होर्मुज़ स्ट्रेट से भारतीय टैंकरों को मिला सुरक्षित रास्ता… बोले जयशंकर

होर्मुज़ स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में तेल और गैस इसी रास्ते से होकर दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। ऐसे में अगर यहां तनाव बढ़ता है तो उसका असर सीधे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है।

भारतीय जहाज़ों को होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने में मदद मिली है। - S. Jaishankar
भारतीय जहाज़ों को होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने में मदद मिली है। - S. Jaishankar

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत की खबर सामने आई है। भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने बताया है कि ईरान के साथ सीधी बातचीत के बाद भारतीय जहाज़ों को होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने में मदद मिली है। इसी कूटनीतिक प्रयास की वजह से शनिवार को भारत के झंडे वाले दो गैस टैंकर सुरक्षित रूप से इस अहम समुद्री रास्ते से गुजर पाए।

विदेश मंत्री जयशंकर ने एक इंटरव्यू में कहा कि भारत लगातार ईरान से बातचीत कर रहा है और इस बातचीत के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। उन्होंने साफ किया कि भारतीय जहाज़ों के लिए कोई स्थायी या सामान्य समझौता नहीं हुआ है, बल्कि हर जहाज़ की आवाजाही अलग-अलग मामलों के आधार पर तय हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बातचीत के बदले ईरान को भारत की ओर से कोई विशेष रियायत नहीं दी गई है।

दरअसल हाल के दिनों में क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर चिंता बढ़ गई थी। इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने कई देशों से इस समुद्री रास्ते को खुला रखने के लिए युद्धपोत भेजने की अपील भी की थी। हालांकि भारत ने सैन्य रास्ते के बजाय कूटनीतिक बातचीत को प्राथमिकता दी है।

ऊर्जा आपूर्ति को लेकर दुनिया के कई देश सक्रिय हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस और इटली जैसे यूरोपीय देश भी ईरान के साथ बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं ताकि तेल और गैस की सप्लाई सामान्य बनी रहे।

इधर कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, इसलिए होर्मुज़ स्ट्रेट की स्थिति भारत के लिए बेहद अहम है।

ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की कूटनीतिक बातचीत फिलहाल राहत देने वाली साबित हुई है, लेकिन क्षेत्र में तनाव बना रहा तो ऊर्जा बाजार और आपूर्ति पर आगे भी असर पड़ सकता है।