नई दिल्ली: दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य, इन दिनों चर्चा में है। इसी बीच अमेरिका के दिग्गज नेता न्यूट गिंगरिच ने एक ऐसा सुझाव दिया है, जिसने सबको चौंका दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के प्रभाव वाले इस रास्ते पर निर्भर रहने के बजाय एक नई नहर बनाई जानी चाहिए, ताकि तेल सप्लाई बिना किसी खतरे के जारी रह सके।
गिंगरिच का विचार काफी अलग और विवादित है। उनका मानना है कि पहाड़ों को काटकर और जरूरत पड़े तो परमाणु तकनीक का इस्तेमाल करके एक नया समुद्री रास्ता तैयार किया जा सकता है। इस नए रास्ते से जहाज सीधे ओमान की खाड़ी में पहुंचेंगे और ईरान के पास से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
बताया जा रहा है कि यह प्रस्तावित नहर मौजूदा होर्मुज से करीब 150 से 250 किलोमीटर दूर हो सकती है। इससे जहाजों को ज्यादा सुरक्षित दूरी मिल जाएगी और समुद्री यात्रा भी कुछ कम हो सकती है। यानी समय और जोखिम दोनों में कमी आ सकती है।
हालांकि यह कोई बिल्कुल नया विचार नहीं है। 1950 और 60 के दशक में अमेरिका ने ऐसे कई ‘एटॉमिक प्रोजेक्ट्स’ पर काम करने की योजना बनाई थी। उस समय वैज्ञानिकों का मानना था कि परमाणु विस्फोटों के जरिए बड़े-बड़े निर्माण कार्य तेजी से किए जा सकते हैं। पनामा और कोलंबिया में भी इस तरह की योजनाएं बनाई गई थीं।
लेकिन समय के साथ इन योजनाओं को खारिज कर दिया गया। वजह थी इनके गंभीर खतरे। परमाणु धमाकों से निकलने वाला रेडियोएक्टिव कचरा इंसानों और पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। इसके अलावा समुद्री इकोसिस्टम पर भी इसका बुरा असर पड़ने का खतरा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में इस तरह के विचार व्यावहारिक नहीं हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून भी इसकी इजाजत नहीं देते। फिर भी, इस बयान ने यह जरूर दिखा दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया कितनी चिंतित है।




