असहमति का अधिकार

खबरों के मुताबिक जब नकवी को लगा कि चैनल में उन पत्रकारीय मूल्यों की अनदेखी और उल्लंघन हो रहा है जिन्हें वे महत्वपूर्ण मानते हैं तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया. चैनल को उनके इस्तीफे से कोई आपत्ति नहीं है बल्कि उसका दावा है कि वह नकवी के कामकाज से संतुष्ट नहीं था. आपत्ति यह है कि इस्तीफे और वह भी मोदी के इंटरव्यू के विरोध में की खबर कैसे लीक हुई?

अब सवाल यह है कि क्या नकवी ने मोदी के इंटरव्यू के विरोध में इस्तीफा दिया था. अगर उन्होंने वास्तव में चैनल की संपादकीय नीति से असहमति के आधार पर इस्तीफा दिया था और वह कोई निजी मुद्दा नहीं था तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं होना चाहिए.

यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है कि तमाम चैनल और अखबार जो लोकतंत्र में सभी संस्थाओं से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते रहते हैं, वे खुद पारदर्शिता और जवाबदेही से क्यों बचते हैं? आखिर चैनलों के अंदर पत्रकारों/संपादकों की महत्वपूर्ण संपादकीय और पत्रकारीय मूल्यों-नैतिकता के मुद्दों पर असहमतियों को सार्वजनिक क्यों नहीं होना चाहिए? उदाहरण के लिए, अगर कोई चैनल या अखबार पेड न्यूज या ऐसे ही किसी अनैतिक धंधे में शामिल है और उसका कोई पत्रकार या संपादक इससे असहमत है तो क्या उसे इस्तीफा देने और उसे सार्वजनिक करने का अधिकार नहीं होना चाहिए? क्या ऐसे पत्रकारों/संपादकों को ‘व्हिसल-ब्लोअर’ नहीं मानना चाहिए और उन्हें संरक्षण नहीं मिलना चाहिए? सच यह है कि अगर न्यूज मीडिया के ‘अंडरवर्ल्ड’ का पर्दाफाश करना है, चैनलों/अखबारों के अनैतिक धतकरमों को उजागर करना है और उन्हें लोगों के प्रति जवाबदेह बनाना है तो ऐसा होना ही चाहिए.

2 COMMENTS

  1. This is the unconstitutional attitude of india

    TV towards Mr Nakvi he is always free to express his views about his employer if he is not agree with any decisions of the channel and what will happen with the freedom of expression if any media channel would organise any interview of any leader as per the terms and conditions of the interviewee leader? In my opinion this type of paid media channels must be banned immidately.

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