बंगाल में कांग्रेस का ‘एकला चलो’ दांव! राहुल की एंट्री से बदलेगा खेल या बढ़ेगा सियासी कन्फ्यूजन?

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में अब मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला लेकर सियासी समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं।

राहुल की बंगाल चुनाव में एंट्री से बदलेगा खेल या बढ़ेगा सियासी कन्फ्यूजन? - फोटो : एएनआई (फाइल)
राहुल की बंगाल चुनाव में एंट्री से बदलेगा खेल या बढ़ेगा सियासी कन्फ्यूजन? - फोटो : एएनआई (फाइल)

नई दिल्ली: West Bengal में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर इस बार नई तस्वीर बनती दिख रही है। कांग्रेस ने 284 उम्मीदवारों की सूची जारी कर साफ कर दिया है कि वह किसी गठबंधन के बजाय अकेले मैदान में उतरेगी। इस फैसले ने मुकाबले को सीधे TMC बनाम BJP से हटाकर त्रिकोणीय बना दिया है।

कांग्रेस के इस फैसले के पीछे बड़ा चेहरा Rahul Gandhi माने जा रहे हैं, जिनकी जल्द ही बंगाल में एंट्री और चुनाव प्रचार की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि वह खासतौर पर मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे इलाकों पर फोकस करेंगे, जहां कांग्रेस का पारंपरिक आधार रहा है।

दूसरी तरफ Mamata Banerjee की पार्टी TMC इस स्थिति को अपने लिए मौका भी मान रही है और चुनौती भी। अगर कांग्रेस एंटी-टीएमसी वोटों को बांटती है, तो इसका फायदा ममता बनर्जी को मिल सकता है। लेकिन अगर मुस्लिम और पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगती है, तो यह TMC के लिए परेशानी बन सकता है।

वहीं बीजेपी इस पूरे समीकरण को अपने हिसाब से देख रही है। पार्टी को उम्मीद है कि अगर विपक्षी वोट बंटे, तो उसका सीधा फायदा उसे मिलेगा। खासकर उन सीटों पर जहां मुकाबला कड़ा है, वहां वोटों का बंटवारा नतीजे बदल सकता है।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कांग्रेस का यह ‘एकला चलो’ दांव जोखिम भरा जरूर है, लेकिन इससे पार्टी को अपनी खोई जमीन वापस पाने का मौका भी मिलेगा। 2021 में बेहद कम वोट शेयर मिलने के बाद कांग्रेस इस बार खुद को फिर से मजबूत करने की कोशिश में है।

बंगाल की राजनीति अब पहले से ज्यादा पेचीदा हो गई है। कांग्रेस का अकेले लड़ना किसी एक पार्टी के लिए साफ फायदा या नुकसान नहीं, बल्कि हर सीट पर अलग-अलग असर डाल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राहुल गांधी का कैंपेन कितना असर डालता है और आखिरकार इस सियासी दांव से किसे असली फायदा मिलता है।