SIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ममता सरकार को बड़ा झटका

देश के कई राज्यों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ा संदेश दिया है। अदालत ने साफ कहा कि मतदाता सूची की जांच की प्रक्रिया को रोका नहीं जाएगा और इसमें किसी भी तरह की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। इस फैसले से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा झटका माना जा रहा है।

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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि वोटर लिस्ट को सही और पारदर्शी बनाना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि राज्यों को इस प्रक्रिया में दखल देने की जरूरत नहीं है और चुनाव आयोग को अपना काम स्वतंत्र रूप से करने दिया जाए।

इस मामले में सबसे गंभीर बात तब सामने आई जब अदालत को बताया गया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के अधिकारियों को धमकाया जा रहा है और कुछ जगहों पर उनके साथ हिंसा की घटनाएं हुई हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य के डीजीपी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि चुनाव आयोग के अधिकारियों को सुरक्षा क्यों नहीं दी जा रही और इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि कई जगह पुलिस एफआईआर तक दर्ज नहीं कर रही है। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में रुकावट डालना बेहद गंभीर मामला है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।

वहीं, पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से जुड़े काम की समय सीमा को बढ़ा दिया गया है। पहले यह प्रक्रिया 14 फरवरी तक पूरी होनी थी, लेकिन अब इसे एक हफ्ते आगे बढ़ा दिया गया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी नियुक्त अधिकारी समय पर अपनी ड्यूटी जॉइन करें और निष्पक्ष तरीके से काम करें। चुनाव आयोग को यह अधिकार भी दिया गया है कि जरूरत पड़ने पर अधिकारियों में बदलाव कर सके।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि SIR की प्रक्रिया जारी रहेगी। अदालत का कहना है कि मतदाता सूची को सही करना किसी सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र के हित में है। आने वाले दिनों में इस फैसले का असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी साफ दिखाई दे सकता है।