इरफ़ान पठान का सन्यास

0
644

एक बेहतरीन ऑल राउंडर इरफ़ान पठान ने शनिवार को क्रिकेट के तीनों फार्मेट से संन्यास का ऐलान कर दिया। अपनी स्विंग गेंदबाजी से दुनिया के किसी भी बल्लेबाज को परेशान करने की क्षमता रखने वाले इरफ़ान को जब टीम से बाहर  किया गया, उनमें तब काफी क्रिकेट बाकी थी। बहुत से जानकारों को लगता कि उन्हें उचित अवसर नहीं दिए गए। आजकल पठान कमेंट्री में व्यस्त दिखते हैं।

इरफ़ान कितने बेहतर और उपयोगी क्रिकेटर थे यह इस बात से साबित हो जाता है कि महज २९ टेस्ट मैचों में उन्होंने ३१.५७ की औसत से एक शतक सहित ११०५ रन बनाए, जबकि गेंदबाजी में १०० विकेट भी लिए। वे कितने बेहतरीन बॉलर थे यह इस बात से साबित हो जाता है कि महज २९ टेस्ट में उन्होंने दो बार १० या उससे अधिक विकेट जबकि ७ बार ५ विकेट लिए।

यही नहीं वनडे में इस बेहतरीन ऑलराउंडर ने १२० मैच खेले और १५४४ रन बनाए जिनमें पांच अर्धशतक हैं। बॉलिंग में इरफ़ान ने १७३ विकेट लिए। रिटायरमेंट की घोषणा करते हुए इरफान भावुक दिखे और कहा  – ”मैं उस खेल को ऑफिशियली  छोड़ रहा हूं, जो मुझे सबसे अधिक प्यारा है।”

बहुत से क्रिकेट जानकार इरफ़ान को ”किंग आफ स्विंग” कहते थे। उनका कहना था कि अपने दिन में इरफ़ान दुनिया के किसी भी बल्लेबाज की गिल्लियां बिखेरने की क्षमता रखते थे। रिटायरमेंट का ऐलान करते हुए भावुक इरफ़ान पठान ने कहा कि वे  सभी तरह की क्रिकेट से संन्यास ले रहे हैं।

संन्यास का ऐलान करते हुए पठान ने कहा – ”यह मेरे लिए भावुक पल है, लेकिन यह पल हर खिलाड़ी की जिंदगी में आता है। मैं छोटी जगह से हूं और मुझे सचिन तेंडुलकर और सौरभ गांगुली जैसे महान खिलाड़ियों के साथ खेलने का अवसर  मिला, जिसकी हर  खिलाड़ी को तमन्ना होती है।”

पठान ने टीम के तमाम सदस्यों, कोच, स्पोर्ट स्टाफ और प्रशंसकों का आभार जताया। इरफान ने कहा कि जिंदगी का सबसे खास लम्हा था जब भारतीय टीम की कैप मिली। ”मैं क्या कोई भी क्रिकेटर उस लम्हे को नहीं भूल सकता, जब वह अपने देश का प्रतिनिधित्व करता है।”

इरफ़ान का खराब वक्त २०११-१२ में दिखा। ऑफ फॉर्म इरफ़ान को टीम इंडिया से बाहर कर दिया गया। उन्होंने अपना आखिरी इंटरनैशनल मैच दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अक्टूबर, २०१२ में खेला जो टी-२० मैच था। वे भारतीय टीम के सबसे लोकप्रिय खिलाड़ियों में  दर्शक उन्हें बहुत पसंद करते रहे। एक मौके पर उनकी बेहतरीन बल्लेबाजी देख उन्हें भारतीय तीन ने ओपनिंग भी करवाई और उन्होंने कप्तान को निराश नहीं किया। उनके संन्यास से देश का एक उम्दा खिलाड़ी परिदृश्य से बाहर हो गया है, हालांकि संभावना है कि वे कमेंट्री करते रहेंगे।