नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की 31 मार्च तक नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन से पहले ही सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में सक्रिय दो बड़े नक्सली नेता—कोसा सोडी उर्फ सुकरू और पापा राव ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इन दोनों पर कुल मिलाकर करीब 80 लाख रुपये का इनाम था और इन्हें संगठन के मजबूत स्तंभ माना जाता था।
इनका सरेंडर सिर्फ दो लोगों का आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि नक्सली नेटवर्क की बड़ी कमजोरी के तौर पर देखा जा रहा है। पापा राव लंबे समय से सक्रिय थे और कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहे थे। वहीं, कोसा सोडी भी माओवादी संगठन के अहम पद पर था। ऐसे में इन दोनों का हथियार डालना संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सुरक्षा बलों की बदली हुई रणनीति का बड़ा हाथ है। अब ऑपरेशन में ड्रोन और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे नक्सलियों के ठिकानों का पता लगाना आसान हो गया है। इसके साथ ही जंगलों में घेराबंदी इतनी सख्त हो गई है कि उन्हें खाने-पीने जैसी जरूरी चीजों की भी कमी होने लगी थी।
सूत्रों के मुताबिक, लगातार बढ़ते दबाव और मौत के डर ने इन नेताओं को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया। इतना ही नहीं, संगठन के अंदर भी अब दरारें दिखने लगी हैं। आपसी अविश्वास और विवाद के कारण कई कैडर खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
इस दौरान कई अन्य नक्सलियों ने भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने उनके लिए जंगलों में टिके रहना मुश्किल कर दिया है।




