नई दिल्ली: Supreme Court of India में एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई में हो रही देरी अब बड़ा मुद्दा बन गई है। इस मामले पर सुनवाई करते हुए CJI Surya Kant की अगुवाई वाली बेंच ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री पर ही सवाल खड़े कर दिए।
दरअसल, यह PIL पिछले साल फरवरी से ही लंबित पड़ी है और उसे सुनवाई के लिए लिस्ट तक नहीं किया गया। जबकि कोर्ट ने पहले ही इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया था। इस देरी पर नाराजगी जताते हुए बेंच ने साफ कहा, “इस अदालत में कुछ तो गड़बड़ चल रहा है।”
इस मामले में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली भी बेंच का हिस्सा रहे। कोर्ट ने रजिस्ट्रार से इस पूरे मामले पर रिपोर्ट देने को कहा है और अगली सुनवाई के लिए 10 अप्रैल की तारीख तय की गई है।
यह मामला डेटा प्राइवेसी से जुड़ा हुआ है, जिसमें कुछ विदेशी कंपनियों पर आरोप है कि वे भारतीय ग्राहकों की वित्तीय जानकारी बिना अनुमति के इकट्ठा कर रही हैं। याचिका में कहा गया है कि ये कंपनियां लोगों का संवेदनशील डेटा विदेशों में अपने सर्वर पर स्टोर कर रही हैं, जो नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
सरकार की ओर से इस मामले में जवाब दाखिल किया जा चुका है और कोर्ट ने आगे की सुनवाई के लिए तैयारी करने को कहा है। साथ ही एमिकस क्यूरी के तौर पर सुप्रीम कोर्ट की सहायता करने वाले सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर को भी अपना पक्ष स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।




