कमल में कीचड़

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आरोपों के धेरे में पूर्व वित्त मंत्री राघवजी मीडियाकर्मियों से घिरे हुए, फोटो: प्रतुल दीक्षित
आरोपों के धेरे में पूर्व वित्त मंत्री राघवजी मीडियाकर्मियों से घिरे हुए, फोटो: प्रतुल दीक्षित

मध्य प्रदेश में गर्मियों के दिनों तक ठंडा रहा सियासत का पारा अचानक ऊपर चढ़ता जा रहा है. एक युवक के साथ यौन उत्पीड़न का मामला सामने आने के बाद प्रदेश के वित्त मंत्री राघवजी भाई सावला इस्तीफा दे चुके हैं. उनकी गिरफ्तारी भी हो चुकी है. लेकिन  इस घटना की सेक्स सीडी से आया सियासी भूचाल इतनी जल्दी शांत होता नहीं दिख रहा. मप्र में इस साल होने वाला विधानसभा का चुनाव सिर पर है और इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनआशीर्वाद यात्रा की तैयारी कर ली थी. किंतु ऐन मौके पर राघवजी द्वारा एक युवक से दुष्कर्म का मामला जगजाहिर हो गया. फिर जिस तरीके से पार्टी संगठन के अहम ओहदे पर बैठे प्रदेश संगठन महामंत्री अरविंद मेनन के एक महिला के साथ यौनाचार के मामले की दोबारा राज्य में चर्चा शुरू हुई उसने चौहान के मंसूबों पर पानी फेर दिया. भाजपा की यात्रा शुरू तो हुई लेकिन एक रक्षात्मक रवैये के साथ.

बीते कुछ सालों में एक के बाद एक उजागर हुए भाजपा नेताओं के सेक्स स्कैंडलों ने मप्र की सियासत की रंगत बदल दी है. यही वजह है कि चुनाव के ठीक पहले अब जबकि कई और सेक्स सीडियों की चर्चा जोरों पर है तो भाजपा में हड़कंप मचा है. पार्टी के कई दिग्गज नेताओं की नींद उड़ी हुई है. हालांकि इसी कड़ी में राघवजी का ताजा सेक्स स्कैंडल बाकियों से काफी अलग है. सरकार के किसी मंत्री द्वारा अप्राकृतिक यौन संबंधों की सेक्स सीडी आने का अपनी तरह का यह पहला मामला है. राघवजी पर आरोप लगाने वाले राजकुमार दांगी का कहना है कि वह तीन साल से उनके चार इमली स्थित बंगले पर रह रहा था. पूर्व वित्त मंत्री सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर उसके साथ लगातार कुकर्म करते रहे. वह हर दुष्कर्म के बाद ग्लानि से भर जाता था. लेकिन अपने परिवार की गरीबी और राघवजी के रुतबे के चलते सब कुछ सहता रहा. बकौल दांगी, ‘एक दिन मैंने तय किया कि अब शोषण नहीं सहूंगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करूंगा.’ अपनी बात को सच साबित करने के लिए दांगी ने अपने दोस्त घनश्याम कुशवाहा के साथ मिलकर राघवजी द्वारा उसके साथ किए जा रहे अप्राकृतिक कृत्य की मोबाइल रिकॉर्डिंग कर ली. घनश्याम राघवजी के यहां चपरासी है. उसने पुलिस में शपथपत्र देकर राघवजी पर राजकुमार के साथ अप्राकृतिक यौनाचार का आरोप लगाया है. तहलका के सूत्र बताते हैं कि करीब दो साल पहले भी राघवजी की एक और सेक्स सीडी सामने आई थी और सरकार को इसकी जानकारी थी. लेकिन तब कोई शिकायतकर्ता सामने न आ पाने के चलते वे बच गए. इस सीडी में कथित तौर पर उनके साथ एक महिला को दिख रही थी.

जहां तक इस ताजा सीडी की बात है तो इसके बारे में भी कहा जा रहा है कि यह 4 जून यानी सार्वजनिक होने की तारीख के एक दिन पहले सरकार के पास पहुंच गई थी. उस दिन प्रदेश भाजपा कार्यालय में मुख्यमंत्री की जनआशीर्वाद यात्रा की बैठक चल रही थी. इसमें पार्टी के तमाम बड़े नेताओं के साथ राघवजी भी उपस्थित थे. रात में पार्टी के एक आला नेता ने जब सीडी का संदर्भ बताते हुए उनसे इस्तीफा देने की बात की तो वे नाराज हो गए और बैठक छोड़कर चले गए. लेकिन अगली सुबह घटनाक्रम ऐसा घूमा कि 79 साल के इस नेता का 46 साल लंबा शिखरनुमा सियासी करियर देखते ही देखते ताश के पत्तों की तरह बिखर गया. सुबह करीब 10 बजे राजकुमार दांगी हबीबगंज (भोपाल) थाने पहुंचा और उसके चार घंटे बाद ही राघवजी को इस्तीफा देना पड़ा. सूत्र बताते हैं कि यह अश्लील सीडी मुख्यमंत्री तक पहले ही पहुंच चुकी थी. राज्य सरकार के खुफिया तंत्र ने बता दिया था कि सीडी कांग्रेस के पास भी पहुंच गई है और वह विधानसभा के मानसून सत्र में बड़ा धमाका करने जा रही है. ऐसी नौबत से बचने के लिए मुख्यमंत्री ने हर संभव कोशिश की. राघवजी से इस्तीफा लेने के बाद उन्होंने मंत्रियों में फैली बेचैनी को शांत करने के लिए अपने आवास पर एक मीटिंग रखी. मुख्यमंत्री ने उन्हें यह समझाने की कोशिश की कि अब राघवजी चैप्टर खत्म हो चुका है और वे इसकी चिंता करने के बजाय कांग्रेस के विधानसभा में उठाए जाने वाले सवालों का मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी करें.

लेकिन भाजपा के असंतुष्ट नेता और राज्य वन विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष शिवशंकर पटेरिया ने जब राघवजी की सीडी के पर्दाफाश का जिम्मा लेते हुए ऐसी 22 सीडी होने का दावा किया तो भाजपा का संकट गहरा गया. अफरा-तफरी के इस माहौल में प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने घर (भाजपा) की सफाई का दावा करने वाले पटेरिया को भी पार्टी से निकाल दिया. वहीं इस पूरे प्रकरण में राघवजी को लगता है कि वे एक जनाधार वाले नेता हैं और इसीलिए इस तरह की साजिश रची गई है. वे कहते हैं, ‘पटेरिया तो सौदेबाज है. उसके पीछे पार्टी या उसके बाहर की किसी बड़ी ताकत का हाथ हो सकता है.’

[box]2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला ने भाजपा कार्यालय के सामने धरना दिया था[/box]

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