अबकी बार किसकी ललकार?

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फोटोः एएफपी
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लगभग 6 महीने के लंबे दौरे और विश्व कप में बढ़िया प्रदर्शन के बाद भी जब कप्तान धोनी झुके कंधे और थके साथियों के  साथ वतन वापस लौट रहे होंगे तब आईपीएल के क्रिकेट के कोलाहल ने शायद ही उन्हें चैन से सोने दिया होगा. विश्व कप के बीत जाने के एक हफ्ते के भीतर  ही आईपीएल का आगाज हो चुका है. कहनेवाले तो इसे क्रिकेट का ‘ओवरडोज’ भी बता रहे हैं जो खिलाड़यों को खुदा माने जानेवाले देश में खेल के खुमार को धीरे-धीरे कम कर देगा. हालांकि अथाह पैसे, रंगबिरंगी रोशनी, चमक-दमक, और चीयरलीडर्स के भड़कीले नाच के नीचे ये सारे सवाल फिलहाल दबे ही हुए हैं. नई उम्र के क्रिकेट के कद्रदान तो 8 अप्रैल से शुरू हो चुके आईपीएल के आठवें संस्करण को लेकर पहले की तरह ही रोमांचित हैं.

पिछले साल आईपीएल के आधे मैच को संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित किया गया था. इस बार ये पूरी तरह से भारतीय संस्करण होगा. आठवें आईपीएल में भी 8 टीमें ही एक-दूसरे के साथ खिताब के लिए होड़ कर रही हैं. लीग में किसी भी नई टीम को जगह नहीं दी गई है. देश में क्रिकट के संचालन की सबसे बड़ी संस्था बीसीसीआई की माने तो ऐसा फिक्सिंग और सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए किया गया है. हालांकि मैच या स्पॉट फिक्सिंग को लेकर अभी भी बीसीसीआई के पास कोई स्पष्ट नीति नहीं हैं. इसका जवाब उनके पास भी नहीं  है कि अगर कोई गेंदबाज लगातार ‘नो’ या ‘वाइड’ बॉल फेंकता है तो क्या वो अपने आप संदेह की सीमा में नहीं आ जाएगा?

सभी टीमों के सामंजस्य और संतुलन की बात करें तो बिना किसी विवाद के चेन्नई सुपरकिंग्स को सबसे ऊपर रखा जा सकता है. पिछले सात संस्करण में टीम के शानदार सफर से ये साबित भी होता है. महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली सुपरकिंग्स अबतक चार बार फाइनल में पहुंची है और दो बार खिताब  अपने नाम किया है. बाएं हाथ के विध्वंसक बल्लेबाज ब्रैंडन मैकुलम और कैरिबियाई ओपनर ड्वैन स्मिथ के तौर पर धोनी के पास सबसे शानदार सलामी जोड़ी है. मध्यक्रम में सुरेश रैना, डूप्लेसिस और खुद धोनी के तौर पर टीम के पास विशेषज्ञ बल्लेबाजों की ऐसी टोली है जो किसी भी गेंदबाजी आक्रमण की बखिया उधेड़ने का माद्दा रखती है. कई नाजुक मौकों पर टीम को एक धारदार तेज गेंदबाज की कमी अखरती जरूर होगी लेकिन ज्यादातर मौकों पर मध्यम तेज गेदबाज इसकी भरपाई करते रहे हैं.

अगर कागज पर टीम की ताकत को आंका जाए तो रॉयल चैलेंजर्स बंगलुरु हमेशा मजबूत नजर आती है, लेकिन मैदान पर दबाव के दरम्यान बार-बार बिखरने की उसकी आदत उसे साउथ अफ्रीकी टीम के समकक्ष खड़ा कर देती है. टीम की कमान विराट कोहली के हाथों में है. उनकी अगुवाई में टीम ने 2009 और 2011 में खिताबी मुकाबला भी खेला. बावजूद इसके विजेता होने का सम्मान अभी उनके हाथ नहीं आया है. टीम के पास क्रिस गेल, एबी डिविलियर्स और डेरेन सैमी जैसे दमखमवाले बल्लेबाजों की कतार मौजूद है. पिछले साल इस सूची में युवराज सिंह भी शामिल हो गए थे. फिर भी टीम का प्रदर्शन औसत ही रहा. इस बार टीम ने ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क को अपने आक्रमण के बेड़े में शामिल किया है. विश्व कप में अपनी सटीक गेंदबाजी से सबसे सफल खिलाड़ी का तमगा हासिल करने वाले स्टार्क के आने से टीम की तंदरुस्ती में इजाफा होना तय है. हालांकि शुरुआती मैचों में वो उपलब्ध नहीं रहेंगे. ऐसे में टीम के आक्रमण की कमान वरुण एरोन और एडम मिलने के हाथों में है, जिनके पास यहां खुद को साबित करने का श्रेष्ठ मौका होगा.

स्पॉट फिक्सिंग को लेकर बीसीसीआई के पास कोई स्पष्ट नीति नहीं है. कोई गेंदबाज ‘नो’ या ‘वाइड’ बॉल फेंकता है तो क्या वो संदेह के घेरे में नहीं आ जाएगा?

साल 2008 में जब आईपीएल आरंभ हुआ था तब कोलकाता नाइट राइडर्स  एक कमजोर टीम आंकी गई थी. लेकिन जल्द ही गौतम गंभीर की कप्तानी में उसने एक जुझारु टीम की हैसियत हासिल कर ली. बिना किसी विस्फोटक विशेषण और सितारा खिलाड़ियों की कमी के बीच भी टीम ने 2012 और 2014 में आईपीएल का खिताब अपने नाम किया. रॉबिन उथप्पा, युसूफ पठान और मनीष पांडेय के तौर पर गंभीर के पास विपक्षी गेंदबाजों पर टूटकर पड़नेवाले बल्लेबाजों का विकल्प मौजूद है. गेंदबाजी में सुनील नरेन टीम के तुरुप के इक्के हैं. इस बार केसी करियप्पा अपने फिरकी के फंदे से आक्रमण को थोड़ी और धार दे रहे हैं. अपनी रहस्यमयी गेंदबाजी से बल्लेबाजों को बेदम करनेवाले करियप्पा पहले से ही चर्चा में हैं. अगर केकेआर अपनी क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन करती है तो इस बार भी खिताब की दौड़ से उसे दरकिनार नहीं किया जा सकता.

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