कादर खान नहीं रहे

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हसने-हसाने वाले कादर खान नए साल के पहले दिन अपने लाखों चाहने वालों को रुला गए। कनाडा के एक अस्पताल में मंगलवार तड़के उनका निधन हो गया। करीब २५० फिल्मों में संवाद लिखने और ३०० के करीब में अभिनय करने वाले खूबसूरत आवाज के मालिक कादर खान (८१) पिछले १५ हफ़्तों से कनाडा के अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती थे।
घोर गरीबी में बचपन बिताने वाले कादर खान ने जीवन का सच बहुत नजदीक से देखा। अफ़ग़ानिस्तान के काबुल में २२ अक्टूबर, १९३७ को जन्म लेने वाले कादर खान अपने अनोखे अभिनय और डायलॉग से लाखों के चाहते बन गए। उनका जाना भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए बड़ा नुक्सान है।
उनके तीन बेटे हैं। एक बेटे सरफ़राज़ के मुताबिक कादर का अंतिम संस्कार कनाडा में ही किया जाएगा।
उनके पिता अब्दुल रेहमान खान कंधार के थे तो माता इकबाल बेगर पिशिन (अंग्रेजों के समय भारत का हिस्सा) से थीं। उनके तीन भाइयों की मौत उनके बचपन में हो गयी गयी थी। जीवन का बहुत संघर्ष कादर को  इसी से जीवन के वो सच उन्होंने देख लिए जिन्होँने उन्हें एक लाजवाब इंसान और कलाकार बना दिया।
अपने एक इंटरव्यू में कादर ने बताया था कि बचपन की गरीबी ने उन्हें यह अहसास दिल्या कि जीवन में पढ़ाई बहुत ज़रूरी है। इसके बाद उन्होंने  सिविल इंजीनियरिंग की और एक स्कूल/कालेज में मैथ्स पढ़ाया।
कादर पहले विलेन रहे और फिर बच्चों के कहने पर हास्य अभिनय हास्य अभिनय किया। वे फ़िल्म निर्देशक भी रहे। उन्होंने ३०० से अधिक फिल्मों में काम किया। उनकी पहली फ़िल्म दाग (१९७३) थी जिसमे उन्होंने अभियोगपक्ष के वकील की भूमिका निभाई थी। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई इस्माइल यूसुफ कॉलेज से की पूरी की।
कादर ने पढ़ाई की शुरुआत एक म्युनिसिपल स्कूल से की। उसके बाद इस्माइल कॉलेज से ग्रेजुएशन और फिर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया।  फिल्म जगत में आने से पहले वे कॉलेज में लेक्चरर रहे।
वे मुंबई में रहे और उनके तीन बेटें हैं जिसमे से एक कनाडा में रहता है। वहीं उनकी आज मृत्यु हुई। उनका बेटा सरफराज खान हिंदी फिल्म अभिनेता है।
कादर खान के फ़िल्मी जीवन की शुरुआत तब हुई एक बार वे अपने कॉलेज में किसी भूमिका को निभाया तो वहां उपस्थित लोगो ने उनकी काफ़ी प्रशंसा की। जब अभिनेता दिलीप कुमार को ये पता चला तो उन्होंने खान को बुलाया और उन्हें रोल देखने कि इच्छा ज़ाहिर कि तो खान ने अच्छे से तैयार कर उनके लिए प्रदर्शित किया।दिलीप कुमार उनके प्रदर्शन से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने खान को दो फ़िल्मो में काम दे दिया सगीना महतो और बैराग।
कादर ने ३०० से अधिक हिंदी और उर्दू फिल्मो में काम किया है साथ ही उन्होंने १९७० के दशक से ही २५० से भी ज्यादा फिल्मो के लिए डायलॉग  लिखे।
कादर खान ने रोटी फिल्म (१९७४) के लिए संवाद लिखे। उस फ़िल्म के संवाद  लिखने के लिए मनमोहन देसाई ने उन्हें एक लाख इक्कीस हजार रुपये दिए थे। उन्होंने अधिकतर जीतेन्द्र, फिरोज खान, अमिताभ बच्चन और गोविंदा और डेविड धवन के साथ बहुत सारी सुपरहिट फिल्मो में काम किया। इसके साथ ही शक्ति कपूर और जॉनी लीवर जैसे महान कॉमेडियन और अभिनेताओं के साथ काम किया।
कादर ने एक स्क्रीनराइटर के रूप में मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा के लिए कई सारी फिल्मो के लिए काम किया। अमिताभ बच्चन ने जिन फिल्मों  में काम किया उनमे से कई सारी फिल्मो के लिए कादर खान ने संवाद लिखे है। मिस्टर नटवरलाल, खून पसीना, दो और दो पाच, सत्ते पे सत्ता, इन्किलाब, गिरफ्तार जैसी फिल्मों के लिए कादर खान ने ही स्क्रीनराइटर के रूप में काम किया है।
अजय देवगन की फ़िल्म “हिम्मतवाला”, गोविंदा की फ़िल्म “कुली नंबर 1”, अक्षय कुमार और सैफ़ अली खान की फ़िल्म “मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी” कानून अपना अपना, खून भरी मांग, कर्म, सलतनत, आमिर खान की फ़िल्म “सरफ़रोश”, जस्टिस चौधरी और धरम वीर जैसी सुपरहिट फिल्मों के डायलोग खुद कादर खान ने ही लिखे है।
अपनी कला और आवाज से प्रभावित कर देने वाले खान  पुरुस्कारों से सम्मानित किया गया। इनमें २०१३ में साहित्य शिरोमणि पुरस्कार (हिन्दी सिनेमा में योगदान के लिए),  १९८२ में फ़िल्म फ़ेयर अवार्ड (बेस्ट डायलॉग  “मेरी आवाज सुनो”), १९८१ में फ़िल्म फ़ेयर बेस्ट कॉमेडियन (बाप नम्बरी बेटा दस नम्बरी) के लिए मिला।
कादर खान के कॉलेज में किए गए ड्रामा काम करने के बाद, दिलीप कुमार इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कादर खान को अपनी दो फिल्मों सगीना और बैराग के लिए साइन कर लिया। कादर खान के पास कनाडा की भी नागरिकता थी। कादर खान टेलीविजन पर एक कॉमेडी शो ‘हंसना मत’ प्रसारित कर चुके हैं। जिसे उन्होंने खुद बनाया था।
अमिताभ बच्चन के अलावा, कादर खान ऐसे कलाकार थे जिन्होंने प्रकाश मेहरा और मनमोहन देसाई के आपस में प्रतिस्पर्धी कैंपों में काम किया।  अमिताभ की कई सफल फिल्मों के अलावा, कादर खान ने हिम्मतवाला, कुली नं वन, मैं खिलाडी तू अनाड़ी, खून भरी मांग, कर्मा, सरफरोश और धर्मवीर जैसी सुपर हिट फिल्मों  संवाद लिखे और कुछ में अभिनय भी किया।
”तहलका” की इस महान कलाकार को श्रद्धांजलि।