चलो मन (प्रियंका) गंगा – जमुना

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गंगा की लहरों पर पड़ती दूधिया रोशनी। बाकी दूर तब फैला अंधियारा। अचानक दिखाई देती हैं कई नावें। इन नावों से उभरती दूधिया रोशनी में चमकती है साड़ी पहनी एक युवती साथ में कुछ और भी महिलाएं दूसरी नावों में सफेद कपड़े पहने पहुंचे नेता। ‘आ गईं प्रियंका गांधी।’ आवाजें गूंजती हैं। गंगा किनारे बढ़ जाती है चहल-पहल। पटरों पर नावों से उतरते एसपीजी जवानों के बूटों की धमक सुनाई देती है। लाल साड़ी में नाव से उतरती हैं प्रियंका। फूलों की मालाओं के साथ होता है प्रिंयंका गांधी वाड्रा का स्वागत।

अर्से बाद एक युवा महिला नेता का चेहरा दमकता दिखता है भारतीय राजनीति में। देश की लगभग आधी आबादी का एक चेहरा। देश की इस आबादी की तकरीबन दो करोड़ महिलाएं आज भी मतदाता सूची से बाहर हैं क्योंकि वे दलित और मुसलमान है। हमेशा की तरह भारत के निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियां अपडेट करने के आदेश दिए होंगे। राज्यों की प्रशासनिक मशीनरी ने खानापूर्ति भी की होगी। लेकिन इतनी बड़ी तादाद में महिलाएं मतदाता सूचियों से बाहर ही रह गईं।

प्रियंका कहती हैं देश में जो सरकार है वह महिला विरोध है जन विरोधी है, मजदूर  विरोधी है। इस सरकार पर सोचना ही होगा। यह सरकार राज करने के लिए जाति, धर्म, संप्रदाय में भेद करती है। छोटे दस्तकार, बुनकर छोटे काम-धंधे करके परिवार चलाने वाले इस सरकार के कायदे कानूनों से आज बेहद परेशान हैं। एकजुट होकर बेहतर भविष्य के लिए आपको अपने मत का इस्तेमाल करना है। यह आपका हथियार है। इसका सही इस्तेमाल कीजिए। इससे किसी को कोई चोट नहीं लगती। तकलीफ नहीं होती। लेकिन इससे आप अपना भविष्य चुनते हैं। जिसे आप वाकई चाहते हैं।

प्रयागराज (इलाहाबाद) से मिर्जापुर (चुनार) पहुंची प्रियंका गांधी। सुबह की सक्रियता अच्छी लगी। पार्टी के लोगों से मिलना। विंध्यवासिनी मंदिर में मत्था टेका। दरगाह पर चादर चढाई। कई जगह छोटी-छोटी नुक्कड़ सभाएं कीं। लोगों के साथ सेल्फी ली। महिलाओं और बुजुर्ग महिलाओं से मिलना-बतियाना। भीड़ में भी उन्हें देख कर उत्साह। गोपीगंज मेें पांच सौ मीटर तक वे पैदल चलीं।

एक नुक्कड़ सभा में कहा, ‘भाजपा 70 साल की रट लगानी बंद करे। छह दशक में कांग्रेस ने क्या किया यह पूरा देश जानता है। उन्होंने सभा में जनसमूह से कहा, ‘भाजपा के नेताओं से उनके बड़े-बड़े वादों की रिपोर्ट मांगो। इनकी सरकार ने बुनकरों, हथकरघा मज़दूरों, कारीगरों, छोटे कारखानों में काम करने वालों, नौजवानों को बुरी तरह छला। छोटे उद्योगों का काम धंधे को पूरी तरह से बंद कर दिया है। इनसे पूछिए, ऐसा इन्होंने क्यों किया?’

प्रियंका की गंगा यात्रा के दौरान नदी के दोनों पाटों पर पड़ रहे गांवों-कस्बों से नदी किनारे उतरे जन समूह की खबरों से जिला-मंडल प्रशासकों और उत्तर प्रदेश सरकार की बौखलाहट काफी बढ़ गई थी। तीन दिन की यात्रा के दौरान पुलिस प्रशासन ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ही नहीं, बड़ी संख्या में युवाओं को अपने संदेह के दायरे में रखा। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियों की गईं। एहतियात के तौर पर ऐसे व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए जिससे प्रयागराज में वाराणसी तक के इलाके कहीं कांग्रेसमय न दिखे लेकिन कांग्रेस प्रभाव से बनारस को मुक्त करने के लिए वाराणसी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अचानक सभा व्यवस्था (24 मार्च)की गई। लखनऊ में और आगरा मेंभाजपा के वरिष्ठतम नेताओं की सभाएं हुईं।

पूर्वी उत्तरप्रदेश में कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने गंगा यात्रा के दौरान देश के नागरिकों की आम जिंदगी में बढ़ी मुश्किलों की जानकारी ली। उन्होंने गंगा के दोनों किनारों पर बसे गांवों और कस्बों मे जि़ंदगी के कठिन रूपों को भी जाना समझा। साफ-सफाई, श्मशान, मंदिर, मल्लाह, केवट, बुनकर रंगरेज मिट्टी के खिलौने बनाने वाले कुम्हार, धोबी, ठेले चलाने वालो छोटे दर्जी, जूते-चप्पल ठीक करने वालों से भी उनकी कम ही सही मगर महत्वपूर्ण बातचीत हुई।

गंगा यात्रा कर रही प्रियंका को देखने-जानने गंगा नदी के दोनों पाटों पर जहां-जहां भी समूह दिखा। नेहरू-गांधी परिवार की इस युवा नेता ने उनके पास पहुंच कर जन-संवाद किया। इस बातचीत में समय लगा लेकिन जनसमूह निराश नहीं हुआ। युवा नेता ने बड़े ही इत्मिनान से अधेड़-बुजुर्ग महिलाओं की भी बातें सुनीं और युवाओं की रोज़गार न मिल पाने, शिक्षा ठीक से न होने और स्वास्थ्य के अच्छे दवाखानों के न होने की भी बातें सुनीं-समझीं।

एक जगह छोटी सभा में उन्होंने कहा, ‘चौकीदार तो अमीरों के होते हैं, गरीबों के नहीं।’ आज नई दिल्ली की केंद्र सरकार न केवल किसान, मजदूर, महिला विरोधी है बल्कि यह एक ऐसी नकारात्मक सरकार है, जिसे बदलने का वक्त अब करीब आ गया है। आज ज़रूरत है, ‘नई राजनीति’ की। इस ‘नई राजनीति’ के तहत इस सरकार को बदलने की आवाज़ काशी से उठनी चाहिए। देश में बदलाव के लिए अब काशी वासी ही आगे आएं। जनसमूह ने उनकी बात सुनी और तालिया बजाईं।

बनारस में चाय की और दूध की दूकानों पर गली-चौराहों पर जुटे लोग या तो  काशी विश्वनाथ से ललिता घाट तक जाने वाली गलियों-मकानों दुकानों के ध्वंस होने और विश्वनाथ कारिडोर बनाने से काशी की घटी प्रतिष्ठा की बात करते हैं। या फिर प्रियंका की गंगा यात्रा की। लोगों को लगता है कि कांगे्रेस ज़रूर कुछ कर दिखाएगी। जन समर्थन इसे मिलना चाहिए क्योंकि इसने आज़ादी और आज़ादी के बाद देश में विकास की एक तस्वीर तो गढ़ी थी जिसे अच्छा करने की बात के बहाने नष्ट कर दिया गया। अब की फिर कांगे्रस को एक बार क्यों नहीं।

घर-घर में युवा और अधेड़ महिलाओं में प्रियंका की वेशभूषा, बोलचाल, चलने का अंदाज पर बहस रही। सबने माना कि उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाके में अपना जनाधार खो चुकी कांगे्रस को फिर से मजबूत करने में प्रियंका मेहनत तो कर रही हैं। उनके साथ अब नए लोग जुड़ रहे हैं। गंगा यात्रा के जरिए उन्होंने उत्तरप्रदेश में इलाहाबाद और शैक्षणिक-सांस्कृतिक तौर पर मशहूर बनारस में अंग्रेजी राज के खिलाफ हुई आज़ादी की लड़ाई के सपूतों की विरासत की याद दिला दी। इस कारण वे पूर्वी उत्तरप्रदेश में लगभग छा गईं।

अपने दौरे के तीसरे दिन उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर मेें पूजा-अर्चना की। जब दोपहर सवा दो बजे वे मंदिर की ओर चलीं। प्राचीन गलियों में बने पुराने मकानों की बालकनियों और छतों से उनका फूलों की पंखुडिय़ों से उनका स्वागत किया गया। पूरी गली मे सिर्फ हर-हर महादेव का उद्घोष सुनाई देता रहा।

मंदिर में प्रियंका गांधी वाड्रा ने बाबा का षोडसोपचार पूजन और दुग्धाभिषेक किया। काशी के वयोवृद्ध मान्य पंडित चंद्रशेखर नारायण दातार ने सप्तयोगी अनुष्ठान किया पंडित दातार के अनुसार सबसे पहले सप्तयोगी अनुष्ठा करने का  आदेश स्वयं भगवान शिव ने दिया था जिसे सप्तऋृषियों ने किया था।

बाबा के दर्शन पूजन के बाद प्रियंका ने ‘विश्वनाथ कॉरिडोर’ बनाने के संकल्प को जाना समझा। इस संकल्प को पूरा करने के लिए काशी की उन तंग गलियों के मकानों-मंदिरों-दूकानों का ध्वंस कर दिया गया। इससे बहुत से लोग बेरोज़गार हो गए। कांग्रेस नेता व्यथित दिखीं।

यहां से वे पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के आवास को गई। जैसे ही वे उस गली में घुसीं उन पर गुलाब की पंखुडिय़ां बरसने लगीं। उत्साहित बच्चे और युवा खासे उत्साह में थे। सभी बाबा महादेव की जय-जयकार कर रहे थे। यहां से वे चौक घाट को बढ़ीं। अब उनकी यात्रा भव्य रोड़ शो में बदल गई थी। यहां वे शहीद विशाल पांडे के घर गई। शहीद की छोटी बहन को उन्होंने दुलारा। उन्होंने कहा, ‘पिता को खोने का दर्द मैं समझती हूं। मैं जब 19 साल की थी तो मेरे पिता (पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी) शहीद हुए थे। उन्होंने शहीद की बहन को पढ़ाई लिखाई में अच्छी मेहनत करने और पायलट बनने की सलाह दी। उससे कहा, ‘तैयारी करो। हम मदद करेंगे।’ फिर वे बहादुरपुर में शहीद अवधेशकुमार यादव (पुलवामा हमले में शहीद) के घर भी गईं। परिवार के लोगों को सांत्वना दी।

बनारस में पिपलासी कटरा के सरोजा पैलेस में कांग्रेस के कार्यकर्ता सम्मेलन में उनकी मौजूदगी में भाजपा के उत्तरप्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडे के छोटे भाई के परिवार में बहू अमृता पांडे ने कांग्रेस की सदस्यता की। इस पर उन्होंने चुटकी ली कि ‘आपके ससुरजी आपसे नाराज़ तो नहीं होंगे।’

इस सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘आज़ादी से पहले देश में अंग्रेजी सरकार की तानाशाही थी। तब गरीब लोगों (सुरलियों) को बहुत यातनाएं दी जाती थीं, मारा-पीटा जाता था। आज देश में वही हाल हैं। जनता की आवाज़ सुनने की बजाए उसे दबाया जा रहा है। सिर्फ इतना है कि वर्तमान तानाशाह भारतीय हैं।’

गंगा यात्रा के आखिरी दिन प्रियंका ने मिर्जापुर में चुनाव किले के गेस्ट हाउस में मीडिया से बातचीत की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि वे जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, जो लोग सत्ता में होते है उन्हें यह गलतफहमी होती है कि वे किसी को भी डरा सकते हैं। क्योंकि वे हर तरह से सक्षम हैं। इसलिए वे लोगों को बरगलाते हैं। कांगे्रस महासचिव ने कहा, प्रधानमंत्री को यह सोचना छोड़ देना चाहिए कि लोग बेवकूफ हैं। उन्हें यह पता होना चाहिए कि जनता सब जानती समझती है।

उत्तरप्रदेश का पूर्वी अंचल बतौर पूर्वांचल भी जाना जाता है। यहां सांस्कृतिक सामाजिक-शैक्षाणिक विकास तो है लेकिन ज़रूरी विकास कार्य किसी भी सरकार ने नहीं किए। इसलिए इस पूरे अंचल को पूर्वांचल के तौर पर अलग राज्य बनाने की मांग भी होती रही है। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका के पास होने से इलाके की जनता में उम्मीद बंधी हैं। उनकी गंगा यात्रा कई मायनों में खासी कामयाब रही। उन्होंने अपना दल (कृष्णा गुट) की पल्लवी पटेल को खास तरजीह दी। अपने साथ रखा इस गुट से कांग्रेस का तालमेल होने से परस्पर लाभ संभव है। इस पूरे इलाके के कांग्रेस को लेकर उत्साह बढ़ा है।

खुद मां होने के कारण युवा, अधेड़ और बूढ़ी महिलाओं में इंदिरा की पोती के प्रति जिज्ञासा बढ़ी है। युवाओं में बड़ी दीदी के प्रति स्नेह बढ़ा है और बनारस में अधेड़ हो रहे लोगों में उम्मीद की लहर बनी है। बनारस में तो यह भी शोर था कि प्रियंका यहीं से चुनाव भी लड़ें। लेकिन बड़े ही संभव तरीके से उन्होंने यही कहा कि पार्टी का हर फैसला वे मानेंगी।

प्रियंका गांधी वाड्रा की गंगा यात्रा पर राजनीतिक दल के विशेषज्ञों में बहस छिड़ी हुई है। गंगा और बाबा महादेव की नगरी बनारस की पुरानी गलियों में हुआ ध्वंस न केवल पूर्वांचल, बल्कि प्रदेश और देश के लोगों के लिए खासा बेचैनी भरा रहा है।