कम हो रहा बड़े स्टूडियो, मल्टीप्लेक्स और सिनेमाघरों का क्रेज

भारत में जबसे स्ट्रीमिंग सेवाओं की शुरुआत हुई, तबसे यह चर्चा होने लगी है कि क्या इससे बड़े स्टूडियो, सिंगल स्क्रीन वाले सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स का क्रेज कम होने का डर निर्माताओं को सताने लगा है? इससे इनके कारोबार को बड़े पैमाने पर प्रभावित होने की आशंका है। ऐसी किसी स्थिति को लेकर मामले के दिग्गज नील आर्डेन कहते हैं कि स्ट्रीमिंग सेवाएँ धीरे-धीरे बड़े स्टूडियो की उम्मीद को घटाएँगी, साथ ही इससे छोटे िफल्म निर्माताओं को फायदा होगा। इसी विश्लेषण पर आधारित सनी शर्मा की रिपोर्ट :

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26 नवंबर, 2019 को इंटरनेशनल िफल्म फेस्टिवल-2019 में शिरकत करने पहुँचे डैनिश िफल्म ‘डैनियल’ के निर्देशक नील आर्डेन ओप्ले मानते हैं कि स्ट्रीमिंग से जहाँ बड़े स्टूडियो प्रभावित हुए हैं, वहीं इसी दौरान स्थानीय िफल्म निर्माण की लागत भी बढ़ गयी है। आर्डेन कहते हैं कि अमेरिकी िफल्में बड़े स्टूडियो के बैनर तले बनायी जाती हैं; जबकि यूरोप में िफल्म निर्माण स्वतंत्र रूप से किया जाता है। भारतीय िफल्में अमेरिका की तरह ही बनायी जाती हैं और यह यूरोप की तरह आगे बढ़ रहा है, जिसमें िफल्म का निर्माण लॉस एंजिल्स में किया जाता है। यूरोपीय िफल्में छोटी-सी जगह पर िफल्माई जाती हैं और ये मध्यम बजट की होती हैं। और कभी-कभी िफल्म निर्माताओं को इसके लिए सरकारी मदद की ज़रूरत पर निर्भर रहना होता है।

हाल ही में 2019 की रिपोर्ट में लॉबी ग्रुप फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) और कंसल्टिंग फर्म ईवाई में कहा गया है कि मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में साल-दर-साल 13.4 फीसदी की दर से वृद्धि हो ही है और यह 2018 में 1.67 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगा। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म 42 फीसदी की गति से बढ़कर इसी दौरान 16,900 करोड़ का हो गया।  भारत में मीडिया और मनोरंजन जगत का क्षेत्र 11.6 फीसदी की दर से 2021 तक 2.35 ट्रिलियन डॉलर को पार कर जाने का अनुमान है। ए. बिलियन स्क्रीन्स ऑफ अपॉर्चुनिटी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि िफल्म और मनोरंजन के साथ ही डिजिटल की रफ्तार 2019 में तेज़ी से रही है साथ ही प्रिंट में भी 2021 तक पर्याप्त अवसर हैं। 57 करोड़ यूजर के साथ ही चीन के बाद भारत में इंटरनेट यूज करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। इसके 2021 तक 13 फीसदी सालाना की दर से बढऩे का अनुामन है। रिपोर्ट में बताया है कि सिर्फ 25 लाख उपभोक्ता ही डिजिटल हैं, जो पारम्परिक मीडिया का उपयोग नहीं करते। डिजिटल विज्ञापन पर खर्च 34 फीसदी की दर से बढ़कर 15,400 करोड़ रुपये हो गया, जो बाज़ार के विज्ञापन का करीब 21 फीसदी है। कई प्रसारकों ने अब प्रचार या विज्ञापन को बढ़ावा देने के लिए हर स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म को ब्रांड के तौर पर मान्यता देना शुरू कर दिया है। जहाँ तक विभिन्न वीडियो-ऑन-डिमांड सेवाओं की बात करें, तो इसमें विज्ञापन बढऩे की गति सब्सक्रिप्शन के बढऩे के साथ होती है और 2021 तक इसके कुल विज्ञापनों में से 52 फीसदी होने का अनुमान है।

2018 में डिजिटल सब्सक्रिप्शन 262 फीसदी बढ़कर 1,400 करोड़ रुपये तक पहुँच गया, इसकी अहम वजह रही दूरसंचार कम्पनियों ने अपना दायरा बढ़ाने के लिए सस्ते में डाटा पैक उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराये। वीडियो सब्सक्रिप्शन का राजस्व 2018 में बढ़कर 1340 करोड़ हो गया। इस दौरान स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर नये और दोबारा से वीडियो लॉन्च किये गये साथ ही इस दौरान स्मार्ट फोन भी खूब बिके, ब्रॉडबैंड का विस्तार हुआ। इसके अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में लोगों को एक्सक्लूसिव जानकारी के साथ ही लाइव क्रिकेट व अन्य प्रभावी मसाला लोगों को मिला। ईवाई इंडिया के पार्टनर और मीडिया एंड एंटरटेनमेंट के लीडर आशीष फेरवानी कहते हैं- ‘मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र भारत के युवाओं के लिए कई अवसर मुहैया करा रहा है। डिजिटल के क्षेत्र में लोगों को उन्हीं की स्थानीय भाषा में मनपसन्द सामग्री मिलने से इसका तेज़ी से विस्तार हुआ है। इससे बड़ी आसानी से अपनी बात को दूसरे तक पहुँचाने में मदद करता है, साथ ही लोगों तक पहुँच और उनके व्यवहार को जानने में कारगर साबित हो रहा है।’

संयुक्त रिपोर्ट बताती है कि 2018 में टीवी उद्योग 66,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 74,000 करोड़ रुपये का हो गया। आगे 12 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2021 तक इसके 95,500 करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान है। इसमें विज्ञापन दर की बढ़ोतरी 10 फीसदी और सब्सक्रिप्शन की वृद्धि 8 फीसदी होगी। इसी तरह टीवी विज्ञापन 14 फीसदी की दर से बढ़कर 30,500 करोड़ रुपये का हो गया। पिछले साल सब्सक्रिप्शन 11 फीसदी की दर से बढ़कर 43,500 करोड़ रुपये का हो गया। 2016 में 7.5 फीसदी की दर टेलीविजन देखने वाले घरों में बढ़ोतरी दर्ज की गयी और यह करीब 20 करोड़ हो गयी। टेलीविजन पर 77 फीसदी समय लोग आमतौर पर मनोरंजन या िफल्म देखने के लिए खर्च करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नये ट्राई टैरिफ का फरमान आने के बाद लोग अपने मनपसन्द के चैनल चुनकर उन्हीं का भुगतान कर सकते हैं; लेकिन इसके लिए भी एकमुश्त रकम देनी होती है। इसमें से कई चैनल मुफ्त में भी उपलब्ध कराये जाते हैं। इससे लोगों की जेबों पर बोझ बढ़ा, तो कम्पनियों की जेब गरम होने के साथ ही सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी हुई है। 2017 में डिजिटल समाचार उपभोक्ताओं में 26 फीसदी की वृद्धि देखी गयी, जब 22.2  करोड़ लोगों ने ऑनलाइन समाचार पत्र पढ़े। 2017 में पेज पढ़े जाने की वृद्धि 59 प्रतिशत रही और 2018 में प्रतिदिन औसतन लगभग 100 फीसदी लोगों ने औसतन 8 मिनट का समय दिया। विज्ञापन राजस्व 21,700 करोड़ रुपये रहा और 1.2 प्रतिशत बढ़कर 30 8,830 करोड़ हो गया। कुल मिलाकर भारतीय िफल्म सेगमेंट 2018 में 12.2 फीसदी की वृद्धि के साथ बढ़कर 174.5 अरब रुपये तक पहुँच गया। इसमें डिजिटल अधिकार और वैश्विक नाट्यशास्त्र में वृद्धि से प्रेरित है। घरेलू िफल्म की कमाई हिन्दी िफल्मों का नेट बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 32.5 अरब रुपये रहा, जो अब तक के इतिहास में सबसे ज़्यादा है। कुल मिलाकर थिएटर के ज़रिये कमाई की बात करें तो यह 2017 में 25 अरब रुपये से बढ़कर 30 अरब रुपये हो गयी। खास बात यह रही कि भारतीय िफल्मों के लिए चीन एक बड़ा बाज़ार बन गया।

भारत में हॉलीवुड िफल्मों के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें, तो एवेंजर्स : इंफिनिटी वॉर इमर्जिंग ने सबसे ज़्यादा 9.21 अरब रुपये कमाये। फिक्की के उपाध्यक्ष व मीडिया और मनोरंजन प्रभाग के अध्यक्ष उदय शंकर कहते हैं- ‘भारतीय मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र तेज़ी से आगे बढ़ चुका है। डिजिटल व्यवधानों से इसमें बिखराव नज़र आ रहा है, जिसकी वह से रचनात्मक अर्थ-व्यवस्था में अनिश्चितता की स्थिति बन गयी, जो पहले कभी नहीं रही। ये सभी के लिए रोमांचक समय है, जब हम अपनी कल्पना और महत्त्वाकांक्षा को जता सकते हैं।’

नील आर्डेन ओप्ले, जिन्होंने अपनी िफल्म डैनियल के बारे में कहा कि भारत में बड़े स्टूडियो में हिट होगी। हालाँकि उनका मानना है कि अमेरिका पारम्परिक विदेशी िफल्मों के लिए अच्छा बाज़ार नहीं है। डैनियल की कहानी हाल के दिनों में अपहरण से जुड़ी है। नायक युवा डैनिश फोटो जर्नलिस्ट डैनियल राई हैं, जिसे अमेरिकी पत्रकार जेम्स फोले सहित कई अन्य विदेशी नागरिकों के साथ आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट द्वारा सीरिया में 398 दिनों के लिए बन्धक बनाकर रखा गया था। िफल्म कैद में रहने के लिए डैनियल के संघर्ष की गाथा है, जेम्स के साथ उसकी दोस्ती और डेनमार्क में राई परिवार के लिए बुरे सपने के रूप में इस खौफ में गुज़रता है कि अब वे अपने बेटे को •िान्दा नहीं देख सकते। ओप्ले ने कहा कि वितरकों के लिए विदेशी िफल्म खरीदना जोखिम भरा रहता है। यूरोपीय िफल्म निर्माता चीनी बाज़ार को टैप करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुरस्कार ओवर-रेटेड होते हैं; लेकिन वे विदेशों में िफल्म बनाने की कोशिश में मदद करते हैं। इतालवी िफल्म रवांडा के निर्देशक रिकोडार्डो साल्वेटी जो आईसीएफटी-यूनेस्को गाँधी मेडल की दौड़ में है। कहते हैं कि हमारी िफल्म सच्ची घटना पर आधारित है। चूँकि यह एक अफ्रीकी केंद्रित िफल्म है, इसलिए इसमें किसी की दिलचस्पी नहीं थी और हमें अपने देश में ही इसके लिए बड़े विरोध का सामना करना पड़ा।

कम बजट के कारण हमने इटली में अपने घर के पास शूटिंग की। हालाँकि वह स्थान बिलकुल वैसा नहीं था, जहाँ रवांडा के लोग रहते हैं; इसलिए लोगों ने सोचा कि हम रवांडा के हैं। उन्होंने कहा कि हम इस िफल्म को नेटलिक्स पर डालने की कोशिश कर रहे हैं और ऑनलाइन अनुरोध के आधार पर स्क्रीनिंग की भी व्यवस्था कर रहे हैं। यह एक बार फिर स्ट्रीमिंग की ताकत झलकती है, जो बड़े मल्टीप्लेक्स, सिनेमा घरों और स्टूडियो के कारोबार को प्रभावित कर रहा है या लोगों के लिए नया विकल्प बन गया है।