कहीं चीन के जैविक युद्ध का हिस्सा तो नहीं कोरोना वायरस!

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चीन के अधिकारियों ने जैसे ही तत्काल की डराबनी बीमारी कोरोना वायरस के करीब 6,000 मामलों की पुष्टि की, उसके कुछ ही घंटों बाद ही जियोपॉलिटिर्क एंड इंटरनेशनल रिलेशंस पर ग्रेट गेम इंडिया नामक पत्रिका ने टायलर डरडेन का एक लेख प्रकाशित करके पूरी दुनिया को चौंका दिया। इस पत्रिका में सवाल उठाया गया था कि क्या चीन ने कनाडा से कोरोना वायरस को एक हथियार बनाने के लिए चुराया है?

शोधकर्ताओं का मानना है कि नया वायरस शायद चमगादड़ से आया है, जिसके साथ वह अपने आनुवांशिक मेकअप का 80 फीसदी हिस्सा साझा करता है। लेकिन शोधकर्ता प्रामाणिक तौर पर नहीं कह पाये हैं कि यह वायरस किस जानवर से इंसानों में आया है? पिछले हफ्ते एक चीनी टीम ने सुझाव दिया कि यह साँप से आया हो सकता है! लेकिन अन्य विशेषज्ञों ने इस सुझाव को चुनौती दी, जो यह मानते हैं कि एक स्तनधारी के इसके पीछे होने की अधिक सम्भावना है। यह किस जानवर से है। इसकी पहचान हो जाए, तो इससे इस प्रकोप से लडऩे में मदद मिल सकती है।

हालाँकि, ग्रेट गेम इंडिया ने दावा किया कि उसकी जाँच ने एजेंटों को चीनी जैविक युद्ध कार्यक्रम से जोड़ा था, जहाँ से वायरस के लीक होने का संदेह है, जो वुहान कोरोना वायरस का कारण बना। इसमें कहा गया है कि पिछले साल कनाडा से एक रहस्यमय शिपमेंट को कोरोना वायरस की तस्करी करते हुए पकड़ा गया था। तब कनाडाई लैब में काम करने वाले चीन के एजेंट्स का पता लगाया गया था।

कैसे पनपा कोरोना वायरस?

13 जून, 2012 को सऊदी अरब के जेद्दा में एक 60 वर्षीय व्यक्ति को बुखार, खाँसी, कफ और साँस लेने में कठिनाई के कारण एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके पास कार्डियोपल्मोनरी या गुर्दे की बीमारी का कोई इतिहास नहीं था। उसने लम्बे समय से कोई दवा नहीं ली थी। धूम्रपान भी नहीं करता था। मिस्र के वीरोलॉजिस्ट डॉक्टर अली मोहम्मद ज़की ने उसके फेफड़ों से एक अज्ञात वायरस (कोरोना) अलग कर दिया। रुटीन डायग्नॉस्टिक्स के कारण एजेंट को पहचानने में नाकाम रहने के बाद, ज़की ने सलाह के लिए नीदरलैंड के रॉटरडैम में इरास्मस मेडिकल सेंटर (ईएमसी) के एक प्रमुख वायरोलॉजिस्ट, रॉन फुचियर से सम्पर्क किया। फाउचर ने ज़की के भेजे गये एक नमूने से वायरस का मिलान किया। फ्यूचर ने एक व्यापक-स्पेक्ट्रम पैन-कोरोना वायरस का उपयोग किया, जो मानवों को संक्रमित करने के लिए जाने वाले कई कोरोनविर्यूज की विशेषताओं के परीक्षण के लिए वास्तविक समय पोलीमरेज चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) विधि का उपयोग करता है।

कोरोना वायरस का यह नमूना कनाडा के नेशनल माइक्रोबायोलॉजी लैबोरेटरी (एनएमएल) के वैज्ञानिक निदेशक डॉक्टर फैंक प्लमर ने विन्निपेग में सीधे फाउचर से प्राप्त किया था, जिन्होंने इसे ज़की से हासिल किया। द ग्रेट गेम इंडिया का आरोप है कि चीनी एजेंटों ने कथित तौर पर कनाडाई लैब से इस वायरस को चुराया था। इसका यह भी आरोप है कि 4 मई, 2013 को डच लैब से कोरोना वायरस कनाडा की एनएमएल विन्निपेग में पहुँचे। कनाडाई लैब ने वायरस की संख्या को बढ़ाया और इसका उपयोग कनाडा में होने वाले नैदानिक परीक्षणों का आकलन करने के लिए किया। विन्निपेग वैज्ञानिकों ने यह जानने के लिए काम किया कि किस पशु की प्रजाति नये वायरस से संक्रमित हो सकती है। एनएमएल के पास कोरोना वायरस के लिए व्यापक परीक्षण सेवाओं की पेशकश का एक लम्बा इतिहास है। इसने एसएआरएस कोरोना वायरस के पहले जीनोम अनुक्रम को अलग-थलग कर दिया और 2004 में एक और कोरोनोवायरस एनएल 63 की पहचान की। चीनी एजेंटों ने कथित तौर पर इस विन्निपेग आधारित कनाडाई लैब को लक्षित किया, जिसे जैविक जासूसी केंद्र कहा जा सकता है।

जैविक जासूसी

मार्च, 2019 में एक रहस्यमयी घटना में कनाडा के एनएमएल के असाधारण विषाणुजनित विषाणुओं का शिपमेंट चीन में समाप्त हो गया। एनएमएल के वैज्ञानिकों ने कथित तौर पर कहा था कि अत्यधिक घातक वायरस सम्भावित जैव-हथियार थे। जाँच के बाद, इस घटना का पता एनएमएल में काम करने वाले चीनी एजेंटों को लगा। एनएमएल कनाडा की एकमात्र स्तर-4 सुविधा है और उत्तरी अमेरिका में कुछ में से एक है, जो दुनिया की सबसे घातक बीमारियों से निपटने के लिए सुसज्जित है। इसमें इबोला, सारस, कोरोना वायरस आदि शामिल हैं।

एनएमएल वैज्ञानिक जिसे उसके जीवविज्ञानी पति और शोध टीम के सदस्यों के साथ कनाडाई लैब से बाहर निकाला गया गया था, पर आरोप है कि वे चीन के बायो-वारफेयर एजेंट थे। एजेंट कनाडा के एनएमएल में शक्तिशाली वायरस का अध्ययन कर रहा था। यह दम्पति कथित रूप से कई चीनी एजेंटों के साथ छात्र बनकर चीनी वैज्ञानिक सुविधाओं से सीधे कनाडा के एनएमएल में घुसपैठ करने के लिए ज़िम्मेदार है। वो सीधे चीन के जैविक युद्ध कार्यक्रम में शामिल थे, जिसमें वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी और चीनी विज्ञान अकादमी, हुबेई शामिल हैं।

कनाडाई जाँच अभी भी चल रही है और यह सवाल बना हुआ है कि क्या चीन के अन्य विषाणुओं या अन्य आवश्यक तैयारियों के लिए पिछला शिपमेंट 2006 से 2018 तक हुआ। कथित एजेंटों उर्फ वैज्ञानिकों ने चीनी विज्ञान अकादमी की वुहान राष्ट्रीय जैव सुरक्षा प्रयोगशाला के लिए वर्ष 2017-18 में कथित तौर पर कम-से-कम पाँच यात्राएँ कीं। संयोगवश, वुहान नेशनल बायोसेफ्टी प्रयोगशाला, हुआनन सीफूड मार्केट से केवल 20 मील की दूरी पर स्थित है, जो कि कोरोना वायरस के गढ़ वुहान कोरोना वायरस का केंद्र स्थल है।

वुहान राष्ट्रीय जैव सुरक्षा प्रयोगशाला को चीनी सैन्य सुविधा वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में रखा गया है, जो चीन के जैविक वारफेयर प्रोग्राम से जुड़ा हुआ है। वुहान संस्थान ने अतीत में कोरोना वायरस का अध्ययन किया है, जिसमें तनाव भी शामिल है; जो गम्भीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम, या सार्स, एच5एन1 इन्फ्लूएंजा वायरस, जापानी एन्सेफलाइटिस और डेंगू शामिल हैं; के लिए ज़िम्मेदार है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने उस रोगाणु का भी अध्ययन किया जो एंथ्रेक्स (एक जैविक एजेंट, जो एक बार रूस में विकसित हुआ) का कारण बनता है।

योजना बन गयी आफत!

चीन के जैविक युद्ध कार्यक्रम को एक अग्रिम चरण में माना जाता है, जिसमें अनुसंधान और विकास, उत्पादन और हथियार क्षमताएँ शामिल हैं। माना जाता है कि इसकी वर्तमान सूची में पारम्परिक रासायनिक और जैविक एजेंटों की पूरी शृंखला को शामिल किया गया है, जिसमें विभिन्न प्रकार के डिलीवरी सिस्टम शामिल हैं। इनमें तोपखाने,  रॉकेट, हवाई बम, स्प्रेयर और कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल शामिल हैं। वास्तव में चीन की सैन्य-नागरिक राष्ट्रीय रणनीति ने जीव विज्ञान को प्राथमिकता के रूप में रखा  है और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) इस ज्ञान का विस्तार और शोषण करने में सबसे आगे हो सकती है। पीएलए जीव विज्ञान के लिए सैन्य अनुप्रयोगों को आगे बढ़ा रही है और मस्तिष्क विज्ञान, सुपर कम्प्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धि सहित अन्य विषयों के साथ दूसरी सम्भावनाओं को देख रही है। साल 2016 से केंद्रीय सैन्य आयोग ने सैन्य मस्तिष्क विज्ञान, उन्नत बायोमिमेटिक सिस्टम, जैविक और बायोमिमेटिक सामग्री, मानव प्रदर्शन बढ़ाने और नयी अवधारणा जैव प्रौद्योगिकी पर परियोजनाओं को वित्त पोषित किया है। रणनीतिक अनुवांशिक हथियारों और रक्तहीन विजय की सम्भावना के बारे में बात करने वाले रणनीतिकार युद्ध के उभरते क्षेत्र के रूप में जीव विज्ञान में चीनी सेना की रुचि का मार्गदर्शन करते हैं। यह योजना चीन के लिए ही आफत बन गयी। लेकिन जब तक चीन में वायरस की चोरी और शिपमेंट के बारे में कनाडाई जाँच पूरी नहीं हो जाती, तब तक रहस्य और सवाल यह है कि कोरोना वायरस ने चीन में कैसे प्रवेश किया? यह रिपोर्ट लिखे जाने तक चीन में, जो कि इस डरावने कोरोना वायरस की उत्पति का देश है; 6,000 से अधिक लोगों में इस वायरस के संक्रमण की पुष्टि की जा चुकी थी, जिनमें से 212 लोगों की मौत हो चुकी है। इस वायरस से पीडि़तों के भारत में एक मामले के अलावा अन्य एशियाई देशों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और अमेरिका में भी कुछ मामले सामने आये हैं।

क्या है कोरोना वायरस

कोरोना वायरस (सीओवी) के संक्रमण से जुकाम से लेकर साँस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, बुखार, खाँसी, साँस लेने में तकलीफ इसके लक्षण हैं। इस वायरस को फैलने से रोकने का िफलहाल कोई टीका नहीं है।

बीमारी के लक्षण

इस वायरस के संक्रमण के से बुखार, जुकाम, साँस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश होती है। वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है, इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरतने की ताकीद की जाती है।

बचाव के उपाय

भारत के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से बचने के लिए दिशा-निर्देश जारी किये हैं। इनके मुताबिक, हाथों को साबुन से धोना चाहिए और अल्‍कोहल आधारित हैंड रब का इस्‍तेमाल भी किया जा सकता है। खाँसते और छींकते समय नाक और मुँह को रूमाल या टिश्‍यू पेपर से ढककर रखना चाहिए। जिन व्‍यक्तियों में कोल्‍ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें। अण्डे और मांस का सेवन न करें। जंगली जानवरों से दूर रहें।