कर बचाने के रास्ते- बड़े खिलाड़ी टैक्स बचाने के लिए बन जाते हैं अभिनेता!

जिसकी आमदनी जितनी ज्यादा होती है, वह उतनी ही बड़ी टैक्स यानी कर चोरी करता है। लेकिन इन बड़ी आमदनी वाले बड़े लोगों के पास टैक्स चोरी करके भी बचने के रास्ते होते हैं। ‘तहलका एसआईटी’ की जाँच रिपोर्ट से पता चलता है कि कैसे क्रिकेट दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने टैक्स से एक बड़ी राहत पाने के लिए अभिनेता की भूमिका निभायी? कैसे भारतीय क्रिकेटरों में कर कानून के गलत पक्ष में जाने की अनोखी आदत है। इसी तरह की टैक्स चोरी को लेकर तहलका एसआईटी की एक पड़ताल :-

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यह सब 2011 में शुरू हुआ, जब मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के तत्कालीन सहायक आयुक्त के साथ विवाद हुआ। जब मामले का विवरण सार्वजनिक हुआ, तो लोग हैरान रह गये कि क्या सचिन तेंदुलकर सिर्फ एक क्रिकेटर हैं या एक अभिनेता भी हैं? सचिन तेंदुलकर द्वारा विभिन्न कम्पनियों से परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में प्राप्त 5.92 करोड़ रुपये पर कर कटौती का दावा करने के बाद विवाद छिड़ गया था।

आयकर अधिनियम-1961 की धारा-80(आरआर) के तहत कटौती का दावा किया गया था। धारा-80(आरआर) सुविधा प्रदान करती है कि यदि कोई व्यक्ति एक चुनिंदा पेशेवर है, यानी एक लेखक, नाटककार, कलाकार, संगीतकार, अभिनेता या खिलाड़ी है और वह विदेशी स्रोतों से आय प्राप्त करता है, तो अधिकारी अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए अर्जित किये गये पूरे धन पर कर नहीं लगाएँगे।

हालाँकि आकलन अधिकारी ने तेंदुलकर के दावे को खारिज कर दिया। अस्वीकृति का आधार यह था कि सचिन एक पेशेवर क्रिकेटर थे। इसके बाद उन्होंने अपने पेशे से मॉडलिंग और विज्ञापन से आय नहीं ली। मूल्यांकन अधिकारी ने तर्क दिया कि विज्ञापन में केवल किसी उत्पाद का समर्थन करके, सचिन एक अभिनेता होने का दावा नहीं कर सकते। तेंदुलकर ने हालाँकि इस आदेश के खिलाफ आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील की।

उनके वकील ने प्रस्तुत किया कि तेंदुलकर ने वेतन से आय, एक क्रिकेटर के रूप में अन्य स्रोतों से आय और मॉडलिंग / प्रायोजन से आय को व्यवसाय / पेशे से आय के रूप में दिखायी है। उन्होंने प्रस्तुत किया कि सचिन एक पेशेवर क्रिकेटर नहीं थे और उनका एकमात्र पेशा एक अभिनेता का था। इसके अलावा धारा-80(आरआर) के तहत एक व्यक्ति के पास एक से अधिक पेशे हो सकते हैं। अपने अंतिम निर्णय में आईटीएटी ने मास्टर ब्लास्टर की अपील पर सहमति व्यक्त की और उन्हें बिना मुद्दों के कटौती का लाभ उठाने की अनुमति दी। इसके अलावा आईटीएटी ने सचिन तेंदुलकर के तर्क को सही पाया, क्योंकि उन्होंने दोहराया कि वह एक कलाकार होने के साथ-साथ एक क्रिकेटर भी हो सकते हैं।

इसके अलावा जब लिटिल मास्टर, जैसा कि उन्हें प्यार से बुलाया जाता है; स्क्रीन पर आते हैं, तो वह अपने क्रिकेट कौशल का उपयोग नहीं करते, बल्कि केवल अपने अभिनय कौशल का उपयोग करते हैं। आईटीएटी ने कहा कि ब्रांड या उत्पादों के प्रचार के लिए ऐसे कौशल की आवश्यकता होती है, जो क्रिकेट से सम्बन्धित नहीं है; इसलिए कटौती उचित है।

तेंदुलकर पर वित्त वर्ष 2001-02 और वित्त वर्ष 2004-05 के दौरान विदेशी मुद्रा में ईएसपीएन-स्टार स्पोर्ट्स, पेप्सिको और वीजा से अर्जित 5,92,31,211 रुपये की आय पर 2,08,59,707 रुपये का आयकर लगाया गया था।
ट्रिब्यूनल के फैसले के उनके पक्ष में जाने से सचिन ने टीवी विज्ञापनों के माध्यम से की गयी आय पर लगभग दो करोड़ रुपये बचा लिये। लेकिन यह पहली बार नहीं था, जब सचिन तेंदुलकर को आयकर अधिकारियों के साथ इस तरह उलझना पड़ा हो। इससे पहले भी वह उन करीब 75,000 लोगों, जिनमें कई मशहूर हस्तियाँ और व्यवसायी शामिल थे; में से एक थे, जिन्होंने कारों पर टैक्स का भुगतान करने में विफल रहने के बाद यह नाराजगी झेली हो।

नवी मुम्बई में पंजीकृत कारों पर उपकर का भुगतान न करने पर प्राधिकरण ने सभी आरोपियों को समन (नोटिस) जारी किया था। इनमें सचिन तेंदुलकर, गायक और संगीतकार शंकर महादेवन और अनिल धीरूभाई अंबानी समूह शामिल थे। सचिन के पास बीएमडब्ल्यू एम5 लग्जरी कार है। नवी मुम्बई नगर निगम के अनुसार, वाहन कर का भुगतान न करने के कारण कुल बकाया राशि 50 करोड़ रुपये थी। बकाया राशि 1.5 लाख वाहनों से सम्बन्धित थी।

सचिन तेंदुलकर से पहले क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने कर छूट का लाभ उठाने के लिए अभिनेता की टोपी पहनने की कोशिश की थी। लेकिन भोगले की गुगली पर टैक्स अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से छक्का मार दिया। अपने काम के लिए विदेशों से कमाई करने वाले कलाकारों को विशेष छूट देने की क्रिकेट कमेंटेटर की कोशिश को एक आईटी ट्रिब्यूनल ने खारिज कर दिया था।

आईटी विभाग ने दावा किया था कि टैक्स में छूट माँगने के लिए भोगले खुद की तुलना उन लेखकों, नाटककारों, संगीतकारों, खिलाड़ियों और अभिनेताओं से नहीं कर सकते, जो विदेशी संस्थानों से कमाते हैं; क्योंकि उन्होंने कोई रचनात्मक काम नहीं किया। साल 2002 में ट्रिब्यूनल ने कहा कि भोगले ने जो किया, वह कोई रचनात्मक काम नहीं था और अच्छी अंग्रेजी तथा क्रिकेट का ज्ञान रखने वाला कोई भी व्यक्ति कमेंट्री कर सकता हैं। क्रिकेट का खेल आजकल ग्लैमर और दौलत से भरा हुआ है, ये कारक भारत में युवाओं की क्रिकेटर बनने की महत्त्वाकांक्षा को बढ़ावा देते हैं।
इस बीच सचिन तेंदुलकर एकमात्र भारतीय क्रिकेटर नहीं हैं, जो अधिकारियों के साथ कर विवाद में फँस गये हैं। कई अन्य लोग हैं, जो करों के कारण सरकार के साथ परेशानी में उलझे और मामलों को अदालत के माध्यम से सुलझा लिया गया। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) क्रिकेटरों को मैचों में उनके प्रदर्शन के आधार पर वेतन देता है, जो उन्हें बेहतर खेलने और देश का गौरव बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

यहाँ तक कि राष्ट्र के लिए अपनी सेवाओं के बाद भी उनमें से अधिकांश एक सेलिब्रिटी का जीवन जीते हैं, जिन्होंने खेल के दिनों में पर्याप्त सम्पत्ति अर्जित की है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि जितना अधिक धन होता है, उतना अधिक करों को आकर्षित करता है। जैसा कि होता है कि करदाता (टैक्स पेयर) टैक्स चुकाने में खुशी महसूस नहीं करता। यहाँ उन प्रसिद्ध भारतीय क्रिकेटरों की सूची दी गयी है, जिनका कर अधिकारियों के साथ विवाद हुआ था।

सौरभ गांगुली

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के खिलाफ सर्विस टैक्स डिमांड नोटिस को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। उन्हें लेख लिखने, टीवी शो की एंकरिंग करने आदि के लिए पारिश्रमिक मिलता था, जिसे प्राधिकरण ने शुरू में सेवा कर के रूप में निर्धारित किया था। हालाँकि कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ ने उनके खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द कर दिया। इसे अमान्य करते हुए, यह माना गया कि लेख लिखने, टीवी शो एंकरिंग करने और आईपीएल खेलने के लिए प्राप्त पारिश्रमिक व्यापार सहायक सेवा के तहत सेवा कर का कारण नहीं है।

सचिन तेंडुलकर

निस्संदेह दुनिया में सबसे प्रसिद्ध भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी भी कर विवादों से अछूते नहीं थे, क्योंकि उन्हें एक से अधिक बार अधिकारियों से राहत लेनी पड़ी थी। सन् 2017 में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) की मुम्बई पीठ ने पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के खिलाफ विभाग की अपील को खारिज कर दिया और कहा कि शेयरों की बिक्री-खरीद से होने वाली आय को केवल इसलिए व्यावसायिक आय नहीं माना जा सकता है, क्योंकि उन्होंने पोर्टफोलियो प्रबंधक की सेवा का लाभ उठाया है।

कृष्णमाचारी श्रीकांत

पूर्व भारतीय कप्तान, जो अब मॉडलिंग, क्रिकेट कमेंट्री, पत्रकारिता, परामर्श और बीपीसीएल डीलरशिप के व्यवसाय में लगे हुए हैं; के मामले में एक बार आईटीएटी द्वारा पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही को बर$करार रखा गया था। जब अधिकारियों ने देखा कि उन्होंने अपने नाम, नाबालिग बच्चों और पत्नी के शेयरों को बेच दिया था, और शेयरों की बिक्री आय से 4.25 करोड़ रुपये की पेशकश नहीं की थी। यह दावा करते हुए कि भारतीय द्वारा शेयरों पर गार्निश अटैचमेंट को ओवरराइड करने के लिए भुगतान किया गया था।

आखिर आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल ने यह देखते हुए मूल्यांकन को बरकरार रखा कि उन्होंने उक्त कम्पनी ‘क्रिस श्रीकांत स्पोर्ट्स’ एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड की सम्पूर्ण शेयरधारिता के लिए पेंटामीडिया ग्रुप ऑफ कंसर्न्स के साथ एक गैर-प्रतिस्पर्धी समझौता किया था, जिसके लिए प्रतिस्पर्धा नहीं करने की सहमति दी थी। उक्त कम्पनी- ‘क्रिस श्रीकांत स्पोर्ट्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ के साथ छ: साल की अवधि के लिए 7.50 करोड़ रुपये के गैर-प्रतिस्पर्धी शुल्क के लिए जो पूँजी प्राप्ति होने के कारण टैक्स से मुक्त थे। अपने 85 पन्नों के आदेश के अन्त में ट्रिब्यूनल ने पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही को बरकरार रखा और कहा कि निर्धारिती द्वारा भारतीय बैंक को 4.25 करोड़ रुपये का भुगतान केवल आय का एक आवेदन था।

स्वप्निल असनोदकर

मुम्बई सीईएसएटी ने एक बार राजस्थान रॉयल्स के पूर्व खिलाड़ी स्वप्निल असनोदकर को यह कहकर राहत दी थी कि ब्रांड प्रचार शुल्क पर कोई सेवा कर नहीं लगाया जाता है। सन् 2008 से सन् 2012 की अवधि के लिए, उन्हें फ्रेंचाइजी मालिकों के साथ किये गये एक समझौते के तहत 1.12 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई थी।