पन्नू हत्या साजिश केस: निखिल गुप्ता ने कबूला जुर्म, अब सजा का इंतज़ार

अमेरिका में खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश से जुड़े मामले में बड़ा मोड़ आया है। इस केस के मुख्य आरोपी भारतीय नागरिक Nikhil Gupta ने अमेरिकी अदालत में अपने ऊपर लगे आरोप स्वीकार कर लिए हैं। न्यूयॉर्क की मैनहट्टन फेडरल कोर्ट में सुनवाई के दौरान निखिल गुप्ता ने माना कि वह हत्या की साजिश, सुपारी देने और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में शामिल था। अब अदालत सजा की तारीख तय करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ चुकी है।

Pannu and Gupta
Pannu and Gupta

अदालत में क्या हुआ?

शुक्रवार को हुई सुनवाई में निखिल गुप्ता ने तीनों गंभीर आरोपों में खुद को दोषी बताया। अदालत के सामने उसने कहा कि उसने न्यूयॉर्क में रहने वाले खालिस्तानी आतंकी पन्नू की हत्या के लिए एक व्यक्ति को पैसे दिए थे, जिसे वह हिटमैन समझ रहा था। हालांकि यह साजिश सफल नहीं हो सकी और अमेरिकी एजेंसियों ने समय रहते इसे नाकाम कर दिया।

मजिस्ट्रेट जज ने उसकी याचिका स्वीकार करने की सिफारिश की है और अब अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी। संभावना है कि मई के अंत तक उसे सजा सुना दी जाएगी।

कितनी हो सकती है सजा?

अमेरिकी कानून के तहत जिन तीन आरोपों में निखिल गुप्ता ने जुर्म कबूल किया है, उनमें अधिकतम 40 साल तक की जेल हो सकती है। हालांकि अंतिम फैसला जज के विवेक पर निर्भर करेगा कि वह उसे कितनी सजा सुनाते हैं।

कबूलनामे से क्यों हो रही चर्चा?

इस केस में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निखिल गुप्ता पहले खुद को बेगुनाह बता रहा था। पहले की पेशियों में उसने कहा था कि उसका इस साजिश से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन अब अचानक आरोप स्वीकार करना कई सवाल खड़े कर रहा है। लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या उस पर किसी तरह का दबाव था या उसने कानूनी सलाह के बाद यह कदम उठाया।

निखिल गुप्ता कौन है?

निखिल गुप्ता भारतीय नागरिक है। उसे जून 2024 में चेक गणराज्य से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया था। उस पर आरोप है कि उसने खालिस्तानी आतंकी पन्नू की हत्या के लिए साजिश रची और इसके लिए पैसे भी दिए। फिलहाल वह अमेरिका की एक जेल में बंद है और अदालत के फैसले का इंतजार कर रहा है।

आतंकी पन्नू कौन है?

Gurpatwant Singh Pannun एक खालिस्तानी अलगाववादी नेता है और ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ नामक संगठन का प्रमुख है। वह अमेरिका और कनाडा की नागरिकता रखता है और लंबे समय से भारत के खिलाफ बयानबाजी करता रहा है। भारत सरकार ने उसे यूएपीए कानून के तहत आतंकवादी घोषित कर रखा है।

भारत का क्या कहना है?

भारत सरकार शुरू से इस मामले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार करती रही है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि यह भारत सरकार की नीति के खिलाफ है और सरकार ऐसी किसी साजिश का समर्थन नहीं करती। भारत ने इस मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी बनाई थी।

आगे क्या?

अब सबकी नजरें 15 मार्च की अगली सुनवाई और मई में आने वाले सजा के फैसले पर टिकी हैं। यह मामला न केवल कानूनी बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। निखिल गुप्ता का कबूलनामा इस केस को एक नई दिशा दे चुका है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े और खुलासे होने की संभावना है।