नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने संसद में बड़ा कदम उठाया है। तृणमूल कांग्रेस की पहल पर विपक्ष के कई सांसदों ने उनके खिलाफ नोटिस दिया है। बताया जा रहा है कि यह नोटिस करीब 10 पन्नों का है, जिसमें सात अलग-अलग बिंदुओं के आधार पर उन्हें पद से हटाने की मांग की गई है। मिली जानकारी के मुताबिक लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में यह नोटिस दिया गया है। लोकसभा में 130 सांसदों और राज्यसभा में 63 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं।
संविधान के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया काफी सख्त और जटिल होती है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को हटाने के लिए वही प्रक्रिया अपनाई जाती है जो सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के लिए लागू होती है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना जरूरी होता है। आम बोलचाल में इसे महाभियोग जैसी प्रक्रिया कहा जाता है।
नियमों के मुताबिक पहले नोटिस पर लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति विचार करते हैं। अगर नोटिस स्वीकार कर लिया जाता है तो आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई जाती है। यह समिति जांच करके अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपती है। अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तभी आगे महाभियोग प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू होती है।
हालांकि मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए इस प्रस्ताव के पास होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। वजह यह है कि किसी भी सदन में विपक्ष के पास विशेष बहुमत के लिए जरूरी संख्या नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह प्रस्ताव संसद में चर्चा का विषय तो बन सकता है, लेकिन इसे पारित कराना विपक्ष के लिए आसान नहीं होगा।




