नई दिल्ली। भारत ने शुक्रवार को राजधानी में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान ‘पैक्स सिलिका’ घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही भारत औपचारिक रूप से अमेरिका के नेतृत्व वाले उस वैश्विक गठबंधन का हिस्सा बन गया है, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को सुरक्षित करना और इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताकत को चुनौती देना है।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में चीन क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर निर्माण में बड़ी शक्ति बनकर उभरा है। कंप्यूटर चिप, मोबाइल फोन, कार, मिसाइल और एआई तकनीक में इस्तेमाल होने वाले सेमीकंडक्टर काफी हद तक इन्हीं खनिजों पर निर्भर हैं। चीन की सप्लाई पर ज्यादा निर्भरता अमेरिका और कई देशों के लिए रणनीतिक और सुरक्षा चिंता का कारण बन गई थी। इसी को देखते हुए ‘पैक्स सिलिका’ गठबंधन की योजना बनाई गई।
इस गठबंधन का मकसद क्रिटिकल मिनरल्स के खनन से लेकर उनकी प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और एआई तकनीक की पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करना है। साथ ही यह कोशिश की जा रही है कि इन क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता कम हो और मित्र देशों के बीच सहयोग बढ़े।
भारत को इस गठबंधन में ऐसे समय शामिल किया गया है, जब वह अमेरिका के साथ व्यापार समझौते और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे भारत को सेमीकंडक्टर और एआई तकनीक में आत्मनिर्भर बनने का बड़ा मौका मिलेगा। भारत पहले से ही टेलीकॉम और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में विदेशी तकनीक पर काफी निर्भर है, ऐसे में यह गठबंधन नई संभावनाएं खोल सकता है।
‘पैक्स सिलिका’ के तहत सदस्य देश मिलकर रणनीतिक निवेश करेंगे और सुरक्षित टेक्नोलॉजी सिस्टम तैयार करेंगे। इसमें आईटी नेटवर्क, फाइबर ऑप्टिक केबल, डेटा सेंटर, और एआई से जुड़े मूल ढांचे को मजबूत करने पर खास जोर दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस पहल से भारत को दो बड़े फायदे होंगे। पहला, उसे क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई में भरोसेमंद साझेदार मिलेंगे। दूसरा, भविष्य में किसी तकनीकी प्रतिबंध का असर भारत पर कम पड़ेगा।
भारत पहले ही ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत हजारों करोड़ रुपये का निवेश कर चुका है, ताकि स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिले और देश में एआई तकनीक का मजबूत आधार तैयार हो। ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल होना इसी दिशा में एक और अहम कदम माना जा रहा है।




