नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का बिगुल बज चुका है। Election Commission of India ने राज्य की 294 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम का ऐलान कर दिया है। इस बार चुनाव सिर्फ दो चरणों में कराए जाएंगे, जबकि पिछले चुनाव में यहां 8 चरणों में मतदान हुआ था। चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
घोषित कार्यक्रम के मुताबिक राज्य में पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल को होगी, जबकि दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को कराया जाएगा। इसके बाद 4 मई को मतगणना के साथ चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। कम चरणों में चुनाव होने से सभी राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति और प्रचार अभियान को तेजी से चलाना होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य में ममता बनर्जी करीब 15 साल से सत्ता में हैं, इसलिए स्वाभाविक रूप से एंटी-इंकम्बेंसी यानी सरकार के खिलाफ नाराजगी का मुद्दा भी चुनाव में देखने को मिल सकता है। हालांकि उनकी पार्टी All India Trinamool Congress (TMC) अभी भी राज्य में मजबूत मानी जाती है।
दूसरी तरफ Bharatiya Janata Party (BJP) भी इस चुनाव में पूरी ताकत से मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। पिछली बार भी बीजेपी ने बंगाल में आक्रामक चुनाव प्रचार किया था और इस बार भी पार्टी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल की राजनीति में मुकाबला एक बार फिर सीधा ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच ही देखने को मिल सकता है। हालांकि बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह मानी जाती है कि राज्य में उसके पास ममता बनर्जी के कद का कोई बड़ा स्थानीय चेहरा नहीं है।
फिलहाल चुनावी तारीखों के ऐलान के साथ ही बंगाल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि दो चरणों में होने वाला यह चुनाव किस पार्टी के लिए फायदेमंद साबित होता है और राज्य की सत्ता किसके हाथ में जाती है।




