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अंसल भी क्या माल्या की राह पर?

अंसल एपीआई में काला धन कमाने की लालसा

कोलकाता और दिल्ली में ऐसी बोगस कंपनियों के खातों में करोड़ाें रुपए जमा कराए गए जिनकी कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं थी। कोलकाता की कंपनियों से दिल्ली की बोगस कंपनियों में चेक जाता था। इन कंपनियों के मालिक सुशील अंसल और प्रणव अंसल की पत्नियां कुसुम अंसल और शीतल अंसल क्रमशः थीं।

बोगस या बेनामी कंपनियां थीं प्राइम मैक्सी प्रमोशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, आर्चिड रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड, एम्बिएंस हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, पैलेस हाेस्टेल (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, बजरंग रिएल्टर्स, प्रा. लि., चंडी साफ्टवेयर प्रा. लि., प्लाजा साफ्टवेयर प्रा. लि., प्राइम गोल्फ हैकिंग्स प्रा. लि., सिंगा रियल एस्टेट प्रा. लि., स्टार ऑननेट, कॉम प्रा. लि., जूलियन इंफ्राकान प्रा. लि., ग्रीन पैक्स एस्टेट प्रा. लि., अंबा-भवानी प्रापर्टीज लि., बिजीव डेवलपर्स एंड प्रमोटर्स प्रा. लि., ब्लूबेल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि., बीजी एग्रीटेक, चिरंजीव इंवेस्टमेंट प्रा. लि., अनुपम थिएटर्स  एंड एक्जहीबिटर्स प्रा. लि., एमकेआर बिल्डवेल प्रा. लि., चंडी प्रोजेक्ट्स प्रा. लि., कैलिबर प्रापर्टीज प्रा. लि., मिड एड प्रोपर्टीज प्रा. लि., मिड एअर प्रापर्टीज प्रा. लि., बद्रीनाथ प्रापर्टीज प्रा. लि., अाार स्थिर हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन प्रा. लि.।

शेयरधारकों के साथ भी अंसल परिवार धोखाधड़ी करता रहा है। बड़ी तादाद में शेयर अंसल एपीआई के पास हैं जो पब्लिकली लिस्टेड है। अब ये अंसल एपीआई सब्सिडियरी कंपनियों के अधीन हो रही हैं। इन्हें कुसुम अंसल (सुशील अंसल की पत्नी) और शीतल अंसल (प्रणव अंसल की पत्नी) ही चला रही हैं साथ ही बेनामी कंपनियां भी। इन गतिविधियों की जानकारी सेबी को भी नहीं दी गई है और जो रुपए आए वे सुशील और प्रणव अंसल को बतौर कर्ज उनकी कंपनियों को दिए गए हैं।

छानबीन के दौरान ही पता चला कि व्यापारिक लेनदेन और धोखाधड़ी कथित तौर पर अंसल ही करते हैं। जबकि हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी डायरेक्टर होते हैं जो उन्हें किसी कानूनी पचड़े में पड़ने से बचाते हैं। अंसल एपीआई के दो वरिष्ठ अधिकारी निदेशक होते हैं समूह से जुड़ी कम से कम एक दर्जन कंपनियाें के।

पूरे देश में कई सौ एफआईआर, अंसल एपीआई या इसकी सब्सिडियरी कंपनियों के खिलाफ दर्ज हैं लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। एफआईआर मुख्यतः प्लाट बेचने, भूमि, अपार्टमेंट खरीददार को अधिकार न देने के विरोध में हैं। पालम कारपोरेट में 160 आवासीय यूनिट एक वाणिज्यिक लाइसेंस के तहत बेच दिया गया। मल्बरी होम्स में 17 आवासीय प्लाट बिके जबकि वहां कंपनी की आज की तारीख में भी जमीन नहीं है।

कैसे अंसल एपीआई शेयरहोल्डर्स और आयकर अधिकारियों को धोखा देते हैं उसका एक उदाहरण यूपी प्रोजेक्ट्स 2011-12 का एक मामला है। इसमें 11.24 करोड़ रुपए बतौर लाभ लिए बताए गए थे जबकि वास्तविक लाभ 125.62 करोड़ था। इसमंे 65.34 करोड़ का घाटा सुशांत गोल्फ सिटी प्रोजेक्ट में दिखाया गया जबकि 46.07 करोड़ का घाटा इसकी पुरानी कंपनी के नाम प्लाटों पर दिखाया गया। इसी तरह रुपए 13.76 करोड़ का घाटा पैरेंट सिटी में  बनी इकाइयों में दिखाया गया और रुपए 5.53 करोड़ का घाटा सेलेब्रिटी गार्डेंस कांप्लेक्स में बताया गया।

पड़ताल मंे ही पता चला है कि सौ करोड़ से भी ज्यादा की राशि धोखाधड़ी का एक और नमूना है जो चिरंजीव चैरिटेबिल ट्रस्ट, सुशील अंसल फाउंडेशन और कुसुमांजलि फाउंडेशन में दिखा दी गई।

उप्र सरकार से हुए करार के अनुसार पंाच हजार इकाइयाें को एफोर्डेबल हाउसिंग योजना के तहत आर्थिक ताैर पर कमजोर वर्गों के लिए लखनऊ में और ऐसी ही दो हजार इकाइयां अंसल एपीआई के अपने प्रोजेक्ट के तहत दादरी, आगरा, मेरठ और गाजियाबाद में बनानी थीं। सरकार की नीति के अनुसार दस फीसद (312 इकाइयां) और निम्न आय वर्ग के लिए दस फीसद (330 इकाइयां) बननी तय पाई थीं जो लखनऊ प्रोजेक्ट के तहत बिकीं भी। लेकिन इनमें एक भी खरीदार एक भी इकाई को अपना नहीं बताता क्योंकि यह पूरी धोखाधड़ी थी जो सरकार और पूंजी-निवेशकों की ओर से की गई।

गुड़गांव के वन क्षेत्र में अरावली फार्म्स हैं। अंसल एपीआई ने गैरकानूनी तौर पर सौ से ज्यादा फार्म वहां बेच लिए। सौ से ज्यादा एफआईआर दर्ज हैं लेकिन पुलिस ही जानती है कि वह अंसल पर कार्रवाई क्यों नहीं करती।

बेनामी संपत्ति मसलन जंतर मंतर रोड धवनदीप और हेली रोड पर उपासना की बेनामी संपत्तियों में हैं। यहां नकद में हुए लेन-देन के कागजात हैं।

गुड़गांव के वन क्षेत्र में अरावली फार्म्स हैं। अंसल एपीआई ने गैरकानूनी तौर पर सौ से ज्यादा फार्म वहां बेच लिए। सौ से ज्यादा एफआईआर दर्ज हैं लेकिन पुलिस ही जानती है कि वह अंसल पर कार्रवाई क्यों नहीं करती।

सरकार के पास इस मामले की पड़ताल के लिए शिकायतें हैं। वह अपनी विभिन्न एजेंसियों को जांच के लिए हरी झंडी दिखा सकती है। यह प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के लिए भी एक ऐसा महत्वपूर्ण मामला होगा जिसकी जांच काले धन की परतों को काफी कम करेगी।

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(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 8 Issue 23, Dated 15 December 2016)

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