केजरीवाल का माफी मांग कर जताना पश्चाताप!

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पंजाब में अरविंद केजरीवाल की इज्जत का खत्म होना और उनकी आलोचना सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे द्वारा होना संकेत है शिरोमणि अकाली दल की मजबूत वापसी।

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अभी पिछले ही दिनों पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया से बिना शर्त माफी मांगी। पंजाब में हुई एक रैली में केजरीवाल ने यह आरोप लगाया था कि मजीठिया खुद मादक पदार्थों के तस्करी में लिप्त हैं। मजीठिया को बिना प्रमाण आए ऐेसे बयान से काफी पीड़ा हुई और उन्होंने मानहानि का एक मुकदमा अरविंद केजरीवाल पर दायर किया। इसमें कहा गया कि आरोप गलत हैं।

इसके पहले अकाली दल के वरिष्ठ नेता और विधायक मजीठिया ने मीडिया युद्ध जीता था। तब अंग्रेजी ‘ट्रिब्यूनÓ ने अपने पहले पन्ने पर तीन कॉलम में एक खबर छापी थी जिसका शीर्षक था मादक द्रव्यों के घोटाले में बिक्रम सिंह मजीठिया के प्रमाण नहीं। इसमें बिक्रम सिंह का चित्र भी 25नवंबर 2014 के हवाले से 25.11.2014 और 10.03.2015 को ‘इस खेद प्रकाश में छपा था।Ó जांच पड़ताल में यह पता चला कि बिक्रम सिंह मजीठिया किसी भी मादक द्रव्यों के व्यापार में शमिल नहीं हैं। ट्रिब्यून को इस बात पर बहुत अफसोस है कि इस आरोप के कारण बिक्रम मजीठिया की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची और उनके पारिवारिक जनों और शुभचिंतकों को तकलीफ हुई। ऐसी स्थिति में ट्रिब्यून का यह बिना शर्त माफीनामा माना जाए।

एक अखबार के इस तरह खेद प्रकाश करने के बाद ही दिल्ली के मुख्यमंत्री की बिना शर्त माफी याचना आई। अमूमन अरविंद केजरीवाल को भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम छेडऩे वाला व्यक्तित्व माना जाता रहा है। लेकिन उन्हीं को अपने शब्द वापस लेने पड़े। चाय के प्याले में तूफान की तरह आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई में हड़कंप मच गया। आप के सांसद और पंजाब पार्टी के अध्यक्ष भगवंत मान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया उनके साथी अमन अरोड़ा ने भी अरविंद केजरीवाल की इस कार्रवाई को बहुत शर्मनाक माना। इस माफीनामे से साफ होता है कि पार्टी की राजनीति का स्तर कितना छिछला हुआ है और इसकी इज्जत कितनी घटी है। यह सभी जानते हैं कि आप में विपक्षियों की तादाद कहीं ज़्यादा है और नेतृत्व में यह कमजोरी है कि वे नतीजों का सामना नहीं कर पाते।