नई दिल्ली: भारत ने सोलर एनर्जी के मामले में एक बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। सिर्फ 14 महीनों में 50 गीगावाट की नई क्षमता जोड़कर देश ने कुल सौर क्षमता 150 गीगावाट तक पहुंचा दी है। खास बात यह है कि जहां पहले 50 गीगावाट तक पहुंचने में 11 साल लग गए थे, वहीं अब वही काम रिकॉर्ड समय में हो रहा है।
National Solar Energy Federation of India के मुताबिक, भारत अब 2026 तक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर बाजार बनने की राह पर है। संस्था के सीईओ Subrahmanyam Pulipaka का कहना है कि देश हर साल करीब 50 गीगावाट की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, जो 2030 के बड़े लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।
सरकार की योजनाएं भी इस ग्रोथ को तेज कर रही हैं। PM Surya Ghar Yojana और PM Kusum Yojana जैसी स्कीम्स से गांवों और शहरों दोनों में सोलर का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स भी इस सेक्टर को नई ताकत दे रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में Commercial & Industrial (C&I) सेक्टर सोलर ग्रोथ का बड़ा इंजन बनेगा। इस सेक्टर ने पहली बार सालाना 10 गीगावाट का आंकड़ा पार किया है। कंपनियां अब खुद बिजली बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।
सिर्फ उत्पादन ही नहीं, मैन्युफैक्चरिंग में भी भारत तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। सरकार की PLI स्कीम, ALMM और BCD जैसे कदमों से सोलर मॉड्यूल और सेल बनाने की क्षमता मजबूत हुई है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि आगे बढ़ने के लिए वेफर और पॉलीसिलिकॉन जैसे कच्चे माल की सप्लाई चेन को भी मजबूत करना जरूरी होगा।
आने वाले समय में सोलर के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण यानी बैटरी स्टोरेज भी अहम भूमिका निभाएगा। अनुमान है कि अगले 18 महीनों में इस क्षेत्र में भी तेज बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
भारत अब सिर्फ सोलर ऊर्जा का इस्तेमाल करने वाला देश नहीं, बल्कि इस क्षेत्र में दुनिया को दिशा देने वाला बड़ा खिलाड़ी बनता जा रहा है।




