नई दिल्ली: West Bengal विधानसभा चुनाव में All India Trinamool Congress और Bharatiya Janata Party के बीच सियासी संग्राम तेज हो गया है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee अपनी जनसभाओं में तीन अहम मुद्दों—खान-पान की आज़ादी, आलू किसानों की समस्या और बाहरी वोटरों के आरोप—पर खास जोर दे रही हैं।
ममता बनर्जी अपनी रैलियों में लगातार कह रही हैं कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो लोगों के खान-पान पर रोक लग सकती है। उनका आरोप है कि अंडा, मछली और मांस जैसे खाने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। वह यह भी कहती हैं कि बीजेपी जिन राज्यों में सत्ता में है, वहां खाने-पीने को लेकर इसी तरह के नियम लागू हैं।
इसके साथ ही आलू का मुद्दा भी इस चुनाव में बड़ा बनकर सामने आया है। राज्य में इस साल आलू की बंपर पैदावार हुई है, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और किसानों व व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा। ममता बनर्जी ने किसानों को हुए नुकसान के लिए मुआवज़ा देने की बात कही है और दूसरे राज्यों में आलू की बिक्री पर लगी पाबंदियों में ढील देने का भी ऐलान किया है।
उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि अगर किसानों को मुआवज़ा चाहिए, तो उन्हें तृणमूल कांग्रेस का समर्थन करना होगा। राज्य में करीब 130 लाख टन आलू उत्पादन का अनुमान है, जिससे स्टॉक ज्यादा होने के कारण बिक्री में दिक्कतें आई हैं।
तीसरा बड़ा मुद्दा बाहरी वोटरों का है। ममता बनर्जी बीजेपी पर आरोप लगा रही हैं कि दूसरे राज्यों के लोगों को अवैध तरीके से मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप और साजिश बताया है।
ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया है कि बड़ी संख्या में फर्जी फॉर्म भरकर ऐसे लोगों को वोटर बनाने की कोशिश की जा रही है जो राज्य के निवासी नहीं हैं। इस मामले को लेकर उन्होंने चुनाव आयोग को भी पत्र लिखा है।
इन तीनों मुद्दों के जरिए ममता बनर्जी सीधे आम जनता से जुड़ने की कोशिश कर रही हैं। बंगाल चुनाव में अब यह देखना अहम होगा कि ये रणनीति वोटरों पर कितना असर डालती है।




