गंगा किनारे जाने के लिए टूटेंगी बनारस की गलियां | Tehelka Hindi

उत्तर प्रदेश A- A+

गंगा किनारे जाने के लिए टूटेंगी बनारस की गलियां

तहलका ब्यूरो 2018-03-15 , Issue 05 Volume 10

राज्य सरकार तकरीबन 500 करोड़ रुपए खर्च करके 400 मीटर लंबा एक गलियारा बनाना चाहती है। इससे स्नानार्थियों और तीर्थयात्रियों को गंगा में डुबकी लगाने के बाद फौरन बाबा विश्वनाथ के दर्शन हो सकेंगे।

क ाशी विश्वनाथ मंदिर से गंगा किनारे तक आने के रास्ते को चौड़ा करने का उत्तरप्रदेश सरकार का इरादा जल्द अमल में आएगा। हांलाकि राज्य सरकार की इस योजना से न केवल निवासी बल्कि बुद्धिजीवी तक निराश हैं और वे विरोध जता रहे हैं।

राज्य सरकार तकरीबन 500 करोड़ रुपए खर्च करके 400 मीटर लंबा एक गलियारा बनाना चाहती है। इससे स्नानार्थियों और तीर्थयात्रियों को गंगा में डुबकी लगाने के बाद फौरन बाबा विश्वनाथ के दर्शन हो सकेंगे। गंगा किनारे बस्तियों के रहने वालों का कहना है कि अति महत्वपूर्ण लोगों के लिए गंगा किनारे पहुंंचने और बाबा विश्वनाथ मंदिर में पहुंचने को और आसान बनाने के लिए यह व्यवस्था प्रदेश सरकार कर रही है।

राज्य सरकार के मुख्यमंत्रियों में बाबू संपूर्णा नंद, कमलापति त्रिपाठी जैसे संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी के अच्छे जानकार लोगों ने भी सत्ता संभाली लेकिन कभी उन्होंने यह नहीं सोचा कि तंग गलियों से गंगा तक पहुंचना और उन्ही गलियों से बाबा विश्वनाथ के दरबार और दूसरे मंदिरों तक पहुंचने का जो तौर-तरीका सदियों से चला आ रहा है उसे तोड़ दिया जाए। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वाराणसी को जापान के क्योटो नगर की तरह खूबसूरत और आकर्षक बनाने पर तो ज़ोर दिया लेकिन उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि स्मार्ट शहर बनाने के नाम पर गंगा और विश्वनाथ मंदिर तक ऐसा गलियारा बने जिससे वीवीआईपी अपनी सुरक्षा और फौज-फांटे के साथ तत्काल स्नान और दर्शन की प्रक्रिया पूरी कर सकें।

देश में भाजपा नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार के गठन के बाद धार्मिक तौर पर मशहूर शहरों को जाने के इच्छुक अतिविशिष्ट लोगों का आना-जाना बढ़ा है। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबे की दिसंबर 2015 में वाराणसी की यात्रा हुई थी। उन्हें गंगा आरती दिखाने का कार्यक्रम बनाया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे।

प्रदेश में तीन चौथाई बहुमत पाने के बाद सत्ता में आई भाजपा सरकार ने यह फैसला लिया है कि उन 160 मकानों को धराशायी कर दिया जाए जिससे न केवल एक गलियारा फिलहाल बने बल्कि आने वाले दशकों में उसे और विस्तार भी दिया जा सके। जब तोड़-फोड़ की कार्रवाई शुरू होगी तो इसमें कई छोटे-बड़े मंदिर,ऐतिहासिक – सांस्कृतिक महत्व का केंद्र रही इमारतें भी ज़मीदोज़ हो जाएंगी। हांलाकि नगर प्रशासन का कहना है कि सिर्फ एन्क्रोचमेंट को ही हटाया जाएगा।

वाराणसी की धार्मिक-ऐतिहासिक विरासत को कभी मुगलिया सल्तनत भी नेस्तनाबूत नहीं कर सकी। बड़े पैमाने पर दूसरे धर्मों के लागे भी वाराणसी आए और काशी में बसे। अंग्रेजों ने भी सिर्फ  इलाके की सीवरेज व्यवस्था को ही विकसित किया। कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी हमेशा नगर की पुलिस पर ही रही। स्वतंत्रता आंदोलन को तेज रखने में इन्ही गलियों का योगदान हमेशा रहा। पुुलिस और स्वतंत्रता सेनानियों की आंख-मिचौली बरसों काशी की गलियों में चलती रही लेकिन राज्य में सत्ता संभाल रही उत्तरप्रदेश सरकार ने विधानसभा में हासिल बहुमत का पूरा लाभ उठाते हुए इस परियोजना को हरी झंडी दिखाई और उस पर कार्रवाई भी शुरू कर दी है। अपने पांच साल के शासन में इस परियोजना पर अमली जामा पहना लेने का सोचा गया है।

काशी के ही एक वरिष्ठ पत्रकार पद्मपति शर्मा विश्वनाथ मंदिर के पास की ही गली में रहते हैं। उन्होंने अपने एक लेख में बताया कि उनका मकान 175 साल से भी पुराना है और वाराणसी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने गलियारा बनाने की योजना के लिए 29 जनवरी को उनके मकान को भी धराशायी करने का मन बना लिया है। शर्मा ने अधिकारियों के न मानने पर आत्मदाह कर लेेने की धमकी दी है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा है, ‘बहुत हो गई भिखमंगी, अब होगी लड़ाईÓ।

शर्मा और इलाके के दूसरे निवासियों ने काशी की धरोहर बचाओ संघर्ष समिति नाम से एक संगठन भी बना लिया है। इस संगठन के लोग इसके जरिए काशी की सांस्कृतिक विरासत बचाए रखने के लिए संघर्ष करेंगे। इसमें समस्त धर्म परायण नागरिक गण शामिल हैं

Pages: 1 2 Single Page

(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 10 Issue 05, Dated 15 March 2018)

Comments are closed