आत्मघात का कारण बन रहा कोरोना वायरस

 

बाहर से ख़ुशहाल नज़र आते परिवार क्या वाक़ई ख़ुशहाल होते हैं? जयपुर में जाने-माने सर्राफ़ा व्यवसायी यशवंत सोनी ने जिस तरह पत्नी और दो बेटों के साथ आत्मघात किया, उसने तो यह भ्रम तोड़ दिया है। सन्न कर देने वाली यह घटना जामडोली के राधिका विहार में हुई। यशवंत के आत्महत्या लेख (सुसाइड नोट) पर भरोसा करें, तो मामला क़र्ज़ का सामने आया। इसमें लिखा है- ‘क़र्ज़ के भँवर में फँसने के बाद कोई और राह बची ही नहीं थी। जिनसे पैसा लेना है, वे दे नहीं रहे और जिन्हें देना है, वे भरोसा करने की बजाय जलील कर रहे हैं।’
लेकिन घटनास्थल का नज़ारा तो कई सवाल खड़े कर रहा था। अगर यह पारिवारिक आत्मघात था, तो ‘फंदे से लटके मिले दोनों बेटों के पैर क्यों बँधे हुए थे? पत्नी ममता सोनी की आँख पर पट्टी क्यों बँधी हुई थी? यशवंत के कारोबारी परिचितों का मानना है कि यशवंत सोनी काफ़ी समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। क़र्ज़ में गले-गले तक डूबे यशवंत को जब सभी रास्ते बन्द दिखायी दिये, तो उसने रूह को कँपा देने वाला यह क़दम उठाया। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (जयपुर पूर्व) मनोज वाजपेयी का मानना है कि यशवंत ने पहले अपनी पत्नी और बेटों को फंदे पर लटकाया होगा, फिर अपनी जान दे बैठा। सूत्रों का कहना है कि यशवंत का मकान ही एक करोड़ से ज्यादा का था। चाहता तो प्रॉपर्टी बेचकर क़र्ज़ चुका सकता था। आख़िर मौत के दर्द से बड़ा तो नहीं था, क़र्ज़ का बोझ।