घर घर लाया दीपावली: मोदी | Tehelka Hindi

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घर घर लाया दीपावली: मोदी

तहलका ब्यूरो 2017-10-31 , Issue 20 Volume 9

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‘घर-घर मैं जल्दी लाया दीपावलीÓ। यह कहना था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का । उनके इस दावे पर खामोश है पूरा विपक्ष। वामपंथी अपने गुणा-भाग में लगे हैं । उन्हें फुर्सत नहीं है। कांग्रेस अपने टूटे -फूटे हथियारों को दुरुस्त करने में लगी है जिससे उसकी साख बची रहे। जनता दल (यू) के बागी बुजुर्ग नेता शरद यादव अपनी मजबूरियां जानते हैं।

जनता में अब उनका नाम पुराना हौसला नहीं जगा पाता। फिर भी वे हिम्मत जुटा रहे है। पत्रकारों से कह रहे हैं कि अगली लड़ाई अर्थव्यवस्था पर ही केंद्रित होगी।

बहरहाल प्रधानमंत्री के कहने पर वित्त मंत्री ने पहले की जीएसटी को कुछ हद तक सरल,सहज और बेहतर बनाने का कोशिश की है। छोटे और मझोले व्यवसायियों ने इसे पसंद किया है। सरकार की इस कोशिश से जनता का एक बड़ा हिस्सा अब देश की अर्थव्यवस्था का गहन अध्ययन करने में लगा है। इससे देश की सही तस्वीर जनमानस में बन सकेगी। मंदिर-मस्जिद धर्म के बहाने जनांदोलनों के गुबार का भी खुलासा होगा और वास्तविकता का एहसास देश की बेसिक ज़रूरतों के साथ होगा।

नोटबंदी के बाद देश में निराशा और बेरोजगारी भी बढ़ी और जीएसटी के चलते देश में मंहगाई बढ़ी। छोटी मजदूरी और कामकाज पर असर पड़ा। घर-घर में छोटी – छोटी बचत पर असर रहा। छोटे मझोले कल-कारखाने बंदी की कगार पर पहुंच गए। जन असंतोष पर विपक्ष ने आवाज़ दी। आखिर प्रधानमंत्री तक सुगबुगाहट पहुंची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने भी आगाह किया। प्रधानमंत्री ने अंधेरे में डूबे देश के चार करोड़ घरों में उजियारा लाने का भरोसा दिया। देश के वित्तमंत्री ने जीएसटी के तहत 90 वस्तुओं पर लगे टैक्स कुछ कम किए। देशवासियों में उम्मीद बंधी। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘घर-घर दिवाली लाया हूं। इस बार थोड़ा जल्दी।Ó

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि जब जीएसटी पर अमल शुरू हुआ था तो मैंने कहा था कि हम इसके नतीजों पर अगले तीन महीने नज़र रखेंगे। जिन इलाकों में बाधाएं थी। इसकी दरों को लेकर दुविधा थी। अन्य असुविधाएं थीं। उन सब को हमने जांचा-परखा। व्यापरियों को हो रही परेशानियों को जाना। हम कतई नहीं चाहते कि व्यापारी लालफीताशाही में उलझे। यह वाकई खुशी की बात है कि देश के हर हिस्से से बदलाव की गूंज सुनाई दे रही है।

सरकार द्वारा उठाए गए आर्थिक कदमों और विकास के एजेंडे पर हो रही आलोचना पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के लिए विकास हमेशा एक मुख्य एजंडा रहेगा। उन्होंने कहा हो सकता है इस पीढ़ी ने गरीबी झेली हो लेकिन हम विकास को उस ऊंचाई तक ले जाना चाहते हैं जिससे अगली पीढ़ी का साबका गरीबी से न पड़े। इससे भारत के लोगों को मौका मिलेगा।

जीएसटी और नोटबंदी के चलते पूरे देश में लघु और मध्यम उपक्रमों के मालिकों और मजदूरों में छाई निराशा को दूर करने के लिए जीएसटी में किए गए फेरबदल पर हो रहे स्वागत से प्रधानमंत्री गदगद थे। गुजरात के दो दिन के दौरे में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) की दरों और नियमों में खासा बदलाव किया है। गुजरात में इसी साल चुनाव भी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने कर को काफी हद तक सरल कर दिया है। वे कतई नहीं चाहते कि नुकसान व्यापार का हो।

प्रधानमंत्री ने जीएसटी कौंसिल के उठाए गए कदमों को ’दिवाली पर काफी पहले आया उपहारÓ बताया है और कहा है कि सरकार व्यवसाइयों को ’लाल फीताशाही, फाइल और अफसरशाही के शिकंजे में नहीं फंसने देना चाहती। उनका यह बयान निश्चय ही स्वागत योग्य है क्योंकि देश को सहज, सरल और आसानी से कर देने की प्रणाली की ज़रूरत है। जिसके न होने पर देश के लघु और मझोले उद्योग और दस्तकारों की उत्पाद क्षमता सीमित होती है। पूरे देश में एक जैसी प्रणाली हो जिसमें बार-बार रिटर्न की फाइलिंग न हो। इस ज़रूरत को जीएसटी कौंसिल भी अब मानती है। इसी के तहत अब डेढ़ करोड़ तक के टर्न ओवर पर हर महीने रिटर्न भरने की बजाए सिर्फ तिमाही पर रिटर्न भरना पर्याप्त होगा।

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(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 9 Issue 20, Dated 31 October 2017)

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