नई दिल्ली: बीजिंग में हुई अहम बैठक के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका को ताइवान मुद्दे पर गंभीर संदेश दिया। सरकारी मीडिया के मुताबिक, शी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि ताइवान को लेकर बढ़ते मतभेद दोनों देशों के रिश्तों को खतरनाक मोड़ तक ले जा सकते हैं।
करीब दो घंटे चली इस बंद कमरे की बैठक में दोनों नेताओं ने कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान ताइवान को लेकर हुई बातचीत पर रहा। चीन लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान को लेकर लगातार समर्थन जताता रहा है। यही वजह है कि यह मुद्दा दोनों देशों के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजह बन चुका है।
बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि अगर ताइवान के मामले को समझदारी और संतुलन के साथ संभाला गया, तो अमेरिका और चीन के रिश्ते स्थिर रह सकते हैं। लेकिन अगर हालात बिगड़े, तो दोनों देशों के बीच टकराव और यहां तक कि संघर्ष की नौबत भी आ सकती है। चीन की तरफ से आया यह बयान काफी सख्त माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ताइवान केवल एक द्वीप का मामला नहीं है, बल्कि यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। अमेरिका इस इलाके में अपने प्रभाव को बनाए रखना चाहता है, जबकि चीन ताइवान पर अपना दावा मजबूत करने में लगा है।
हाल के महीनों में चीन ने ताइवान के आसपास सैन्य गतिविधियां भी बढ़ाई हैं। दूसरी तरफ अमेरिका लगातार ताइवान को समर्थन और रक्षा सहयोग देता रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय बढ़ता नजर आ रहा है।
हालांकि बैठक के बाद दोनों देशों की तरफ से बातचीत जारी रखने की बात कही गई है, लेकिन शी जिनपिंग की चेतावनी ने साफ कर दिया है कि ताइवान का मुद्दा आने वाले समय में अमेरिका और चीन के रिश्तों के लिए सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण विषय बना रह सकता है।




