क्या जंग का मैदान बन रहा है जेएनयू?

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5 जनवरी को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने फिर सुॢखयाँ बटोरीं, जब देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान के अन्दर नकाबपोश आततायियों की भीड़ ने कहर बरपा दिया। भीड़ ने हॉस्टल में तोडफ़ोड़ की, छात्रों और प्रोफेसरों की पिटाई की; लेकिन किसी ने उन्हें रोका नहीं। करीब दो घंटे चली इस गुण्डागर्दी में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आईशी घोष समेत कई छात्र और शिक्षक गम्भीर रूप से घायल हो गये।

दक्षिणपंथी भीड़ के इस आतंक ने देश भर को सदमे में डाल दिया और जानी मानी हस्तियों ने इस घटना की काफी निंदा की। पुलिस की उपस्थिति के बावजूद एक हिंसक भीड़ के इस कृत्य, वह भी राजधानी के बीचों-बीच, ने एक धर्म-निरपेक्ष और लोकतांत्रिक भारत में विश्वास करने वालों के भरोसे को गहरी चोट पहुँचायी है। इस वर्ष छात्रों द्वारा किया गया विरोध-प्रदर्शन पूरी तरह से अलग है। साल 2016 में, इसे भाजपा को दरकिनार करने के लिए एक राजनीतिक तमाशे के रूप में देखा गया था; लेकिन 2019 में अभूतपूर्व विवादों ने छात्र समुदाय को सडक़ों पर आने और अपना स्थान बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

भयावह हिंसा के लिए गुण्डों पर शिकंजा कसने के बजाय, दिल्ली पुलिस ने 4 जनवरी को एक सर्वर रूम में सुरक्षा गार्ड पर हमले और तोडफ़ोड़ के सम्बन्ध में दर्ज एफआईआर में आईशी घोष और 19, जिनमें छात्र और प्रोफेस्सर शामिल हैं, को नामजद कर लिया। छात्र नेता आईशी घोष ने अदालत में अपनी शिकायत में कहा था कि बाहरी लोगों और एबीवीपी से जुड़े छात्रों की भीड़ ने उन्हें डराने और मारने की कोशिश करने की साज़िश रची थी।

घोष ने कहा कि यह एक संगठित हमला था। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह उनपर हमला करने वालों को पहचान सकती है, जिन्होंने उसे छड़ से मारा था। घोष ने आरोप लगाया कि परिसर के सुरक्षा गार्ड और हमलावरों के बीच सांठगाँठ थी। उन्होंने कहा कि हमलावरों के विश्वविद्यालय में घुसने पर सुरक्षा से जुड़े लोग परिसर से हट गये थे।

छात्र नेता ने कुलपति जगदीश कुमार के इस्तीफे की माँग करते हुए दावा किया कि वह कुलपति का पद सँभालने में असमर्थ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जगदीश कुमार भाजपा नेतृत्व के आदेश पर काम कर रहे हैं। घोष ने इस बात से इन्कार किया कि उन्होंने एबीवीपी के सदस्यों पर हमले का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि एबीवीपी के नेतृत्व में किया गया हमला सुनियोजित था और इसका उद्देश्य छात्रों के असंतोष की आवाज़ को कुचलना था।

राष्ट्रीय राजधानी पुलिस, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है, अभी भी इन हमलावरों को लेकर अँधेरे में है। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। वीडियो के आधार पर और कुछ छात्रों और सोशल मीडिया के उन्हें पहचानने जैसे ठोस सबूत होने के बावजूद, दिल्ली पुलिस ने गुण्डों की गिरफ्तारी की पहल नहीं की या इसके प्रति कोई दिलचस्पी ही नहीं दिखायी।

क्या कहता है विपक्ष?

विपक्ष ने आरोप लगाया कि हमलावरों की भीड़ एबीवीपी के लोगों की थी। उन्होंने विश्वविद्यालय के अन्दर हिंसा को नियंत्रित करने में दिल्ली पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाया। तहलका संवाददाता को पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने देश में भय और हिंसा का माहौल बनाने के लिए भाजपा को ज़िम्मेदार ठहराया। हिंसा के अगले दिन यूनिवर्सिटी कैम्पस पहुंचे खुर्शीद ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को अपनी साम्प्रदायिक राजनीति से जोडऩा चाहती है; लेकिन कहा कि देश में अल्पसंख्यकों को दबाने के लिए उनकी हिन्दुत्व की विचारधारा का असली चेहरा जनता को पता है। खुर्शीद ने कहा- ‘भाजपा ने विकास का झूठा वादा किया। यहाँ तक कि कुछ लोग इसके झाँसे में आ भी गये। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि जेएनयू हिंसा में सरकार को यह आश्वासन देना चाहिए कि ऐसा फिर कभी नहीं होगा। लेकिन अभी तक एक भी केन्द्रीय मंत्री ने ऐसा नहीं कहा है।’

क्या कहते हैं प्रत्यक्षदर्शी

एमए प्रथम वर्ष की राजनीति विज्ञान की छात्रा मनीषा शुक्ला बताती हैं कि यह तीसरी बार था, जब नकाबपोश पुरुष और महिलाएँ 5 जनवरी को फिर से कैम्पस में प्रवेश कर रहे थे। कुछ गुण्डे साबरमती हॉस्टल पहुँचे और छात्रों को रॉड, हथौड़े और डंडे से पीटना शुरू कर दिया। हमले से बचते हुए, कुछ पुरुष छात्र छात्राओं के विंग में चले गये, लेकिन भीड़ वहाँ भी पहुँच गयी।

मनीषा ने दावा किया कि छात्र रो रहे थे और यह देखकर घबराये हुए थे कि हमलावर उन पर हमला करने के लिए तेज़ाब और अन्य पदार्थ लेकर आये हैं। उन्होंने कहा कि गुण्डे हम पर गालियों की बौछार कर रहे थे। मेरे कुछ दोस्तों ने यहाँ तक कहा कि हमले के दौरान उनका यौन उत्पीडऩ किया गया था।

इसी तरह ज्योति, जो एमए द्वितीय वर्ष की छात्रा है और जिनका वीडियो भीड़ के हमले के ठीक बाद सोशल मीडिया पर सामने आया था; ने कहा कि सशस्त्र गुण्डे शायद पिछले दिन की घटनाओं के कारण भी बेखौफ थे और उसने उन्हें छात्रों पर आतंक फैलाने के लिए प्रेरित किया था।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने इस वर्ष 1-5 जनवरी के बीच शीतकालीन सत्र के लिए अपनी पंजीकरण प्रक्रिया निर्धारित की थी। 4 जनवरी को दोनों समूहों के बीच हाथापायी शुरू हो गयी जब एक छात्र ने प्रशासन के  बन्द करने के बाद वाईफाई को बहाल करने की कोशिश की।

आश्चर्य की बात यह थी कि भीड़ ने जेएनयू में एक दृष्टिबाधित शोध छात्र सूर्य प्रकाश पर भी दया नहीं दिखायी। उन्हें भी भीड़ की हिंसा का खामियाजा  भुगतना पड़ा। भीड़ के बार-बार आग्रह के बावजूद, उन्हें साबरमती हॉस्टल के अन्दर लोहे की छड़ और लाठी से पीटा गया।

तहलका से घटना को साझा करते हुए प्रकाश ने कहा कि मैं अपने कमरे में काम कर रहा था। जब भीड़ वहाँ पहुँची, तो उन्होंने दरवाज़े पर ज़ोर से लात मारी। इससे ऊपर का काँच ज़मीन पर गिर गया था और इसके कुछ टुकड़े मुझे भी लगे थे।

उन्होंने कहा कि मैंने तुरन्त 100 नम्बर पर कॉल किया; लेकिन पुलिस ने कहा कि मुझे पहले कुछ चोट लगनी चाहिए। तभी वे मुझे बचाने आएँगे। शोध छात्र ने कहा कि तबसे मुझे 8763772… और 8754325… जैसे अज्ञात नम्बरों से अनावश्यक कॉल आ रही हैं। यहाँ तक कि मैंने पुलिस को नम्बरों के बारे में सूचित किया; लेकिन उन्होंने मुझे राष्ट्र विरोधी बताते हुए और यह कहकर मेरी मदद करने से इन्कार कर दिया कि वे मेरे पिटने के बाद ही जाँच शुरू करेंगे।

स्थानीय लोगों को किया परेशान

5 जनवरी की जेएनयू की घटना ने न केवल कई छात्रों को बहुत बुरी तरह घायल कर दिया, बल्कि कई स्थानीय लोग जो कैम्पस के आसपास रहते हैं, वे भी उतने ही भयभीत थे। भीड़ ने आतंक से बचने के लिए महिला छात्रों को आश्रय देने वाले स्थानीय लोगों पर हमला किया। भीड़ ने इन लोगों के दरवाजे तोड़ दिये और भीतर जाने की कोशिश की। उन्होंने स्थानीय लोगों को भी चेतावनी दी कि यदि वे उस क्षेत्र में शान्ति से रहना चाहते हैं, तो असहाय छात्रों की मदद न करें।

तहलका संवददाता ने जेएनयू के उत्तरी गेट के बाहर पास के घरों का दौरा किया, और कुछ मालिकों से बात की, जिन्होंने सशस्त्र भीड़ को उनकी सम्पत्ति को नष्ट करने के लिए दोषी ठहराया है।

50 साल की उम्र के एक स्थानीय निवासी ने टूटे हुए गेट की ओर इशारा करते हुए अपना नाम न छपने की शर्त पर बताया कि जब मैंने रात में नारे सुने, तो मैं अपने बेटे के साथ बाहर आया और हमने देखा कि कुछ छात्र रो रहे थे। मैंने उन्हें साँत्वना देने की कोशिश भी की। वे बहुत डरे हुए थे। मैं और बेटा उनमें से कुछ को घर के अन्दर ले गये।

उन्होंने कहा कि जैसे ही भीड़ ने उन छात्रों के बारे में सुना जो घर के अन्दर थे, तो उन्होंने हमारे घर पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया और हमारे साथ दुव्र्यवहार किया। हम चुप रहे, क्योंकि मेरे बेटे ने मुझे बताया कि वे हमें धमकाने के लिए पत्थर, लोहे की छड़ और लाठी लिये हुए हैं। बाद में करीब आधे घंटे के बाद भीड़ मौके से भाग गयी।

दक्षिणपंथी समर्थक

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) समर्थकों ने एकजुटता दिखाने के लिए जेएनयू के बाहर रैली की। प्रदर्शनकारियों ने खुद को निर्दोष बताया और हिंसा के लिए वामपंथियों पर उँगली उठायी।

एबीवीपी के साथ एकजुटता दिखाने वाले कवि मंजूषा रंजन ने जेएनयू के छात्रों को शैक्षिक केंद्र को युद्ध क्षेत्र में बदलने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया। इसी प्रदर्शन का हिस्सा रहीं एक पूर्व सेना अधिकारी की पत्नी ने कहा कि हम अपने देश के कल्याण के लिए कुछ भी कर सकते हैं। सरकार हमें सुनने के लिए है; लेकिन ये देश-विरोधी हमारे देश को एक युद्ध के मैदान में बदलने में सफल नहीं होंगे।

सत्तारूढ़ भाजपा ने भी एबीवीपी का समर्थन करते हुए कहा कि इस पैमाने पर हमला करना उनके लिए सम्भव नहीं था। पार्टी के कई नेताओं ने वामपंथी छात्रों पर दोषारोपण किया और कहा कि वे हर अवसर पर परेशानी पैदा करने के लिए बेताब थे। हालाँकि, कई वीडियो साक्ष्य ने साबित किया कि उस रात मास्क पहनकर छात्रों से मारपीट करने वाले एबीवीपी के कई जाने-माने चेहरे थे। लीक हुए व्हाट्सएप समूह की बातचीत में भी एबीवीपी के छात्रों की साँठगाँठ, हमले की योजना आदि के बारे में विस्तार से पता चला। हमलावर को हमले के वक्त दक्षिणपंथी नारे देश के ‘गदेरों को गोली मारो सा… को’ लगाते हुए भी सुना गया था, जो इस विश्वास को पुष्ट करता था कि वे एबीवीपी के थे।

समर्थन में बॉलीवुड

अभिनेता तापसी पन्नू, स्वरा भास्कर, ऋचा चड्डा, मोहम्मद जीशान अयूब खान, वरुण धवन, सिद्धार्थ मल्होत्रा, फरहान अख्तर और निर्देशक अनुराग कश्यप, अनुभव सिन्हा, विशाल भारद्वाज सहित बॉलीवुड के सितारों की बड़ी संख्या ने जेएनयू छात्रों का समर्थन किया। वे देश भर के कई शहरों में प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल हुए।

इससे पहले, अभिनेता मोहम्मद जीशान अय्यूब खान ने इस संवाददाता से बात करते हुए कहा कि यह पूछने में समय बर्बाद न करें कि यह या वह सेलिब्रिटी चुप क्यों है। इसके बजाय, एक साथ खड़े हों। यह मत भूलो कि हज़ारों लोग सडक़ों पर निकल आये हैं।

हमले में गम्भीर रूप से घायल आईशी घोष के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए मेगा स्टार दीपिका पादुकोण जेएनयू पहुँचीं, तो लोगों को सुखद आश्चर्य हुआ। सुनील शेट्टी, शत्रुघ्न सिन्हा, ज़ोया अख्तर, दिया मिर्ज़ा, राहुल बोस, अली फज़ल, सुधीर मिश्रा, सौरभ शुक्ला, स्वानंद किरकिरे सहित बॉलीवुड के कई और सितारों ने भी जेएनयू के छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त की और केंद्र से तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया और माँग की कि दोषियों की पहचान करें और कानून का शासन बहाल किया जाए।

जेएनयू के छात्रों पर हुए बर्बर हमले ने भारतीय शहरों में लाखों नागरिकों को बड़ी संख्या में सडक़ों पर उतरने के लिए मजबूर किया है। देश भर से रिपोट्र्स आयीं, कई जाने-माने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों ने भी हमले के पीडि़तों के लिए न्याय की माँग करते हुए विरोध-प्रदर्शन में हिस्सेदारी की। जेएनयू के वीसी के निष्कासन के लिए माँग ज़ोर पकड़ रही है; जो छात्रों पर हमले को रोकने और जाँच में कोई पहल करने में बुरी तरह विफल रहे हैं।