गहलोत ने आते ही पलटे पिछली सरकार के कई फैसले

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राजस्थान के इतिहास में ऐसी कोई मिसाल मुश्किल ही मिलेगी,जब ताजपोशी के साथ ही प्रदेश प्रमुख ने नया युग गढऩे की शुरूआत कर दी। भाजपा सरकार को परास्त कर सत्तारूढ़ हुई कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछली सरकार के चार बड़े फैसलों को एक ही पल में फूंक डाला। प्रतिस्पर्धी कूटनीति का सबसे बड़ा रोमांच था, नगरीय सभापति का सीधा चुनाव, निकाय चुनावों से साक्षरता में अनिवार्यता से मुक्ति, सरकारी दस्तावेजों से दीनदयाल उपाध्याय के चित्र का हटाना तथा पत्रकारिता विश्वविद्यालय शुरू करने के साथ वृद्धावस्था पेंशन में बढ़ोतरी। गहलोत सरकार ने चुनावी संकल्प पत्र की महत्ता स्थापित करने के लिए उसे नीतिगत दस्तावेज की शक्ल दे दी। गहलोत का सीधा संदेश था कि, ‘सरकार प्रदेश का चमकदार भविष्य गढऩे की ठान चुकी है। इस मौके पर गहलोत के नेतृत्व की पूर्व सरकार ने जिस तरह आम आदमी को संवेदनशील प्रशासन देने के लिए दो बेहतरीन कानून बनाए उनका स्मरण होना भी स्वाभाविक था। इनमें एक था-लोकसेवा प्रदान में गारंटी कानून-2011 और दूसरा था सुनवाई के अधिकार का अधिनियम 2012। गारंटेड सेवा प्रदाता के 2011 के कानून में राजस्व, पुलिस, पंचायत, नगर पालिका आदि आम आदमी से ज्यादा वास्ता रखने वाले विभिन्न विभागों की 108 सेवाएं उल्लेखित हैं,  जिन्हें समय पर उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित समयावधि का प्रावधान सुनिश्चित है।

इन कानूनों की वापसी भी इस बार सुनिश्चित है। बहरहाल इस चर्चा के मद्देनजर फसली कजऱ् माफी भी गहलोत सरकार का महत्वपूर्ण फैसला है। ताबड़तोड़ फैसलों ने जो असर दिखाया उसने भाजपा को जबरदस्त दबाव में ला दिया। नतीजा दिलचस्प रहा कि मोदी सरकार अब राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के लिए कोई बड़ा पैकेज लाकर उन्हें आकर्षित करने की नई संभावनाएं टटोलने में जुट गई है। हालांकि वरिष्ठ पत्रकार गुलाब कोठारी कहते हैं कि ‘कजऱ् माफी के बावजूद मूल सवाल अब भी मुंह बाए खड़ा है कि ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था कैसे सुधरेगी? और खेती-बाड़ी लाभ का सौदा कैसे बनेगी? बहरहाल नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के संयोजन में एक समिति का गठन कर दिया गया है। लेकिन जब इस मामले से जुड़े अफसरों का कहना है कि,’सरकार एक साथ कजऱ् माफी की स्थिति में नही है बड़ा सवाल तो पात्रता तय करने का है ? उधर गहलोत का कहना है कि,’जब तक केन्द्र सरकार की ओर से किसानों का कजऱ् माफ नहीं किया जाता, तब तक कांग्रेस सरकार दबाव बनाए रखने से पीछे नहीं हटेगी। अब जबकि मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए राहुल गांधी राजस्थान में बड़ी किसान रैली करने जा रहे हैं तो तय है कि गहलेात सरकार एक बड़े बदलाव का हिस्सा बनने जा रही है। विश्लेषक कहते हैं कि,’दूरंदेश गहलोत ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्षम हैं और उन्होंने एक ही पखवाड़े में इसे साबित भी कर दिया है।

विश्लेषकों की मानें तो एक काबिल और अनुभवी मुख्यमंत्री के रूप में गहलेात के नेतृत्व में नई सरकार की स्थिरता पर संदेह नहीं किया जा सकता। बेशक यह देखना दिलचस्प होगा कि,’राज्य की कां्रगेस सरकार ने जिस तरह चुनावी घोषणा पत्र के मुताबिक ‘राइट टू हैल्थÓ पर काम करना शुरू कर दिया है, उसने इस दिशा में प्रदेश को पहला सूबा बना दिया है। इसका मसौदा 22 राष्ट्रीय अंर्तराष्ट्रीय पार्टनर मिलकर तैयार करेंगे। इसे ‘एश्योर्ड डिलीवरी ऑफ क्वालिटी सर्विसेज का नाम दिया गया है।Ó सूत्रों के मुताबिक मसौदे का सबसे बड़ा लक्ष्य गारंटेड गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध कराना होगा यानी हर अस्पताल के बाहर एक सूची चस्पा होगी जिसमें वहां दी जाने वाली सुविधाओं का ब्यौरा होगा। इसमें अगर कुछ और ठोस बात हेागी कि,’अस्पताल की स्थापना के जो पैरामीटर तय होंगे, उसकी सरकार को गारंटी देनी हेागी। पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई निशुल्क जांच और दवा योजना और बाद में भाजपा सरकार के समय शुरू की गई भामाशाह बीमा योजना के बाद यह प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से बड़ा बदलाव होगी। चिकित्सा विभाग का दावा है कि, अभी ‘स्वास्थ्य के अधिकारÓ का सिस्टम भारत के अलावा दुनियां में कहीं भी नहीं है। उधर गहलोत सरकार के कद्दावर नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल का कहना है कि,’तीन महीने में पांच साल के विकास कार्यों की योजना तैयार कर ली जाएगी।

धारीवाल इस मुद्दे पर बेहद सकारात्मक नज़र आए कि,’पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के समय की अधूरी परियोजनाओं को बंद नहीं करेंगे बल्कि उन्हें पूरा किया जाएगा। जयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की बैठक लेते हुए धारीवाल का यह सवाल काफी अहम था कि, ‘प्राधिकरण पर जिस तरह दो हजार करोड़ का कजऱ् है, वो किस तरह चुकाया जाएगा? अधिकारियों के इस जवाब पर कि, ‘इतने बड़े कजऱ् का चुकाना तो भू-विक्रय से ही संभव है, इस पर धारीवाल बेहद तल्ख जवाब-तलबी में नजर आए कि,’फिलहाल प्राधिकरण की जो आरक्षित दरें हैं, उस पर क्या भूमि विक्रय किया जाना संभव है ? हालंाकि पहले तो अधिकारियों को जवाब देते नहीं बना, लेकिन आखिरकार कहना ही पड़ा कि, ‘ऐसा संभव नहीं है। आखिर धारीवाल का यह तर्क ही उनकी सूझ-बूझ को पुख्ता कर गया कि, ‘आरक्षित दरों की समीक्षा कर इन्हें बाजार दर पर तर्कसंगत बनाया जाए। अपने महकमें के काम काज को लेकर धारीवाल कितने सक्रिय हैं, यह उनके इस तंज से नुमाया हो जाता है कि, प्राधिकरण की करीब छह हजार किलोमीटर लंबी सड़कें हैं, लेकिन उनकी मरम्मत का पैसा प्राधिकरण के पास नहीं है, जबकि 15 सौ किलोमीटर सड़कें तो टूटी पड़ी है। बहरहाल मुख्यमंत्री गहलोत ने जिस तरह चुस्त टीम गढ़ी है, उन्हें काम करके दिखाना है। अन्यथा मंत्रियों को अखिल भारतीय कांग्रेस के महासचिव और राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे की चेतावनी याद कर लेनी चाहिए कि,’अगर बेहतर काम से सरकार की साख नहीं बना पाए तो उनका मंत्री पद टिकने वाला नहीं है।