तेहरान में यूनिवर्सिटी स्ट्रीट और जोम्हूरी इलाके में मिसाइलें गिरने की पुष्टि हुई है। शहर के कई हिस्सों में धुएं के गुबार देखे गए। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमलों में सैन्य ठिकानों के साथ-साथ कुछ नागरिक ढांचों को भी नुकसान पहुंचा है। ईरानी अधिकारियों ने साफ कहा है कि यह हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसका “कड़ा जवाब” दिया जाएगा।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान से आने वाले “तत्काल खतरे” को खत्म करने के लिए की गई है। वहीं इज़रायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इसे देश की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया और इसे “संयुक्त कार्रवाई” करार दिया।
हमले के बाद इज़रायल में सायरन बजने लगे और आपातकाल घोषित कर दिया गया। कई मिसाइलें इज़रायल की ओर बढ़ीं, जिन्हें एयर डिफेंस सिस्टम से रोकने की कोशिश की गई। इसके साथ ही कतर, बहरीन, कुवैत और यूएई जैसे खाड़ी देशों में भी धमाकों की खबर आई है। ईरान का दावा है कि उसने इन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
कतर के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने अपने इलाके में होने वाले कई हमलों को नाकाम कर दिया है। वहीं यूएई की राजधानी अबू धाबी में मिसाइल रोकने के दौरान एक व्यक्ति की मौत की खबर सामने आई है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में भी विस्फोटों की आवाज सुनी गई।
तेहरान में संचार सेवाएं बाधित हो गई हैं और कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क बंद बताया जा रहा है। इज़रायल ने अपना हवाई क्षेत्र नागरिक उड़ानों के लिए बंद कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव केवल ईरान और इज़रायल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट को अपनी चपेट में ले सकता है। दोनों देशों के तीखे बयानों और लगातार हो रहे हमलों से साफ है कि हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं और दुनिया की नजरें अब इस संघर्ष पर टिकी हुई हैं।




