नई दिल्ली: Strait of Hormuz एक ऐसा समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होकर गुजरता है। यही वजह है कि इस पर नियंत्रण को लेकर हमेशा से तनाव बना रहता है। हाल ही में Iran ने इस पूरे इलाके पर अपना दावा मजबूत किया है और यहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की बात भी कही है।
हालांकि, यह मामला इतना सीधा नहीं है। हॉर्मुज के एक तरफ ईरान है, तो दूसरी तरफ Oman और United Arab Emirates जैसे देश हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर समंदर में किसकी सीमा कहां तक है।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार कोई भी देश अपनी तटरेखा से 12 समुद्री मील तक ही अपने समुद्री क्षेत्र पर अधिकार रखता है। इसी नियम के आधार पर ईरान, ओमान और यूएई तीनों ही अपने-अपने हिस्से का दावा करते हैं।
हॉर्मुज की कुल चौड़ाई करीब 50 किलोमीटर है, लेकिन जहां से जहाज गुजरते हैं, वह हिस्सा काफी संकरा है। खास बात यह है कि जहाजों के लिए सबसे सुरक्षित और गहरा रास्ता ओमान के क्षेत्रीय जल में आता है। इस वजह से ओमान खुद को इस इलाके का “गेटकीपर” भी मानता है।
वहीं यूएई का तट सीधे इस संकरे हिस्से से नहीं जुड़ता, लेकिन उसकी समुद्री सीमाएं ईरान और ओमान से मिलती हैं। इसके अलावा कुछ द्वीपों को लेकर ईरान और यूएई के बीच पुराना विवाद भी है, जो इस इलाके की जटिलता को और बढ़ाता है।
ईरान और ओमान के बीच कई जगहों पर दूरी कम होने की वजह से “मीडियन लाइन” का सिद्धांत लागू होता है। यानी समुद्र के बीच एक काल्पनिक रेखा खींच दी जाती है, जिसके आधार पर दोनों देशों के अधिकार तय होते हैं।
सबसे अहम बात यह है कि हॉर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य है, इसलिए कोई भी देश यहां से गुजरने वाले जहाजों को पूरी तरह रोक नहीं सकता।
हॉर्मुज पर किसी एक देश का पूरा नियंत्रण नहीं है। लेकिन ईरान के हालिया दावे ने इस संवेदनशील इलाके में तनाव जरूर बढ़ा दिया है, जिसका असर वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई पर भी पड़ सकता है।




