प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह बयान पूरी तरह राजनीतिक दिखावा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले योगी आदित्यनाथ खुद वंदे मातरम के सभी छह अंतरे पूरे गाकर सुनाएं, उसके बाद यह तय करें कि कौन देशभक्त है और कौन राष्ट्र विरोधी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत को राजनीति से जोड़ना समाज को बांटने वाली सोच को बढ़ावा देता है।
प्रियंका ने आगे कहा कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि आज़ादी के आंदोलन से जुड़ा भावनात्मक प्रतीक है। इसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करना सही नहीं है। उनका कहना था कि देशभक्ति का प्रमाण भाषणों से नहीं, बल्कि काम और व्यवहार से होता है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी राष्ट्रगीत वंदे मातरम का विरोध करती है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि राष्ट्रीय प्रतीकों के खिलाफ अपमानजनक बयान देना देशद्रोह से कम नहीं है।
इस बयान के बाद विपक्षी दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनके साथियों ने खुद कब वंदे मातरम गाया था, यह भी देखा जाना चाहिए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा सत्र के दौरान ऐसे मुद्दे अक्सर राजनीतिक बहस का रूप ले लेते हैं। वंदे मातरम जैसे भावनात्मक विषय पर बयान देना जनता का ध्यान खींचने का आसान तरीका बन जाता है।
फिलहाल यह विवाद बयानबाजी तक ही सीमित है, लेकिन इससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाएगा। एक तरफ सरकार इसे राष्ट्र भावना से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश बता रहा है। वंदे मातरम को लेकर शुरू हुई यह बहस अब प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ लेती नजर आ रही है।




