किस्सा खिसियानी बिल्ली का | Tehelka Hindi

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किस्सा खिसियानी बिल्ली का

2018-03-31 , Issue 06 Volume 10

खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे। मुहावरा आप सबने सुना होगा। पर यहां तो खंबे की जगह बुत ही गिरा दिए गए। नोचना-कचोटना तो आदमी का काम है। हमारे यहां ऐसा कुछ नहीं होता। हमारे बुत कहीं-कहीं लगते हैं। पर वह मसखरी के लिए, उन्हें कोई नहीं तोड़ता।

इंसान भी बड़े अजीब प्राणी हैं, जिस पर ज़ोर नहीं चलता उस पर चोरी-चोरी पत्थर फेंकते हैं। यदि व्यक्ति अपने ज़माने में ताकतवर हुआ तो उसका बुत बनता है फिर उसे तोड़ दिया जाता है। यह तब होता है जब पता हो कि उसे तोडऩे पर कुछ होने वाला भी नहीं। सरकार तो साथ है ही और प्रशासन भी। इन लोगों पर हमने पुलिस के डंंडे बरसते नहीं देखे। लेकिन पुलिसिया वर्दी देखते ही अंगे्रज़ों के ज़माने से इनकी बहादुरी पता नहीं कहां चपत हो जाती। कहते हैं कमज़ोर आदमी का गुस्सा ऐसे ही निकलता है।

लेकिन यह भी देखा गया है कि मानव की सारी प्रजातियां ऐसा नहीं करती। जानवरों में जैसे सारे नरभक्षी नहीं होते और सांपों में भी सभी विषधारी नहीं होते, वैसे ही इंसानों में सभी ऐसे नहीं होते। इनमें भी खास प्रजाति है जो तोडफ़ोड़, आगजनी,मारपीट और हिंसा के काम करती है।

मज़ेदार बात यह है कि बुत तोडऩे वालों को यह भी पता नहीं होता कि वह मूर्ति किसकी है जो उन्होंने तोड़ी? वे यह भी नहीं जानते कि वह भारतीय है या विदेशी? कई तो उस व्यक्ति का नाम तक उच्चारित नहीं कर पाते। इनमें कुछ तो बिचारे दिहाड़ीदार होते हैं जो फावड़ा-कुदालें लेकर आते हैं।

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(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 10 Issue 06, Dated 31 March 2018)

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