू क्यों हूंÓ खासी चर्चा में भी रही है। कांग्रेस में शुरू से ही बु़िद्धजीवियों, साहित्य और कला के प्रति एक संवेदनशीलता रही है। पार्टी के नए आलाकमान ने उसे अपनाए रहने का यदि वाकई इरादा बनाया है तो वह वाकई बड़ी बात है।

कुछ लोग यह भी मानते हैं कि शायद अमरिंदर सिंह, पृथ्वीराज चौहान और कुमारी शैलजा

फि र कांग्रेस कमेटी में हों। पार्टी की रणनीति तैयार करने में और उसमें वक्त-ज़रूरत अनुसार बदलाव करने में सक्षम भी रहे हैं।

राहुल गांधी ने सचिन पायलट को राजस्थान में मनोनीत किया। वहां अभी उप-चुनाव हुए। इन में उन्होंने कांग्रेस को फि र जीवित किर दिया । इस कार्य में उन्होंने दिग्गज नेता अशोक गहलोत से राय-मशविरा भी किया और कामयाब रहे। हालांकि हरियाणा कांग्रेस को फि र से खड़ा नहीं कर पाए और कार्यकर्ता भी उनसे विमुख रहे। उन्हें शायद कोई नया काम दिया जाए।

अपनी नजऱ और रणनीति को खासा पैना बनाते जा रहे हैं राहुल गांधी। उन्होंने पिछले कई महीनों में कई खासी जिम्मेदारियां कइयों को सौंपी और उनकी योग्यता भी जांची-परखी। उन्होंने विभिन्न राज्यों के दौरों के दौरान और पार्टी संगठन में लंबे अर्से से काम करते हुए पार्टी के उपयुक्त नई युवा पौद की पहचान भी की है।

कांग्रेस के अंदर नए से नए जुझारू तेवर के लोगों के लिए पार्टी में आने और आगे बढऩे के ढेरों मौके हैं। ऐसे युवा नेताओं की एक लंबी कतार है जिसे अपने चुने जाने की ताब है। युवा राहुल गांधी यह जानते-समझते हैं कि देश के युवाओं को वे ही प्रगति के पथ पर ले जा सकते हैं। देश को भ्रष्टाचार और संकीर्ण सेनाओं की कुरूपता से बचा सकते हैं और पूरे देश में सद्भाव और शांति को ला सकते हैं। चुनौतियां ढेरों हैं और संघर्ष भी जटिल है। राहुल और हर कांग्रेसी यह जान-समझ रहा है।