आडवाणी से मिलीं, सोनिया और केजरीवाल से मिलेंगी ममता

पाँव छुए आडवाणी के ममता ने, एनआरसी के बहाने विपक्षी एकता की कवायद में हैं जुटीं

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असम में नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) की सूची में ४० लाख लोगों के भारतीय नागरिक न होने के दावे के वाद सक्रिय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हो गयी हैं। वे पहले ही इस मामले में गृह युद्ध छिड़ने का खतरा बता कर इसका मुखर विरोध कर चुकी हैं। अब ममता आज यानी बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से भी मिलेंगी जबकि वे पहले ही राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता शरद पवार से मिल चुकी हैं।

ममता दिल्ली पहुँच चुकी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ममता जब संसद परिसर में थीं तो उन्होंने भाजपा मार्गदर्शक मंडल के सदस्य पूर्व उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी के पाँव छुए और उनसे बातचीत की। वे आडवाणी से उनके संसद भवन के कमरा नंबर ४ में मिलीं और करीब १५ मिनट उनके साथ रहीं।

ममता इस बहाने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश करती दिख रही हैं। आज राज्य सभा और लोक सभा दोनों में इस मसले पर खूब हंगामा हुआ है। लोक सभा हंगामे के बाद १२ बजे तक स्थगित की गयी। उधर ममता अब यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी से मुलाकात करेंगी। दिलचस्प यह है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इस मसले पर ममता बनर्जी के साथ दिख रहे हैं। केजरीवाल के आज शाम ममता से मिलने की सम्भावना है।

पिछले कुछ महीनों से विपक्षी एकता की कोशिशों के बीच नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) की सूची एक बड़ा मुद्दा बन गया है। केजरीवाल और ममता की आज की संभावित  मुलाकात राजनीतिक हलकों में तीसरे मोर्चे के गठन की गंभीर कोशिश मानी जा रही है। सम्भावना है कि इस मुलाकात में दोनों नेता राजनीतिक मसलों पर भी बात करेंगे। दरअसल लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष गंभीरता से एक होने की कोशिश में जुटा है ताकि भाजपा और मोदी के खिलाफ मजबूत साझा मोर्चा बनाया जा सके।

कुछ राजनीतिक हलकों में बेस स्तर पर यह चर्चा रही है कि राहुल गांधी दरअसल कांग्रेस को २०१९ नहीं अपितु २०२४ के लिए तैयार कर रहे हैं। ऐसे दूसरे दलों के बड़े नेता, जिनमें ममता भी शामिल हैं, अपने लिए पीएम पद की संभावनाएं देख रहे हैं। ममता एनसीपी, शिवसेना, टीआरएस, टीडीपी, आरजेडी और सपा के नेताओं के भी संपर्क में हैं। उनके मुखर होने के पीछे बड़ा कारण एनआरसी के मसले पर कांग्रेस का मुखर न होना भी है।

उधर भाजपा अब असम के बाद पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों में भी एनआरसी की मांग करने लगी है जिससे यह मुद्दा पूरे देश में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। जबकि ममता का कहना है कि  ”आज असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर जो कुछ हो रहा है उसमें बंगाली लोग ही नहीं पिस रहे। इसमें अल्पसंख्यक, हिंदू, बिहारी सब को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 40 लाख से ज्यादा लोगों को आज अचानक उनके अपने ही देश में रिफ्यूजी बना दिया गया है जो एक बड़ी चिंता का विषय है।”