ईरान- अमेरिकी युद्ध की आंच अब इंटरनेट तक, केबल कटी तो दुनिया भर में ‘डिजिटल ब्लैकआउट’ का खतरा

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इंटरनेट पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगा है। अगर समुद्र के नीचे बिछी केबल्स को नुकसान हुआ, तो पूरी दुनिया की कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है।

सबमरीन केबल्स के नुकसान से हो सकती है दुनिया की 95% इंटरनेट सप्लाई प्रभावित। (Image: Getty)
सबमरीन केबल्स के नुकसान से हो सकती है दुनिया की 95% इंटरनेट सप्लाई प्रभावित। (Image: Getty)

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब दुनिया के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है। Iran और United States के बीच टकराव का असर इंटरनेट सेवाओं पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समुद्र के नीचे बिछी सबमरीन केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

दरअसल, आज के समय में करीब 95 फीसदी इंटरनेट इन्हीं केबल्स के जरिए चलता है। ये केबल्स समुद्र के अंदर हजारों किलोमीटर तक फैली होती हैं और अलग-अलग देशों को जोड़ती हैं। अगर युद्ध के दौरान इन्हें निशाना बनाया गया, तो कई देशों में इंटरनेट या तो बेहद धीमा हो सकता है या पूरी तरह बंद भी हो सकता है।

इसका सबसे ज्यादा खतरा Strait of Hormuz और लाल सागर जैसे इलाकों में है। ये रूट एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व को जोड़ते हैं और यहां से दुनिया का बड़ा डेटा ट्रैफिक गुजरता है। अगर यहां कोई बड़ी घटना होती है, तो इसका असर सीधे बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट, ई-कॉमर्स और क्लाउड सेवाओं पर पड़ेगा।

इतना ही नहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर भी इंटरनेट पर निर्भर हैं। ऐसे में अगर केबल्स कट जाती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। कई बड़े प्रोजेक्ट, जैसे अंतरराष्ट्रीय केबल नेटवर्क, पहले ही असुरक्षा के कारण प्रभावित हो चुके हैं।

पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जब समुद्र के नीचे केबल्स कटने से इंटरनेट सेवाएं ठप हो गई थीं। इन्हें ठीक करने में कई हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है, क्योंकि समुद्र के अंदर मरम्मत करना बेहद मुश्किल होता है।

मौजूदा हालात से यह साफ है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की डिजिटल जिंदगी पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।