नई दिल्ली: Himachal Pradesh में आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा है। Sukhvinder Singh Sukhu की सरकार ने पिछले तीन साल में रिकॉर्ड तोड़ 41,173 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। हालांकि, इस दौरान सरकार ने 32,004 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया भी है, लेकिन कुल कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
अब सरकार ने 2026-27 के बजट में फिर से 11,965 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने का प्रस्ताव रखा है। इसका मतलब साफ है कि आने वाले समय में भी प्रदेश की आर्थिक स्थिति आसान नहीं रहने वाली है। आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में कुल कर्ज 1,03,994 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो अगले साल बढ़कर 1,12,319 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
राज्य की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कमाई के स्रोत सीमित हैं, जबकि खर्च तेजी से बढ़ रहा है। वेतन, पेंशन, ब्याज और पुराने कर्ज चुकाने में ही सरकार का करीब 80 फीसदी बजट खर्च हो रहा है। ऐसे में विकास कार्यों और नई योजनाओं के लिए बहुत कम पैसा बच पा रहा है।
ब्याज का बोझ भी तेजी से बढ़ रहा है। 2024-25 में जहां 6,260 करोड़ रुपये ब्याज में गए, वहीं 2026-27 में यह बढ़कर 7,271 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और बढ़ने का अनुमान है, जो सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
इस बीच, केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद होने से स्थिति और मुश्किल हो गई है। इससे राज्य को हर साल मिलने वाली बड़ी आर्थिक मदद रुक गई है। इसी वजह से सरकार को पेट्रोल-डीजल पर सेस और एंट्री टैक्स बढ़ाने जैसे फैसले लेने पड़े हैं, जिसका असर आम जनता पर भी पड़ रहा है।
हिमाचल प्रदेश की आर्थिक हालत फिलहाल दबाव में है। अगर जल्द ही आय बढ़ाने और खर्च नियंत्रित करने के ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है।




